क्या सोशल मीडिया पर किसी को ट्रोल करना इतना आसान हो गया है कि एक महिला को जहर खाने जैसा कदम उठाना पड़े?
राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और समाज की बात करने वाली सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अनीता बिश्नोई आज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं।
मतभेद हो सकते हैं, आलोचना हो सकती है, लेकिन किसी को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित कर देना कि वह टूट जाए, यह किसी भी सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकती।
ट्रोलिंग नहीं, संवेदनशीलता चाहिए। नफरत नहीं, संवाद चाहिए। अपमान नहीं, सम्मान चाहिए।
हम अनीता बिश्नोई के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।
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