
कुल्लू दशहरा में ‘नज़राना’ नहीं, ‘देव-भेंट’ शब्द को सम्मान देने का विनम्र आग्रह
Kullu Times
कुल्लू की समृद्ध देव-परंपरा, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में देव संस्कृति शोध संस्थान ने एक महत्वपूर्ण भाषाई एवं सांस्कृतिक आग्रह किया है। संस्थान का कहना है कि कुल्लू दशहरा के दौरान देवताओं को अर्पित की जाने वाली राशि अथवा उपहार के लिए प्रचलित “नज़राना” शब्द के स्थान पर “देव-भेंट” जैसे अधिक आत्मीय और सम्मानपूर्ण शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए।
संस्थान की ओर से कहा गया कि—
“देवता को धन नहीं दिया जाता—श्रद्धा अर्पित की जाती है। धन उस श्रद्धा का मात्र एक माध्यम है।”
कुल्लू की देव संस्कृति में देवता के प्रति अर्पित की जाने वाली प्रत्येक वस्तु केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण की अभिव्यक्ति है। ऐसे में शब्दावली भी उसी भावभूमि को व्यक्त करने वाली होनी चाहिए।
संस्थान ने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रचलित शब्द का विरोध नहीं है और न ही किसी भाषा या परंपरा के प्रति असम्मान का भाव है। “नज़राना” शब्द अपने ऐतिहासिक संदर्भ में भेंट अथवा सम्मान के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, लेकिन कुल्लू की अपनी देव-परंपरा के संदर्भ में “देव-भेंट” शब्द अधिक आत्मीय, सांस्कृतिक और श्रद्धापूर्ण भाव व्यक्त करता है।
संस्थान के अनुसार, कुल्लू दशहरा केवल एक उत्सव नहीं बल्कि हिमालय की जीवंत देव-संस्कृति का विराट मंच है। यहां आने वाले देवता, देव रथ, देवलू, बजंतरी और श्रद्धालु सदियों पुरानी लोक परंपरा के वाहक हैं। इसलिए इस परंपरा से जुड़े शब्दों में भी हमारी अपनी सांस्कृतिक चेतना और सम्मान झलकना चाहिए।
संस्थान ने समाज, देव समाज, दशहरा आयोजन से जुड़े सभी पक्षों और मीडिया से विनम्र आग्रह किया है कि—
“नज़राना” के स्थान पर “देव-भेंट” शब्द को सम्मानपूर्वक अपनाने पर विचार किया जाए।
यह पहल किसी शब्द को हटाने की नहीं, बल्कि अपनी देव-संस्कृति की शब्दावली को सम्मान देने की पहल है।
देव संस्कृति शोध संस्थान ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की स्मृति, आस्था और पहचान को भी अपने भीतर संजोए रखती है। इसलिए अपनी देव परंपरा के लिए सम्मानपूर्ण शब्दों का संरक्षण भी सांस्कृतिक संरक्षण का ही एक हिस्सा है।
जय जमलूपंथ।
जय जै़मोल जी।
जय देव संस्कृति।
जारीकर्ता:जय ठाकुर अध्यक्ष
देव संस्कृति शोध संस्थान
कुल्लू, हिमाचल प्रदेश🙏🙏🙏
Kullu, Kullu | Oct 5, 2026