
कोलायत के गांवों का इतिहास सहेजने की मुहिम तेज, इतिहास संकलन समिति ने किया व्यापक सर्वेक्षण
राहुल सेवग श्रीकोलायत
श्रीकोलायत क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन शिलालेखों, मूर्तियों और लोक स्मृतियों को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से भारतीय इतिहास संकलन समिति द्वारा चलाए जा रहे इतिहास संकलन अभियान के तहत रविवार को दियातरा, भाणे का गांव, मंडाल तथा गड़ियाला सहित विभिन्न गांवों में विशेष सर्वेक्षण किया गया। समिति के सदस्यों ने गांवों में पहुंचकर प्राचीन स्थलों का अवलोकन किया तथा ऐतिहासिक महत्व की सामग्रियों का दस्तावेजीकरण किया।
सर्वेक्षण के दौरान टीम सबसे पहले दियातरा क्षेत्र पहुंची, जहां ऐतिहासिक महत्व वाले लाखोलाई तालाब का निरीक्षण किया गया। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार यह तालाब कभी पूरी तरह सूखा नहीं है। तालाब के आसपास प्राचीन मूर्तियां भी प्राप्त हुई हैं, जिनका ऐतिहासिक अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद करणी माता से जुड़ा एक प्राचीन तालाब देखा गया, जहां एक पुरानी शिलामूर्ति भी मिली। हालांकि उस पर अंकित लेख अभी स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका है, लेकिन प्रारंभिक रूप से इसे काफी प्राचीन माना जा रहा है।
इतिहास संकलन टीम ने मंडाल से गड़ियाला जाने वाले मार्ग पर स्थित जुझार भूमिया की एक विशाल प्रतिमा का भी अवलोकन किया। लगभग 15 फीट ऊंची यह प्रतिमा क्षेत्र के लोक इतिहास और वीर परंपराओं की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जा रही है। इसके अलावा किनिया बस्ती क्षेत्र में भी कई प्राचीन शिलालेखों और ऐतिहासिक अवशेषों का निरीक्षण किया गया। शिलालेखों की लिपि क्षतिग्रस्त होने तथा स्पष्ट रूप से पढ़े नहीं जाने के कारण समिति ने विशेषज्ञों की सहायता लेने का निर्णय किया है।
समिति के सदस्यों ने बताया कि जिन शिलालेखों और अभिलेखों को वर्तमान में पढ़ना संभव नहीं हो रहा है, उन्हें भू-अभिलेख विशेषज्ञों एवं प्राचीन लिपियों के जानकार विद्वानों से पढ़वाकर उनका प्रमाणिक इतिहास संकलित किया जाएगा। इससे क्षेत्र के इतिहास के अनेक अनछुए और अज्ञात पहलुओं को सामने लाने में मदद मिलेगी।
इतिहास संकलन समिति के जिला उपाध्यक्ष कैलाश बड़गुर्जर ने बताया कि कोलायत क्षेत्र के अधिकांश गांवों का प्रारंभिक इतिहास संकलन कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। अब अगला चरण शिलालेखों, मूर्तियों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों के अध्ययन, पठन और प्रामाणिक दस्तावेजीकरण का होगा। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है, ताकि स्थानीय इतिहास के महत्वपूर्ण तथ्य समय के साथ विलुप्त न हों।
इस ऐतिहासिक सर्वेक्षण अभियान में नेमीचंद पंचारिया, खींयाराम सेन, भंवरलाल उपाध्याय, राजेंद्र पालीवाल, दाऊदयाल पंचारिया, राहुल सेवग, अर्जुनदान, बिट्टू तथा लक्ष्मणदान सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई और क्षेत्र के गांवों की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं संकलन में योगदान दिया।
यह अभियान कोलायत क्षेत्र के इतिहास को व्यवस्थित रूप से संकलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में क्षेत्र के इतिहास पर शोध करने वाले विद्यार्थियों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं को प्रामाणिक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।