
जमुई की घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने और बेटियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा तमाचा है।
10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के साथ दिनदहाड़े सरेराह जिस तरह की बर्बरता और दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आया है, उसने अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। यह देखकर मन अत्यंत विचलित और आक्रोशित है कि दिन के उजाले में भी हमारी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं।
जब अपराध की क्रूरता सारी मानवीय सीमाएं लांघ जाए, तो न्याय की गति और उसका प्रभाव भी उतना ही कठोर होना चाहिए। ऐसे मामलों में केवल POCSO या कानूनी धाराओं की औपचारिकता काफी नहीं है, बल्कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित और ऐसी सख्त सजा तय होनी चाहिए जो समाज में मिसाल बने। जब तक अपराधियों के मन में कानून का ऐसा खौफ नहीं होगा जो उन्हें कांपने पर मजबूर कर दे, तब तक बेटियों के लिए सुरक्षित समाज का दावा अधूरा ही रहेगा।
अब सिर्फ संवेदना या चिंता जताने से काम नहीं चलेगा, प्रशासन को बिना किसी ढिलाई के आरोपियों पर नजीर पेश करने वाली कठोरतम कार्रवाई करनी होगी।
#JamuiNews #JamuiCrime #JusticeForDaughter #StrictActionNow #WomenSafety #Biharnews #FastTrackJustice #StopCrimeAgainstWomen