
*जेल प्रहरियों के तबादले पर ब्रेक क्यों? पिछले साल हाईकोर्ट की फटकार का डर या कोई और वजह !*
भोपाल। मध्यप्रदेश जेल विभाग ने अधिकारियों की प्रशासनिक स्थानांतरण सूची तो जारी कर दी है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अब तक जेल प्रहरियों के प्रशासनिक स्थानांतरण की सूची जारी नहीं की गई है। विभाग की इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टर मोहन यादव स्वयं अपने विभाग की प्रशासनिक लिस्ट जारी नहीं कर पाए। जिसके कारण जेल में बंदियों को प्रताड़ित करने वाले एवं अनुशासनहीन कर्मचारियों के स्थानांतरण नहीं हो सके जिसके कारण पूरे मध्य प्रदेश की जनता परेशान हो चुकी है, क्या इसका परिणाम आने वाले चुनाव में दिखाई देगा ?
जेल महकमे में चर्चा है कि पिछले वर्ष जेल प्रहरियों के बड़े पैमाने पर किए गए प्रशासनिक स्थानांतरणों के खिलाफ अनेक प्रहरियों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की शरण ली थी। कई मामलों में स्थानांतरण आदेश निरस्त हुए, जबकि कई प्रहरियों ने अपने तबादले मनचाहे स्थानों पर संशोधित करवाने में सफलता प्राप्त की थी। इसके बाद विभाग को भारी किरकिरी का सामना करना पड़ा था।
इसी पृष्ठभूमि में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पिछले वर्ष की घटनाओं से सबक लेने के बजाय जेल मुख्यालय और मंत्रालय स्तर पर अब किसी नए विवाद के भय से स्थानांतरण सूची जारी करने से परहेज किया जा रहा है? यदि ऐसा नहीं है तो फिर अब तक प्रहरियों के प्रशासनिक स्थानांतरण क्यों नहीं किए गए?
जानकारों का कहना है कि ऐसा मान लेना कठिन है कि पूरे वर्ष के दौरान किसी भी जेल प्रहरी के विरुद्ध ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न नहीं हुई हों, जिनके चलते उसका प्रशासनिक स्थानांतरण आवश्यक हो। प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने तथा जेलों में अनुशासन और निष्पक्षता कायम रखने के लिए समय-समय पर स्थानांतरण एक आवश्यक प्रक्रिया मानी जाती है।
*विशेषज्ञों के अनुसार जेल नियमों की मूल भावना भी यही है कि कोई प्रहरी लंबे समय तक एक ही जेल में पदस्थ न रहे। सामान्यतः उप जेल, जिला जेल और केंद्रीय जेलों में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक पदस्थापना को उचित नहीं माना जाता, क्योंकि लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से बंदियों और उनके परिजनों के साथ अनावश्यक निकटता तथा प्रभाव के संबंध विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति जेल प्रशासन की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।*
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब अधिकारियों के तबादले हो चुके हैं, तब जेल प्रहरियों की स्थानांतरण सूची आखिर किस फाइल में अटकी हुई है? क्या विभाग किसी कानूनी चुनौती से बचने की रणनीति बना रहा है, या फिर कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा गया है?
जब तक विभाग इस संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं देता, तब तक जेल प्रहरियों के प्रशासनिक स्थानांतरण को लेकर उठ रहे सवाल और चर्चाएं थमने वाली नहीं हैं। आखिर जेल विभाग की तबादला नीति सभी पर समान रूप से लागू होगी या फिर कुछ लोगों के लिए अलग नियम बनाए जाएंगे? यही वह सवाल है जिसका जवाब पूरा महकमा जानना चाहता है।
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