
नरवाई प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम, विदिशा में स्थापित होंगे सीबीजी प्लांट
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नटेरन, बासौदा और कुरवाई क्षेत्र में 15 से 20 एकड़ शासकीय भूमि का चिन्हांकन, किसान बनेंगे ऊर्जादाता
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विदिशा जिले में फसल अवशेष यानी नरवाई प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। नरवाई जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, भूमि की उर्वरा शक्ति में कमी तथा मिट्टी के लाभदायक सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने की समस्या के समाधान के लिए जिले में कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट की स्थापना की जाएगी। शासन की बायोफ्यूल परियोजना के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जिले में सीबीजी प्लांट स्थापित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के मार्गदर्शन में जिले के नटेरन, बासौदा एवं कुरवाई विकासखंडों में सीबीजी प्लांट की स्थापना के लिए शासकीय भूमि का प्रारंभिक स्तर पर चिन्हांकन किया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में लगभग 15 से 20 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया है। चिन्हांकित भूमि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को दीर्घ अवधि के लिए लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी, जहां कंपनी द्वारा फसल अवशेषों के उपयोग से बायोगैस सहित अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
फसल अवशेषों का होगा उपयोग, नरवाई जलाने की समस्या में आएगी कमी -
सीबीजी प्लांट की स्थापना से आसपास के क्षेत्रों में किसानों द्वारा उत्पादित मक्का, धान, गेहूं सहित अन्य फसलों के अवशेषों का व्यवस्थित तरीके से संग्रहण एवं उपयोग किया जा सकेगा। वर्तमान में फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
फसल अवशेषों को जलाने के स्थान पर उनका उपयोग सीबीजी प्लांट में किए जाने से किसानों को नरवाई के उचित प्रबंधन का एक व्यावहारिक विकल्प मिलेगा। इससे खेतों में नरवाई जलाने की घटनाओं में कमी लाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और कृषि अवशेषों का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम -
सीबीजी प्लांट की स्थापना केवल नरवाई प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे किसानों के लिए फसल अवशेषों के आर्थिक उपयोग का अवसर भी तैयार होगा। खेतों से कृषि अवशेषों के संग्रहण एवं प्लांट तक पहुंचने की प्रक्रिया विकसित होने से किसानों को अपने फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकेगा। इस पहल से कृषि अवशेषों को अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस प्रकार किसान अपनी फसल के साथ-साथ फसल अवशेषों के माध्यम से भी आर्थिक गतिविधि से जुड़ सकेंगे।
किसान बनेगा ऊर्जादाता -
विदिशा जिले में नरवाई जलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सीबीजी प्लांट की स्थापना को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नरवाई जलाने से भूमि में मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। साथ ही पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से 1 सितंबर 2026 को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव श्री निशांत वरवडे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला प्रशासन एवं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने विदिशा जिले में सीबीजी प्लांट की स्थापना की प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सीबीजी प्लांट के संचालन के बाद किसानों के खेतों से निकलने वाले फसल अवशेष ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किए जाएंगे। इस तरह नरवाई, जो वर्तमान में किसानों के लिए प्रबंधन की चुनौती बनती है, भविष्य में ऊर्जा उत्पादन और आय का माध्यम बन सकेगी। इसी अवधारणा के साथ ‘किसान बनेगा ऊर्जादाता’ की दिशा में विदिशा जिले में कदम बढ़ाया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ -
सीबीजी प्लांट की स्थापना से एक ओर जहां नरवाई जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं उपयोगी प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। इससे मिट्टी की गुणवत्ता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा। जिले में नटेरन, बासौदा एवं कुरवाई क्षेत्रों में प्रस्तावित सीबीजी प्लांट कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकते हैं। प्रशासन द्वारा भूमि चिन्हांकन एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि शासन की इस पहल का लाभ किसानों और पर्यावरण दोनों को मिल सकेगा। #Vidisha #JansamparkMP