
➡️ सेवा संकल्प अभियान 2026: सेवा की कहानी
➡️ आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना से महेश यादव की बदली तकदीर, डेयरी व्यवसाय से बढ़ी आय
सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत ‘कहानी सेवा की’ श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं ग्राम सागोनी उमरिया निवासी सीमांत कृषक श्री महेश यादव की, जिन्होंने आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना का लाभ लेकर पशुपालन को अपनी आय का सशक्त माध्यम बनाया है। कभी उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं की कमी से जूझ रहे महेश यादव आज डेयरी व्यवसाय के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
महेश यादव बताते हैं कि उन्हें खेती-किसानी के साथ पशुपालन का शौक था, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण वे उन्नत नस्ल के दुधारू पशु नहीं खरीद पा रहे थे। इसी दौरान उन्हें अखबार के माध्यम से आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की जानकारी मिली। उन्होंने पशु चिकित्सालय राहतगढ़ पहुंचकर योजना की जानकारी ली और आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया। पशुपालन विभाग द्वारा उनका आवेदन ऋण स्वीकृति के लिए बैंक भेजा गया।
दिसंबर 2025 में बैंक से ऋण स्वीकृत होने और शासन से 1 लाख 6 हजार 250 रुपये का अनुदान मिलने के बाद उन्होंने हरियाणा से पांच उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंसें खरीदीं। इनका तीन वर्ष का बीमा भी कराया। प्रत्येक भैंस से लगभग 9 लीटर दूध प्राप्त होने लगा। दूध की अच्छी खपत के कारण उन्हें प्रतिमाह 12 हजार रुपये से अधिक की शुद्ध आय होने लगी। इसके बाद उन्होंने अपनी बचत और व्यवसाय से प्राप्त आय के आधार पर बैंक ऋण चुकाने के साथ पशुपालन का विस्तार किया और 10 अतिरिक्त मुर्रा भैंसें भी खरीदीं।
गोबर गैस और जैविक खाद से खेती को भी मिला लाभ
महेश यादव ने पशुपालन के साथ पर्यावरण अनुकूल उपायों को भी अपनाया। उन्होंने गोबर गैस संयंत्र स्थापित किया, जिसमें भैंसों से प्राप्त गोबर का उपयोग खाना बनाने के लिए किया जाता है। गोबर गैस संयंत्र से निकलने वाली जैविक खाद का उपयोग खेतों में करने से फसल उत्पादन में भी वृद्धि हुई। इस प्रकार पशुपालन और खेती की पूरकता से उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलने लगा। महेश यादव के अनुसार, वर्तमान में उनकी वार्षिक आय ढाई लाख रुपये से अधिक हो गई है। वे अपने अनुभव अन्य किसान भाइयों के साथ साझा कर उन्हें भी योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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