
नर्मदापुरम। शहर के रसूखदारों और रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो इंसाफ की उम्मीद किससे की जाए? मामला नर्मदापुरम का है, जहां नगरपालिका के अतिक्रमण दल का प्रभारी (दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी) सुनील राजपूत खुद एक युवती की अस्मत और मर्यादा पर ‘अतिक्रमण’ करने के संगीन आरोपों में घिर गया है। मजाल देखिए, एफआईआर दर्ज हुए 15 दिन बीत चुके हैं, पुलिस फाइलों में आरोपी ‘फरार’ है, लेकिन जनाब गले में बकायदा नगरपालिका का आईकार्ड टांगे, सरकारी गाड़ी में बैठकर सरेआम शहर में घूम रहे हैं!
कहानी की शुरुआत बेहद खौफनाक और हैरान करने वाली है। इटारसी की रहने वाली एक बेकसूर युवती 5 फरवरी को एक निजी अस्पताल में जिंदगी और सेहत की जंग लड़ रही थी। वो अस्पताल के बेड पर थी, लेकिन बाहर बैठा एक ‘शिकारी’ उस पर नजर गड़ाए था। 14 फरवरी यानी ‘वैलेंटाइंस डे’ की सुबह… जैसे ही युवती ने अपना मोबाइल डेटा ऑन किया, ‘सौरभ साहू’ नाम की एक फेसबुक आईडी से अश्लील मैसेजेस की बाढ़ आ गई। हद तो तब हो गई जब उसी रात एक महिला के नाम की फर्जी आईडी से उसे बेहद गंदी तस्वीरें और मैसेज भेजे गए।
अस्पताल से छुट्टी मिलते ही, वो सहमी हुई पीड़िता सीधे साइबर सेल पहुंची और इस ‘डिजिटल दरिंदे’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आरोपी खुद को बहुत शातिर समझ रहा था। उसने सोचा फर्जी आईडी बनाई है तो पुलिस की पकड़ से दूर रहेगा। लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं। साइबर सेल ने जब तकनीकी जाल बिछाया और फेसबुक आईडी का IP एड्रेस खंगाला, तो वो सीधे शास्त्री वार्ड निवासी और नपा कर्मचारी सुनील राजपूत के मोबाइल नंबर पर जाकर रुका! इस तकनीकी खुलासे के बाद पुलिस ने एफआईआर से ‘अज्ञात’ शब्द को कचरे के डिब्बे में डाला और सीधे सुनील राजपूत को नामजद कर लिया।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी सुनील राजपूत खुलेआम नगरपालिका की गाड़ी में घूम रहा है। आरोपी के गुर्गे अब पीड़िता पर फोन करके दबाव बना रहे हैं। धमकी दी जा रही है कि “समझौता कर लो, नहीं तो बदनाम कर देंगे।” जब इस मामले में आरोपी सुनील राजपूत को फोन लगाकर एफआईआर पर जवाब मांगा गया, तो उसका मोबाइल बंद आ रहा था। अस्पताल के बेड से शुरू हुआ यह मानसिक टॉर्चर अब पीड़िता के लिए सामाजिक जंग बन चुका है।
पीड़िता का कहना है, सुनील राजपूत के लोग समाज में मेरे बारे में गलत बातें फैला रहे हैं। मुझे बदनाम किया जा रहा है। मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि इस आरोपी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए। अब देखना यह है कि नर्मदापुरम की कोतवाली पुलिस फाइलों से बाहर निकलकर इस ‘रसूखदार’ नगरपालिका के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के हाथों में हथकड़ी कब पहनाती है या फिर यह ‘फरार’ आरोपी यूं ही सिस्टम का मखौल उड़ाता रहेगा।