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*#कहानी सफलता की#* सरकारी योजना, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ने बदली सुषमा देवी की तकदीर* *दुग्ध उत्पादन से आत्मनिर्भर बनीं आनंदपुर की महिला, अब अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत* ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गव्य विकास विभाग की योजनाएं पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रभावी परिणाम दे रही हैं। इन योजनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण आनंदपुर प्रखंड के आनंदपुर गांव की निवासी श्रीमती सुषमा देवी हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी मेहनत, आत्मविश्वास तथा विभागीय सहयोग के बल पर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक सुषमा देवी का परिवार सीमित आय पर निर्भर था। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा तथा घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय स्वयं कुछ करने का संकल्प लिया। इसी दौरान उन्हें गव्य विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गोपालन प्रशिक्षण में भाग लेकर वैज्ञानिक पशुपालन, पशुओं के पोषण, रोग नियंत्रण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीक तथा व्यवसाय प्रबंधन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण से मिली जानकारी और आत्मविश्वास के आधार पर वर्ष 2021-22 में उन्होंने गव्य विकास विभाग की 50 प्रतिशत अनुदान योजना का लाभ उठाते हुए गाय पालन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों, अनुभव की कमी और पशुपालन से जुड़ी चुनौतियों ने कई बार उन्हें परेशान किया, लेकिन उन्होंने धैर्य और लगन के साथ कार्य जारी रखा। विभागीय अधिकारियों के नियमित मार्गदर्शन, संतुलित पशु आहार, समय-समय पर टीकाकरण, स्वच्छ पशुशाला तथा वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धति को अपनाकर उन्होंने धीरे-धीरे अपने दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की। आज श्रीमती सुषमा देवी के पास 8 दुधारू गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। स्थानीय बाजार में दूध की नियमित बिक्री के साथ-साथ वे दूध से घी, पनीर और दही जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं। इस व्यवसाय से होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं, परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर रही हैं और भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं। श्रीमती सुषमा देवी बताती हैं, *"एक समय ऐसा था जब परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन हो जाता था। गव्य विकास विभाग से मिले प्रशिक्षण और सरकारी योजना का लाभ मिलने के बाद मैंने पूरे मन से दुग्ध व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन विभाग के सहयोग और अपनी मेहनत से आज मैं आत्मनिर्भर हूं। इस व्यवसाय ने मुझे आर्थिक मजबूती के साथ आत्मसम्मान भी दिया है। मैं चाहती हूं कि गांव की अन्य महिलाएं भी आगे आएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने पैरों पर खड़ी हों।"* जिला गव्य विकास पदाधिकारी श्री राम नारायण शाश्वत ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल अनुदान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लाभुकों को वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़कर उन्हें स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा लाभुकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, पशु स्वास्थ्य संबंधी सलाह तथा समय-समय पर आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि *"श्रीमती सुषमा देवी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लाभुक प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में अपनाएं और योजनाओं का सही उपयोग करें, तो पशुपालन अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। विभाग का प्रयास है कि जिले के अधिक से अधिक किसान और महिलाएं दुग्ध उत्पादन से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं।"* उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा, *"श्रीमती सुषमा देवी की उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से लिया जाए और उसके साथ मेहनत एवं दृढ़ संकल्प जोड़ा जाए, तो सीमित संसाधनों में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। उनकी सफलता जिले की अन्य महिलाओं एवं किसानों के लिए प्रेरणा है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि अधिकाधिक परिवार स्वरोजगार आधारित गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिले।"* पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन एवं गव्य विकास विभाग जिले के पात्र किसानों एवं महिलाओं से अपील करता है कि वे विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अनुदान का लाभ उठाकर वैज्ञानिक पशुपालन को अपनाएं। दुग्ध उत्पादन न केवल अतिरिक्त आय का विश्वसनीय स्रोत है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण और महिला स्वावलंबन की दिशा में एक प्रभावी माध्यम भी सिद्ध हो रहा है। श्रीमती सुषमा देवी की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ, वैज्ञानिक सोच और निरंतर परिश्रम किसी भी परिवार की तस्वीर बदल सकता है।

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*मलेरिया जागरूकता*
*जल्दी जांच, सही इलाज - मलेरिया पर प्रभावी वार*

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Sonua, Pashchimi Singhbhum | Jul 6, 2026

*मलेरिया जागरूकता:- सुरक्षित रहें, जागरूक रहें, मलेरिया से बचें*

*बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं.*

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Sonua, Pashchimi Singhbhum | Jul 6, 2026

*आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षित एवं समावेशी विद्यालयी वातावरण पर जिला प्रशासन का विशेष जोर*

*निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन की हुई समीक्षा, बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव पर होगी सख्त कार्रवाई*

पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में शिक्षा का अधिकार अधिनियम(आरटीई) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिले के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार सहित जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्य एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन की अद्यतन स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आरटीई के प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र बच्चों के नामांकन में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों सहित विद्यालय में अध्ययनरत किसी भी छात्र-छात्रा के साथ किसी प्रकार का भेदभाव, असमान व्यवहार अथवा उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी बच्चों को समान अवसर, सम्मान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रत्येक विद्यालय की जिम्मेदारी है। उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निर्देश दिया कि जिले के सभी निजी विद्यालयों में वाहन सुरक्षा एवं फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने विद्यालय प्राचार्यों से अपील की कि वे केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता विकसित करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नियमित रूप से सड़क सुरक्षा, मलेरिया एवं डायरिया से बचाव, तंबाकू निषेध, स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि बच्चे स्वयं जागरूक नागरिक बनने के साथ-साथ अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक कर सकें।

बैठक में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सरकारी विद्यालयों की तर्ज पर निजी विद्यालयों में भी "प्रोजेक्ट परख" के अंतर्गत "बोलेगा सिंहभूम" तथा "आज क्या सीखे" कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल एवं आत्मविश्वास का विकास होगा, जो उनके समग्र व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से प्रत्येक निजी विद्यालय में प्रत्येक माह "खेल महोत्सव" आयोजित करने का भी निर्देश दिया। इसके साथ ही प्रत्येक माह की 20 तारीख को विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों का सामूहिक "जन्मोत्सव" आयोजित कर उन्हें सम्मानित करने एवं सकारात्मक विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर बल दिया।

उपायुक्त ने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत सभी निजी विद्यालय प्रबंधन से अपील की कि वे "निक्षय मित्र" बनकर जिले के टीबी मरीजों को गोद लेने की दिशा में आगे आएं तथा उनके पोषण एवं उपचार सहयोग में सहभागिता निभाएं। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक सक्षम संस्थान की भागीदारी से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त किया जा सकेगा। बैठक में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व देते हुए उपायुक्त ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया कि विद्यालय परिसर एवं उपलब्ध खाली स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाए तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।

बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री प्रिंस कुमार एवं जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार ने भी आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति, सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न नवाचार कार्यक्रमों में निजी विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया।

बैठक के अंत में उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी एवं निजी विद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित कर शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सामाजिक संवेदनशीलता तथा समग्र व्यक्तित्व विकास को नई दिशा देना है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षा की कि वे प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए इन सभी निर्देशों का गंभीरतापूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करें, जिससे पश्चिमी सिंहभूम शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बन सके।

*आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षित एवं समावेशी विद्यालयी वातावरण पर जिला प्रशासन का विशेष जोर* *निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन की हुई समीक्षा, बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव पर होगी सख्त कार्रवाई* पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में शिक्षा का अधिकार अधिनियम(आरटीई) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिले के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार सहित जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्य एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन की अद्यतन स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आरटीई के प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र बच्चों के नामांकन में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों सहित विद्यालय में अध्ययनरत किसी भी छात्र-छात्रा के साथ किसी प्रकार का भेदभाव, असमान व्यवहार अथवा उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी बच्चों को समान अवसर, सम्मान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रत्येक विद्यालय की जिम्मेदारी है। उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निर्देश दिया कि जिले के सभी निजी विद्यालयों में वाहन सुरक्षा एवं फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके। बैठक के दौरान उपायुक्त ने विद्यालय प्राचार्यों से अपील की कि वे केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता विकसित करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नियमित रूप से सड़क सुरक्षा, मलेरिया एवं डायरिया से बचाव, तंबाकू निषेध, स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि बच्चे स्वयं जागरूक नागरिक बनने के साथ-साथ अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक कर सकें। बैठक में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सरकारी विद्यालयों की तर्ज पर निजी विद्यालयों में भी "प्रोजेक्ट परख" के अंतर्गत "बोलेगा सिंहभूम" तथा "आज क्या सीखे" कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल एवं आत्मविश्वास का विकास होगा, जो उनके समग्र व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से प्रत्येक निजी विद्यालय में प्रत्येक माह "खेल महोत्सव" आयोजित करने का भी निर्देश दिया। इसके साथ ही प्रत्येक माह की 20 तारीख को विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों का सामूहिक "जन्मोत्सव" आयोजित कर उन्हें सम्मानित करने एवं सकारात्मक विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर बल दिया। उपायुक्त ने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत सभी निजी विद्यालय प्रबंधन से अपील की कि वे "निक्षय मित्र" बनकर जिले के टीबी मरीजों को गोद लेने की दिशा में आगे आएं तथा उनके पोषण एवं उपचार सहयोग में सहभागिता निभाएं। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक सक्षम संस्थान की भागीदारी से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त किया जा सकेगा। बैठक में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व देते हुए उपायुक्त ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया कि विद्यालय परिसर एवं उपलब्ध खाली स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाए तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री प्रिंस कुमार एवं जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार ने भी आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति, सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न नवाचार कार्यक्रमों में निजी विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक के अंत में उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी एवं निजी विद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित कर शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सामाजिक संवेदनशीलता तथा समग्र व्यक्तित्व विकास को नई दिशा देना है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षा की कि वे प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए इन सभी निर्देशों का गंभीरतापूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करें, जिससे पश्चिमी सिंहभूम शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बन सके।

Sonua, Pashchimi Singhbhum | Jul 6, 2026

आमजनों को सहकारिता विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रति जागरूक करने के लिए डीसी ने रथ को हरि झंडी दिखाकर किया रवाना 

सहकारिता सप्ताह के अवसर पर आमजनों को सहकारिता विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आज जिला समाहरणालय परिसर से जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने सहकारिता सप्ताह जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह जागरूकता वाहन जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए जिला सहकारिता विभाग की योजनाओं सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी आमजनों तक पहुंचाएगा

इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, किसानों एवं ग्रामीणों को संगठित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने आमजनों से सहकारिता सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने तथा सहकारिता विभाग की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

आमजनों को सहकारिता विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रति जागरूक करने के लिए डीसी ने रथ को हरि झंडी दिखाकर किया रवाना सहकारिता सप्ताह के अवसर पर आमजनों को सहकारिता विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आज जिला समाहरणालय परिसर से जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने सहकारिता सप्ताह जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह जागरूकता वाहन जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए जिला सहकारिता विभाग की योजनाओं सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी आमजनों तक पहुंचाएगा इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, किसानों एवं ग्रामीणों को संगठित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने आमजनों से सहकारिता सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने तथा सहकारिता विभाग की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

Sonua, Pashchimi Singhbhum | Jul 4, 2026

सड़क जाम हटने पर कारण महतो ने कहा

सड़क जाम हटने पर कारण महतो ने कहा

Sonua, Pashchimi Singhbhum | Jun 30, 2026