
पश्चिम बंगाल में बाल विवाह पर सरकार का शिकंजा, 18 से पहले मां बनने पर पति पर POCSO
60 हजार नाबालिग प्रसव के आंकड़े ने बढ़ाई चिंता, घर-घर जांच और सख्त कार्रवाई की तैयारी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की घोषणा की है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि 18 वर्ष की उम्र पूरी करने से पहले किसी लड़की के मां बनने का मामला सामने आने पर उसके पति के खिलाफ POCSO कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के इस फैसले के पीछे कम उम्र में गर्भधारण के सामने आए आंकड़े अहम माने जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच पश्चिम बंगाल में 18 वर्ष से कम उम्र की करीब 60 हजार लड़कियों के प्रसव का मामला सामने आया। मुर्शिदाबाद इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां इसी अवधि में 12,847 नाबालिग लड़कियों के प्रसव की जानकारी सामने आई।
मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसे मामलों में राज्य सरकार खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाने और नाबालिग विवाह के मामलों की पहचान करने की तैयारी की जा रही है। सरकार घर-घर जांच अभियान के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहीं नाबालिग लड़कियों का विवाह तो नहीं कराया गया है।
सरकार ने बाल विवाह कराने या उसमें सहयोग करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। इसमें परिवार के सदस्य, बिचौलिये और विवाह कराने में भूमिका निभाने वाले अन्य लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है। सरकार का जोर ऐसे मामलों की समय रहते पहचान करने और कानूनी कार्रवाई के साथ जागरूकता बढ़ाने पर रहेगा।
बाल विवाह निषेध कानून के तहत लड़की की शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 वर्ष है। सरकार का नया अभियान इसी कानूनी उम्र का पालन सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा। राज्य में प्रशासन, पुलिस और स्थानीय स्तर के अधिकारियों को भी ऐसे मामलों की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए सक्रिय किया जा रहा है।