माँ सहजा भगवती मंदिर: जहां न्याय की गुहार कभी खाली नहीं जाती
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सिरवाड़ी गांव में स्थित माँ सहजा भगवती मंदिर आस्था, शक्ति और पौराणिक मान्यताओं का प्रमुख केंद्र है। सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था इस पावन धाम से जुड़ी हुई है।
स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, माँ मठियाणा देवी का मूल नाम सहजा था। कहा जाता है कि तिब्बत के राजकुमार से विवाह के बाद वह सौतेली मां के षड्यंत्र का शिकार हुईं। पति की हत्या के बाद अलकनंदा-मंदाकिनी के पावन संगम पर सती होने के दौरान उनकी दैवीय शक्तियां जागृत हुईं।
मान्यता है कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध महाशक्ति के रूप में प्रकट होकर देवी ने दुष्ट शक्तियों का संहार किया और इसके बाद सिरवाड़ी गांव को अपना स्थायी धाम बनाया।
आज माँ सहजा भगवती को क्षेत्रवासी केवल अपनी रक्षक कुलदेवी के रूप में ही नहीं, बल्कि ‘न्याय की देवी’ के रूप में भी पूजते हैं। श्रद्धालुओं की गहरी मान्यता है कि इस पावन दरबार में सच्चे मन से की गई न्याय की पुकार मां के दरबार से कभी खाली नहीं लौटती।