
गर्मी से तप रहा उत्तराखंड, बिजली की मांग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड; ट्रांसफार्मर और लाइनें भी पड़ने लगीं कमजोर
देहरादून/हल्द्वानी।
उत्तराखंड इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। मैदानी जिलों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि पहाड़ी इलाकों में भी सामान्य से अधिक गर्मी दर्ज की जा रही है। बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा असर अब बिजली व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश में बिजली की मांग ने अब तक के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और हालात ऐसे बन गए हैं कि बिजली की लाइनें और ट्रांसफार्मर भी बढ़ते लोड के दबाव में हांफने लगे हैं। कई शहरों और कस्बों में तकनीकी खराबी और ओवरलोडिंग के कारण बार-बार बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार जून महीने में तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण लोगों द्वारा एयर कंडीशनर, कूलर, पंखे और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग काफी बढ़ गया है। सुबह से देर रात तक एसी और कूलर चलने से बिजली की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यही वजह है कि राज्य में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। उत्तराखंड की दैनिक ऊर्जा मांग जून के दौरान लगातार बढ़ती रही और कई दिनों में यह अब तक के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में बिजली की मांग सुबह और शाम के समय अधिक होती है, लेकिन इस बार दिन और रात दोनों समय मांग ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। रात में भी तापमान कम नहीं होने के कारण लोग पूरी रात एसी और कूलर चलाने को मजबूर हैं। इससे बिजली तंत्र पर लगातार दबाव बना हुआ है।
प्रदेश के कई जिलों में ट्रांसफार्मरों के गर्म होने, फ्यूज उड़ने और लाइन ट्रिप होने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर क्षमता से अधिक लोड उठाने को मजबूर हैं। विभागीय कर्मचारियों को दिन-रात खराब ट्रांसफार्मर बदलने और लाइनों की मरम्मत में जुटना पड़ रहा है। बिजली विभाग के नियंत्रण कक्षों में शिकायतों की संख्या भी सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई है।
हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार और देहरादून जैसे मैदानी क्षेत्रों में बिजली की मांग सबसे अधिक बढ़ी है। इन शहरों में बड़ी संख्या में एसी और कूलर इस्तेमाल होने के कारण फीडरों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई मोहल्लों में वोल्टेज कम होने और बार-बार बिजली जाने की समस्या से लोग परेशान हैं। शाम के समय लोड बढ़ने पर कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार बिजली वितरण प्रणाली को तैयार करते समय एक निश्चित लोड का अनुमान लगाया जाता है, लेकिन इस बार गर्मी के कारण खपत सामान्य अनुमान से कहीं अधिक बढ़ गई है। कई ट्रांसफार्मर अपनी निर्धारित क्षमता से ज्यादा बिजली आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे उनके खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि इसी तरह गर्मी जारी रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी इस वर्ष गर्मी ने बिजली क्षेत्र की परीक्षा ले ली है। देश में बिजली की मांग पहली बार 270 गीगावाट से ऊपर पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। बढ़ती मांग के चलते कई राज्यों में बिजली कटौती और आपूर्ति संबंधी समस्याएं देखने को मिली हैं।
उत्तराखंड की स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि राज्य अपनी जरूरत की पूरी बिजली खुद पैदा नहीं करता। राज्य की बड़ी बिजली आवश्यकता केंद्रीय पूल और अन्य स्रोतों से पूरी की जाती है। गर्मी के मौसम में जब देशभर में मांग बढ़ जाती है तो अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। जून 2026 की ऊर्जा रिपोर्ट के अनुसार राज्य को अपनी मांग पूरी करने के लिए बाहरी स्रोतों से बड़ी मात्रा में बिजली लेनी पड़ी।
बिजली विभाग का कहना है कि मांग बढ़ने के बावजूद आपूर्ति को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं और खराब उपकरणों को तत्काल बदला जा रहा है। विभागीय टीमें चौबीस घंटे फील्ड में तैनात हैं ताकि किसी भी खराबी को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।
वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं की शिकायत है कि कई इलाकों में बिना सूचना के बिजली कटौती की जा रही है। लोगों का कहना है कि दिन में कई बार बिजली जाने से घरेलू कामकाज और कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत पर भी इसका असर पड़ रहा है। कई स्थानों पर पानी की आपूर्ति भी बिजली पर निर्भर होने के कारण प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां और बढ़ सकती हैं क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की तीव्रता और अवधि लगातार बढ़ रही है। केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि वितरण प्रणाली को भी मजबूत बनाना होगा। पुराने ट्रांसफार्मरों को बदलना, नए फीडर बनाना और स्मार्ट ग्रिड तकनीक अपनाना समय की जरूरत बन चुकी है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज जैसे विकल्प भविष्य में बिजली संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दिन के समय सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग कर शाम और रात के लिए ऊर्जा को संग्रहित किया जा सकता है, जिससे ग्रिड पर दबाव कम होगा।
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से भी बिजली का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि जरूरत न होने पर एसी, कूलर और अन्य उपकरण बंद रखें, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का इस्तेमाल करें और शाम के पीक आवर्स में अनावश्यक बिजली खपत से बचें। यदि लोग थोड़ी सावधानी बरतें तो बिजली तंत्र पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में बिजली की मांग और बढ़ सकती है। यदि तापमान इसी तरह बना रहा तो बिजली विभाग के सामने आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती साबित होगा। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि उत्तराखंड का बिजली तंत्र इस अभूतपूर्व मांग के दबाव को कितनी मजबूती से झेल पाता है।
एक बात साफ है—इस बार गर्मी ने सिर्फ लोगों को ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था को भी पसीने-पसीने कर दिया है।