
उपेक्षा के साए में अनूपगढ़ की ऐतिहासिक पर्यटक स्थल,
कार पर भारत भ्रमण कर रहा नासिक का दंपत्ति,
जानकारी के आभाव में बिना रुके निकल गया आगे
सीमावर्ती क्षेत्र अनूपगढ़ का समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव आज भी पर्यटन विभाग की उदासीनता के चलते गुमनामी में है। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब भारत भ्रमण पर निकला महाराष्ट्र के नासिक का एक बुजुर्ग दंपत्ति अनूपगढ़ से होकर गुजरा, लेकिन क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी और प्रचार-प्रसार के अभाव में बिना रुके आगे बढ़ गया। नेशनल हाईवे 911 पर सुबह करीब 10:30 बजे जब मौके से गुजर रहा था तो उसने दंपत्ति से बातचीत की तो एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई। नासिक निवासी 63 वर्षीय रवि पारीक अपनी पत्नी संगीता पारीक की देश घूमने की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें कार से पूरे भारत का भ्रमण करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 13 मई को नासिक से उन्होंने यात्रा शुरू की थी। जिसके बाद वे महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्वी राज्यों, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और पंजाब सहित देश के अनेक प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों का भ्रमण करते हुए अनूपगढ़ पहुंचे। रवि पारीक ने बताया कि अब तक वे करीब 12 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुके हैं और यात्रा समाप्त होने तक लगभग 16 हजार किलोमीटर का सफर तय होने की संभावना है। खास बात ये है कि ये ड्राइविंग भी वे खुद कर रहे है। उनका अगला पड़ाव अनूपगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, सोमनाथ, द्वारका और पालिताना है, जिसके बाद वे वापस नासिक लौटेंगे। उनसे जब अनूपगढ़ के ऐतिहासिक चीजों के बारे में पूछा तो उन्होंने कोई जानकारी नहीं होना बताया।
हालांकि इस प्रेरणादायक यात्रा के बीच अनूपगढ़ के लिए एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया। देशभर के प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को देखने वाला यह दंपत्ति अनूपगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों से अनजान रहा। क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध लैला-मजनू की मजार, गांव 4 एमएसआर व बरोर में सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े प्राचीन अवशेष, अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में बॉर्डर टूरिज्म की संभावनाएं तथा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा ऐतिहासिक गढ़ जैसी महत्वपूर्ण धरोहरें मौजूद हैं। इसके बावजूद पर्याप्त प्रचार-प्रसार और पर्यटन विकास की कमी के कारण ये स्थल राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान नहीं बना पाए हैं। यदि इन धरोहरों का संरक्षण, विकास और प्रभावी ब्रांडिंग की जाए तो अनूपगढ़ न केवल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। नासिक के इस दंपत्ति का अनूपगढ़ से बिना रुके गुजर जाना पर्यटन विभाग के लिए एक बड़ा संदेश है कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को पहचान दिलाने के लिए अब ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।