Public App Logo
Jansamasya
News
Bjp
National
Police
Bihar
बिहार
कांग्रेस
भाजपा
Congress
Modi
Delhi
Viral
Jharkhand
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
Uttarpradesh
Haryana
Cricket
Uttarakhand
Sambalpur
Crimenews
Karnataka
Aap
Kota

मानसून से पहले वीटीआर पर संकट की दस्तक, गंडक का कटाव निगल रहा जंगल, वन्यजीवों के आशियाने पर मंडरा रहा खतरा 2015 से अब तक सौ एकड़ से अधिक वन क्षेत्र नदी में समाया विभागीय उदासीनता बनी चिंता का विषय बेतिया/ वाल्मीकिनगर:-मानसून की दस्तक के साथ ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के जंगलों और वन्यजीवों पर एक बार फिर गंडक नदी के कटाव और बाढ़ का खतरा गहरा गया है। हर वर्ष गंडक नदी तथा उसकी उपधाराएं वीटीआर के वाल्मीकिनगर, मदनपुर और आसपास के वन क्षेत्रों में भारी कटाव करती हैं, जिससे सदाबहार जंगलों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। वन विभाग के आकलन के अनुसार प्रतिवर्ष 10 एकड़ से अधिक वन क्षेत्र नदी में समा जाता है, जबकि हजारों पेड़-पौधे कटाव की भेंट चढ़कर जलधारा में विलीन हो जाते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि वीटीआर में बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, हिरण, चीतल समेत कई वन्यजीव प्रजातियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जंगलों का सिकुड़ना उनके प्राकृतिक आवास पर सीधा प्रभाव डाल रहा है। यदि समय रहते कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया तो आगामी बाढ़ के दौरान वन्यजीवों के समक्ष अस्तित्व का संकट और गहरा सकता है। सबसे अधिक खतरा वन प्रमंडल-दो के वाल्मीकिनगर स्थित चूलभट्टा क्षेत्र और मदनपुर वन क्षेत्र के कांटी उपखंड के कक्ष संख्या-1 एवं 2 पर मंडरा रहा है। गंडक नदी की धारा रोहुआ नाला से मिलते हुए जंगल के भीतर प्रवेश कर चुकी है और लगातार वन क्षेत्र का क्षरण कर रही है। स्थानीय वनकर्मियों के अनुसार नदी का रुख तेजी से जंगल की ओर बढ़ रहा है, जिससे कई महत्वपूर्ण वनखंड कटाव की जद में आ गए हैं। वर्ष 2018 के मानसून में भी गंडक के कटाव से बड़े भूभाग का जंगल नदी में समा गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने कई बार जल संसाधन विभाग को पत्र लिखकर कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है। हाल के दिनों में भी वरीय अधिकारियों ने बरसात शुरू होने से पहले आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने के लिए विभाग को त्राहिमाम संदेश भेजा है। इसके बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी पहल नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि 21 अक्टूबर 2019 को तत्कालीन मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक प्रभात कुमार गुप्ता, तत्कालीन क्षेत्र निदेशक हेमकांत राय तथा अन्य अधिकारियों की टीम ने मदनपुर क्षेत्र में कटाव की स्थिति का निरीक्षण किया था। जांच रिपोर्ट राज्य स्तर तक भेजी गई थी, लेकिन उसके बाद न तो दोबारा व्यापक सर्वेक्षण हुआ और न ही स्थायी कटावरोधी कार्य शुरू किए गए। वन विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2015 से अब तक गंडक नदी के कटाव से सौ एकड़ से अधिक जंगल नदी में समा चुका है। यदि आगामी मानसून से पहले प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वीटीआर के बहुमूल्य वन क्षेत्र, जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। मानसून शुरू होने में अब महज कुछ दिन शेष हैं, लेकिन अब तक किसी बड़े बचाव अभियान की सुगबुगाहट दिखाई नहीं दे रही है। इस संबंध में जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता मोहम्मद जिलानी ने बताया कि कटाव की स्थिति और वन विभाग की मांग से संबंधित सूचना वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है। विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के लिए विचार किया जा रहा है।

Bagaha, West Champaran | Jun 17, 2026

MORE NEWS