
*TheSaharanpurVoice/News7*
*सच्चाई के साथ हरदम*
👉🏾👉🏾रंगदारी या सच दबाने की साज़िश?
साजिश कर्ता पूर्व में भी कई बार जा चुका हैं जेल....
_उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की कानून-व्यवस्था और माफियाओं के खिलाफ जारी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को ठेंगा दिखाते हुए, खनन माफिया हाजी इकबाल का संगठित गिरोह एक बार फिर सक्रिय होता दिख रहा है। ताजा मामला कीमती जमीनों पर अवैध कब्जे और इस सच को उजागर करने वाले चौथे स्तंभ (पत्रकार) की आवाज को दबाने की गहरी साजिश से जुड़ा है। खुद को कानून के शिकंजे से बचाने और अपनी डूबती आर्थिक साख को बचाने के लिए अब यह गिरोह नया पैंतरा चला रहा है। मामले को दबाने के लिए सच लिखने वाले पत्रकारों पर ही 'रंगदारी' के झूठे आरोप मढ़े जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हाजी इकबाल का भतीजा 'सादा' संभाल रहा है कमान मिली जानकारी के अनुसार, हाजी इकबाल को आर्थिक लाभ पहुंचाने और उसकी काली कमाई के साम्राज्य को दोबारा खड़ा करने का जिम्मा उसके भतीजे 'सादा' ने संभाल रखा है। इलाके में 'सादा खाईवाड' के नाम से कुख्यात यह शख्स कोई साधारण अपराधी नहीं है। इस पर उत्तर प्रदेश के थाना मिर्जापुर, थाना बेहट सहित पड़ोसी राज्यों उत्तराखंड (थाना सहसपुर) और हरियाणा में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।यह गैंग पूरी तरह से एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहा है। सादा अपनी दबंगई और गुंडागर्दी के बल पर गरीब और सीधे-साधे ग्रामीणों को डरा-धमकाकर उनकी जमीनें औने-पौने दामों में लिखवा रहा है और उन्हें बेचकर अपने चाचा हाजी इकबाल तक आर्थिक मदद पहुंचा रहा है। पिछले महीने ही इस गैंग ने करोड़ों रुपये की कई संपत्तियों को ठिकाने लगाकर हाजी इकबाल को तगड़ा आर्थिक लाभ पहुंचाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले पूर्ववर्ती सरकारों के संरक्षण में खुद हाजी इकबाल हमें प्रताड़ित करता था, और अब सरकार बदलने के बाद भी उसके गुर्गे और रिश्तेदार खुलेआम घूमकर हमें बर्बाद कर रहे हैं। आखिर प्रशासन इन पर कड़ा एक्शन कब लेगा?"इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश तब हुआ जब इलाके के एक बाग की फसल (बाग बाहर) का विवाद सामने आया। दरअसल, इस बाग की फसल को एक स्थानीय ठेकेदार ने नियमानुसार खरीदा था। लेकिन माफिया के भतीजे सादा ने ठेकेदार को यह कहकर वहां से भगा दिया—"यह प्रॉपर्टी हमारे चाचा हाजी इकबाल की है, इस पर तुम्हारा कोई हक नहीं है।"जब इस संबंध में सच्चाई जानने के लिए हल्का लेखपाल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने भी ऑन-रिकॉर्ड पुष्टि की कि उक्त बाग पर जोर-जबरदस्ती और गुंडई के बल पर अवैध कब्जा किया गया है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।जब इस पूरे घटनाक्रम की कवरेज करने और जमीनी हकीकत जानने के लिए स्थानीय पत्रकार मौके पर पहुंचे, तो वहां सादा अपने गुर्गों के साथ बाग की फसल को जबरन तुड़वाने की फिराक में था।जैसे ही कैमरे चालू हुए और कवरेज शुरू हुई, वैसे ही इस संगठित गिरोह ने बौखलाकर पत्रकार पर हमला बोल दिया। मौके पर मौजूद पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा और गाली-गलौज की गई।मारपीट कर उनके मोबाइल और कैमरे छीनने की कोशिश की गई।साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड किए गए फोटो और वीडियो जबरन डिलीट करने का प्रयास किया गया।खुद को फंसता देख और मामले को भटकाने के लिए इस गैंग ने उल्टा पत्रकार पर ही ₹20,000 की रंगदारी मांगने का मनगढ़ंत और झूठा आरोप लगा दिया। यह साज़िश साफ तौर पर मीडिया को डराने और सच को दबाने के लिए रची गई है।स्थानीय पुलिस को सूचना, कार्रवाई का इंतजार इस पूरे जानलेवा हमले और लूट के प्रयास की लिखित सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन को दे दी गई है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस इस संगठित गिरोह के रसूख के आगे झुकेगी या फिर पत्रकारों की सुरक्षा और ग्रामीणों की जमीनों की रक्षा करते हुए इस 'खाईवाड़ गैंग' पर गैंगस्टर एक्ट और रासुका जैसी कड़ी कार्रवाई करेगी!!_