
विश्व पटल पर शूलिनी विश्वविद्यालय ने कायम रखी बादशाहत
शूलिनी विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में और भारत में तीसरे पायदान पर
सोलन( सुखदर्शन ठाकुर) हिमाचल प्रदेश के सोलन की मनमोहक पहाड़ियों में शिक्षा और शोध की अलख जगाने वाला शूलिनी विश्वविद्यालय एक बार फिर वैश्विक शैक्षणिक जगत में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराने में सफल रहा है। टाइम्स हायर एजुकेशन की वर्ष 2027 की विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में शूलिनी विश्वविद्यालय ने लगातार तीसरे वर्ष दुनिया के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में अपना स्थान बरकरार रखा है। विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर 451 से 500 के बीच के वर्ग में स्थान मिला है। जबकि भारत की रैंकिंग में शूलिनी विश्वविद्यालय तीसरे पायदान पर रहा है।
शूलिनी विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत से शीर्ष 500 में स्थान बनाने वाले संस्थानों में भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु 254वें स्थान पर और साविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज 326 से 350 के वर्ग में रहा। इनके बाद शूलिनी विश्वविद्यालय 451 से 500 के वर्ग में शामिल हुआ है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में स्थापित एक अपेक्षाकृत युवा विश्वविद्यालय का देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ विश्व की शीर्ष सूची में लगातार जगह बनाना प्रदेश के लिए भी गौरव का विषय है।
रैंकिंग में शूलिनी विश्वविद्यालय की शोध क्षमता विशेष रूप से उभरकर सामने आई है। विश्वविद्यालय ने शोध गुणवत्ता के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर 184वां स्थान हासिल किया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण के मामले में भारत में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय का समग्र प्रदर्शन 47.4 से 48.7 के दायरे में रहा। यह उपलब्धि बताती है कि संस्थान ने केवल शिक्षण तक सीमित रहने के बजाय शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
वर्ष 2027 की विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में दुनिया के 2297 संस्थानों को शामिल किया गया है। इनमें भारत के 143 विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं। एशिया के भी एक हजार से अधिक संस्थानों का मूल्यांकन किया गया। ऐसे व्यापक वैश्विक मूल्यांकन में शूलिनी विश्वविद्यालय का लगातार तीसरे वर्ष शीर्ष 500 में बने रहना उसकी निरंतर शैक्षणिक प्रगति को रेखांकित करता है।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल की धरती पर उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू हुई यह यात्रा वर्ष 2009 में शूलिनी विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ एक नए पड़ाव पर पहुंची है। संस्थापक कुलाधिपति प्रो. पी.के. खोसला की परिकल्पना थी कि हिमालयी क्षेत्र में ऐसा विश्वविद्यालय विकसित किया जाए, जो शिक्षा के साथ शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाए।
स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय ने शोध आधारित शिक्षा, नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहभागिता को अपनी कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया। इसी निरंतर प्रयास का परिणाम है कि शूलिनी विश्वविद्यालय पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न रैंकिंग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा है। पिछले पांच वर्षों में यह चौथा अवसर है, जब विश्वविद्यालय ने विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में जगह बनाई है।
संस्थापक कुलाधिपति प्रो. पी.के. खोसला ने कहा कि जब शूलिनी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, तब उद्देश्य था कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित कोई विश्वविद्यालय भी विश्व के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों ने इस लक्ष्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का विश्वास दिया है। उन्होंने आने वाले तीन वर्षों में विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में स्थान बनाने का लक्ष्य रखा है।
प्रो. कुलाधिपति प्रो. विशाल आनंद ने कहा कि एक बार शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में जगह बनाना निश्चित रूप से उपलब्धि है, लेकिन लगातार तीन वर्षों तक इस सूची में बने रहना अधिक चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए हर वर्ष शैक्षणिक और शोध क्षेत्र में निरंतर प्रदर्शन करना पड़ता है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय विश्वविद्यालय से जुड़े सभी शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के प्रयासों को दिया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अतुल खोसला ने कहा कि विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों में पहचान मिलना शूलिनी के लिए गौरव का क्षण है। विश्वविद्यालय आने वाले समय में शोध के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को और मजबूत करेगा। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा देने पर जोर रहेगा, जिससे उनमें स्वतंत्र रूप से सोचने, सवाल पूछने और नए विचारों को आकार देने की क्षमता विकसित हो।
शूलिनी विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि हिमाचल में उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप की तस्वीर भी पेश करती है। सोलन की पहाड़ियों में शुरू हुआ संस्थान आज विश्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ एक ही सूची में खड़ा है। लगातार तीसरे वर्ष शीर्ष 500 में स्थान बरकरार रखना विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
Solan, Solan | Oct 1, 2026