
अशोकनगर के जनप्रतिनिधि का और पुलिस महकमा traffic के सूबेदार साहब मैं अशोकनगर सेन चौराहे का रहने वाला एक आम नागरिक जो शहर में जिसका आना-जाना रहता है सुबह पार्क से लौट रहा था कोलवा रोड तिराहे पर मेरी गलती बस इतनी सी है मैं इलेक्ट्रिक स्कूटी पर था दो पुलिस वाले साहब मेरे अचानक से सामने आए जैसे तैसे करके मैंने स्कूटी साइड में रोकी मैंने कहा साहब अचानक से सामने मत आया करो किसी से रुकी नहीं रुकी क्या होगा आपके सीसीटीवी कैमरा भी लगे हैं भाग थोड़ी जाऊंगा वह बोलते हैं आप फोन पर बात कर रहे थे मैंने कहा साहब अर्जेंट घर से फोन आ गया किसी की तबीयत खराब थी मैंने बहुत कोशिश की नहीं उठाया था लेकिन अचानक से उठाना पड़ा फिर कहते हैं हेलमेट नहीं लगाएं मैंने कहा साहब सामने ही सेन चौराहे पर मेरा घर है गलती हो गई फिर कहते हैं ड्राइविंग लाइसेंस बताओ मैंने कहा साहब मेरे मोबाइल हैंग हो रहा है सेन चौराहे पर आपकी एक और पुलिस टीम है मैं वहां पर आपको ड्राइविंग लाइसेंस दिखा दूंगा दूसरे पुलिस वाले भैया बोलते हैं काहे को बात कर रहे हो चालान बना भैया ने ₹1300 का चालान बना दिया और यह पुलिस वाले भैया थे राजीव कुमार शर्मा जी मेरी लाख विनती करने के बाद चिढ़कर उन्होंने ₹1300 का चालान बना दिया हां अगर मैं विनती की जगह कुछ पैसे ऑफर कर देता तो शायद में बच जाता मैं उनके पुलिस विभाग के सूबेदार साहब से विनती करना चाहता हूं ऐसे लोगों को ड्यूटी पर ना रखा जाए जो मानवता से बिल्कुल दूर है कुछ मेरी मजबूरियां रही होगी जिसकी वजह से मुझे फोन उठाना पड़ा मैं मैं किसी नेता से इनसे बात करवाई मैंने कहा ठीक है मेरी गलती है आप चालान बना दीजिए लेकिन इतनी बड़ी गलती भी नहीं थी कि 1300 का चलन बन हां हो सकता है मैंने कुछ पैसे का लालच दे देता तो मेरा चालान ना बनता और मेरे मकान के सामने एवं कोलवा रोड पर ऐसे दिन भर में 50 कैस होते हैं जिनसे यह पैसे लेते हैं और लूट ही मचा रखी है लेकिन हम लोग सिर्फ इसलिए चुप रहते हैं चलो कुछ भी हो रहा होगा ठीक हो रहा होगा मैं राजीव कुमार शर्मा जी की लिखित में भी शिकायत करूंगा और मुझे अगर यह बिना हेलमेट बिना ड्राइविंग लाइसेंस या किसी भी इलीगल प्रक्रिया में पाए गए तो मैं इनकी लिखित शिकायत भी करूंगा और मेरा जन् प्रतिनिधियों से विनम्र निवेदन है इस व्यवस्था को सुधरवाएं गरीब लोगों को लूटने का काम कर रहे हैं यह चौराहे चौराहे पर विशेष तौर पर राजीव कुमार शर्मा जी।।