कौन डर गया है?
जब सवाल पूछने वालों पर कार्रवाई की खबरें सुर्खियां बनती हैं, तो सवाल भी उठते हैं।
'शेखर टुनाइट' के प्रोड्यूसर धर्मेंद्र साहनी और उनकी कंपनी पर ED की कार्रवाई की खबरों के बीच एक नया सवाल तैर रहा है—
क्या अब 'शेखर टुनाइट' का भविष्य भी सवालों के घेरे में है?
क्या यह सिर्फ आर्थिक जांच है, या फिर आलोचनात्मक और व्यंग्यात्मक आवाज़ों को लेकर भी बहस छिड़ेगी?
लोकतंत्र में एजेंसियों को अपना काम कानून के दायरे में करना चाहिए, लेकिन उतना ही जरूरी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यंग्य की परंपरा भी सुरक्षित रहे।
सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है। जवाब देना भी।
लेख - नमो भंडारी
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