
➡️सफलता की कहानी
समय पर पहचान, सही परामर्श और टीम वर्क से बची गर्भवती एवं शिशु की जान
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"सही समय पर की गई जांच और प्रभावी परामर्श किसी भी गंभीर स्थिति को सुरक्षित परिणाम में बदल सकता है।" सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पृथ्वीपुर के अंतर्गत ग्राम चंद्रपुरा भाटा निवासी श्रीमती कमला/शर्मन सौर, लगभग 6 माह की गर्भवती हैं। दिनांक 16 जुलाई 2026 को आशा कार्यकर्ता श्रीमती उर्मिला प्रजापति उन्हें नियमित प्रसवपूर्व जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पृथ्वीपुर लेकर आईं। यह महिला का तीसरा गर्भ था।
जांच के दौरान महिला का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 4.8 ग्राम/डीएल पाया गया, जो अत्यंत गंभीर एनीमिया (Severe Anaemia) की स्थिति थी। चिकित्सकीय दृष्टि से महिला को तत्काल उच्च संस्थान में भर्ती कर रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की आवश्यकता थी। लेकिन प्रारंभ में महिला जिला चिकित्सालय टीकमगढ़ जाने के लिए तैयार नहीं थीं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएचओ डॉ. अंकित खरे एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पृथ्वीपुर की टीम ने महिला एवं उनके परिजनों को गंभीर एनीमिया से होने वाले संभावित जोखिमों के बारे में विस्तार से समझाया। निरंतर समझाइश और विश्वास दिलाने के बाद महिला उपचार के लिए तैयार हो गईं। अगले दिन आशा कार्यकर्ता श्रीमती अनीता कुशवाहा एवं श्रीमती उर्मिला प्रजापति ने महिला को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से सुरक्षित रूप से जिला चिकित्सालय, टीकमगढ़ पहुंचाया। वहां महिला को तत्काल भर्ती किया गया तथा ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. विकास जैन के सहयोग से सुरक्षित रक्ताधान कराया गया।
आज महिला चिकित्सकीय निगरानी में हैं तथा उनका उपचार सुचारु रूप से जारी है। समय पर जांच, सही परामर्श, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका, सीएचओ एवं चिकित्सकों के समन्वित प्रयास तथा जिला चिकित्सालय के सहयोग से गर्भवती एवं गर्भस्थ शिशु दोनों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।
यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, जोखिम की शीघ्र पहचान, प्रभावी काउंसलिंग और रेफरल व्यवस्था सुदृढ़ हो, तो गंभीर परिस्थितियों में भी मातृ एवं शिशु मृत्यु को रोका जा सकता है।
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