
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए "मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल" के माध्यम से धन वापसी की प्रक्रिया शुरू-नीतीश अग्रवाल, एसपी पलवल।
साइबर साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी शिकायत तुरंत दर्ज कराएं-नीतीश अग्रवाल, एसपी पलवल।
Aonenews अरविन्द बक्शी
पलवल। गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) की शुरुआत की गई है। *पुलिस अधीक्षक पलवल नीतीश अग्रवाल, आईपीएस* ने बताया कि इस मॉड्यूल के तहत साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए जांच के दौरान फ्रीज़ की गई राशि की वापसी हेतु एक व्यवस्थित और बहु-चरणीय प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यह तंत्र राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के एक एकीकृत विस्तार के रूप में कार्य करता है।
इस व्यवस्था के तहत धन वापसी की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
*चरण 1 — तत्काल शिकायत दर्ज करना*
पीड़ित को बिना किसी देरी के धोखाधड़ी की सूचना देनी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल किया जा सकता है या साइबर क्राइम की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जितनी जल्दी धोखाधड़ी की सूचना दी जाएगी, धोखाधड़ी वाले लेन-देन को ट्रेस कर उसे राशि निकाले जाने या आगे स्थानांतरित होने से पहले फ्रीज़ करने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। शिकायत दर्ज होने पर शिकायतकर्ता को एक 14-अंकों की पंजीकृत पावती संख्या (पंजीकृत एक्नॉलेजमेंट नंबर) प्राप्त होती है, जो आगे के हर चरण के लिए मुख्य संदर्भ है।
चरण 2 — धन का पता लगाना और फ्रीज़ करना
शिकायत दर्ज होने के बाद, अधिकृत कानून प्रवर्तन अधिकारी और सहभागी बैंक MRM प्रणाली का उपयोग कर विवादित राशि की गति का पता लगाते हैं। इसके माध्यम से यह पहचान की जाती है कि पहले किस बैंक को राशि प्राप्त हुई और क्या उसे आगे अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया। जहाँ संभव हो, प्राप्तकर्ता (धोखेबाज़ के) खाते को फ्रीज़ कर दिया जाता है। कुछ मामलों में सत्यापन के उद्देश्य से पीड़ित के अपने खाते पर भी अस्थायी रूप से लियन (रोक) लगाया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि पीड़ित के खाते पर लगी ऐसी कोई भी रोक पूरी तरह अस्थायी होती है और सत्यापन पूर्ण होते ही हटा दी जाती है।
*चरण 3 — पुनर्स्थापन दावा दाखिल करना*
धोखाधड़ी की सूचना दिए जाने और राशि सफलतापूर्वक फ्रीज़ होने के बाद ही पीड़ित रिफंड अनुरोध हेतु MRM पोर्टल पर आगे बढ़ सकता है। इस प्रक्रिया में पीड़ित को मूल शिकायत में पंजीकृत मोबाइल नंबर का उपयोग कर सिटीज़न लॉगिन विकल्प से लॉगिन करना होता है। इसके बाद OTP के माध्यम से पहचान सत्यापित की जाती है और "रेज़ रिफंड रिक्वेस्ट" चुनकर 14-अंकों की शिकायत संख्या दर्ज करनी होती है। ऐसा करने पर पोर्टल पर मामले से जुड़ी फ्रीज़ की गई राशि प्रदर्शित हो जाती है। इसके बाद पहचान सत्यापन हेतु पैन कार्ड अपलोड करना होता है और राशि जमा करने के लिए बैंक खाता विवरण (खाता संख्या और IFSC कोड) प्रदान करना होता है।
*चरण 4 — राशि के अनुसार दस्तावेज़ीकरण*
आवश्यक दस्तावेज़ फ्रीज़ की गई राशि के अनुसार भिन्न होते हैं। 50,000 रुपये से कम फ्रीज़ राशि के लिए सामान्यतः FIR या न्यायालय आदेश की आवश्यकता नहीं होती है। वहीं, 50,000 रुपये से अधिक की एकल खाता राशि के लिए न्यायालय आदेश अनिवार्य है, जिसके बाद ही राशि जारी की जा सकती है।
*चरण 5 — कानूनी औपचारिकताएँ और भुगतान*
दावा प्रस्तुत होने के बाद, संबंधित पुलिस टीम पोर्टल पर इंडेम्निटी बॉन्ड या नोटिस अपलोड करती है, जो संबंधित कानूनी प्रावधान (BNSS की धारा 106(3)) के तहत जारी होता है। इसके पश्चात, फ्रीज़ की गई राशि रखने वाला बैंक सीधे पीड़ित के खाते में पुनर्स्थापित राशि जमा कर देता है।
निर्दोष खाताधारकों के लिए सहायक तंत्र (GRM पोर्टल)
MRM के साथ-साथ, I4C ने ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज़्म (GRM) पोर्टल भी शुरू किया है। यह पोर्टल एक भिन्न परंतु संबंधित समस्या के लिए है, जिसके तहत साइबर अपराध जांच के दौरान गलती से फ्रीज़ या लियन-मार्क किए गए बैंक खातों से संबंधित मामलों का निपटारा किया जाता है। यह पोर्टल निर्दोष खाताधारकों को अपने धन की समीक्षा और रिहाई का अनुरोध करने की सुविधा देता है।
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