
हरियाणा में बिजली संकट भाजपा सरकार की नाकामी का प्रमाण: आदर्श पाल सिंह
गुरुग्राम व नूह में बिजली वितरण के निजीकरण से बढ़ी चिंता, पूरी व्यवस्था के निजीकरण की आशंका से आम जनता पर पड़ सकता है बोझ
जगाधरी। आम आदमी पार्टी के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सदस्य राष्ट्रीय परिषद आदर्श पाल सिंह ने हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल एवं विरोध प्रदर्शन के चलते प्रभावित बिजली व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था का चरमराना सरकार की नाकामी और उसकी गलत नीतियों का परिणाम है। सरकार निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए निजीकरण की नीति अपना रही है, जिसका खामियाजा भविष्य में आम जनता, उद्योगों और किसानों को भुगतना पड़ सकता है।
आदर्श पाल सिंह ने कहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में आम जनजीवन और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। घरों से लेकर उद्योग-धंधों तक बिजली संकट लोगों की परेशानियां बढ़ा रहा है। सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम व नूह में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में उठाए गए कदम चिंता का विषय हैं। आशंका है कि यदि सरकार इसी नीति पर आगे बढ़ती रही, तो भविष्य में प्रदेश की पूरी बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने का रास्ता खुल सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगपतियों और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ने तथा बिजली सेवाओं को लेकर नई परेशानियां खड़ी होने की आशंका है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी निजीकरण नीति से आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा कैसे होगी और बिजली सेवाओं की जवाबदेही किसकी होगी।
उन्होंने कहा कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को केवल मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। घरेलू उपभोक्ताओं को अपने परिवार की जरूरतों के लिए, उद्योगों को उत्पादन के लिए और किसानों को खेती के लिए निर्बाध एवं किफायती बिजली की आवश्यकता होती है। यदि बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनियों के नियंत्रण में जाती है, तो आम लोगों के मन में दरों, सेवा की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। सरकार को निजी कंपनियों के हितों के बजाय जनता के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आदर्श पाल सिंह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि एक तरफ पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार निजी क्षेत्र के थर्मल प्लांट को खरीदकर सरकारी क्षेत्र में लाने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा की भाजपा सरकार पर सरकारी संस्थानों के निजीकरण को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यही आम आदमी पार्टी और भाजपा की नीतियों के बीच बुनियादी अंतर है। आम आदमी पार्टी सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने की पक्षधर है, जबकि भाजपा सरकार की नीतियां आम जनता के हितों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों का निजीकरण केवल कर्मचारियों के रोजगार और अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम उपभोक्ताओं के भविष्य से भी है। निजीकरण के कारण रोजगार के अवसरों, बिजली सेवाओं की लागत और आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा आम जनता के लिए सुलभ और किफायती बनी रहे।
आदर्श पाल सिंह ने हड़ताल कर रहे बिजली कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगों और उनके भविष्य से जुड़े सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे कर्मचारियों की जायज मांगों का समर्थन करें और सरकार पर जनहित में निर्णय लेने का दबाव बनाएं। उन्होंने कहा कि आज अपने अधिकारों और सार्वजनिक सेवाओं को बचाने के लिए उठाई गई आवाज आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने भाजपा सरकार से मांग की कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, बिजली कर्मचारियों से बातचीत कर समाधान निकाले और प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए। यदि सरकार ने जनहित और कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी जारी रखी, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
आदर्श पाल सिंह ने कहा कि बिजली जनता की बुनियादी जरूरत है, किसी निजी कंपनी के मुनाफे का साधन नहीं। सरकार को निजीकरण की नीति छोड़कर जनता, किसानों, उद्योगों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।