
*लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार: मिर्जापुर के विंध्यवासिनी धाम में पुलिसकर्मी ने पत्रकार को बेरहमी से पीटा, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल*
**
उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ विंध्यवासिनी धाम (विंध्याचल) से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। बीती रात मंदिर परिसर में तैनात एक पुलिसकर्मी ने विभिन्न समाचार चैनलों और पत्रों में कार्यरत स्थानीय पत्रकार रामलाल साहनी पर जानलेवा हमला कर दिया। बिना किसी ठोस वजह के, आक्रोशित पुलिसकर्मी ने निहत्थे पत्रकार के चेहरे पर घूंसों की बरसात कर दी।
आंखों के पास लगी गंभीर चोट, टला बड़ा हादसा
पुलिसकर्मी के इस बर्बर हमले में पत्रकार रामलाल साहनी की आंख के पास बेहद नाजुक हिस्से पर गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह वार इतना जोरदार था कि पत्रकार की आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती थी या वे अपंग हो सकते थे। घटना की भनक लगते ही भारी संख्या में पत्रकार साथी मौके पर एकत्र हो गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि जहां पीड़ित पत्रकार अपना पक्ष रख रहे थे, वहीं पुलिस के उच्चाधिकारी आरोपी पुलिसकर्मी के बचाव में खड़े दिखाई दिए।
प्रशासन की 'लाइन हाजिर' वाली खानापूर्ति और सुलगते सवाल
मामला तूल पकड़ने पर पुलिस अधिकारियों द्वारा आरोपी को सिर्फ 'लाइन हाजिर' करने जैसी मामूली कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है, जो महज एक खानापूर्ति प्रतीत होती है। सवाल यह उठता है कि पत्रकार के स्वाभिमान और लोकतंत्र के सीने पर जो घाव लगा है, उसका इलाज कौन करेगा?
सिस्टम की मंशा पर सवाल: एक तरफ जहां बड़े-बड़े मंचों से पत्रकार सुरक्षा के कसीदे पढ़े जाते हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पत्रकार का नाम सुनते ही पुलिसकर्मी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाना यह साफ दर्शाता है कि सच लिखने वालों से सिस्टम किस कदर खुन्नस रखता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जहां एक ओर पत्रकार सुरक्षा और कानून व्यवस्था का दावा करती है, वहीं मिर्जापुर पुलिस की इस गुंडागर्दी ने इन दावों को खुली चुनौती दे दी है। इस घटना से स्थानीय मीडिया कर्मियों और समाजसेवियों में भारी आक्रोश है, और वे दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।