
उत्तराखंड में SC/ST अधिनियम के तहत लोक सेवकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य में किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने से पहले प्रशासनिक जांच कराना अनिवार्य होगा।
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) भूपेंद्र धोनी और उपनिरीक्षक (एसआई) रमेश बोहरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, यह मामला हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सेशन कोर्ट यानी सत्र न्यायालय ने बिना प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देकर कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन किया है, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में स्थापित सिद्धांतों का हवाला दिया।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी लोक सेवक के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने से पहले प्रशासनिक जांच में आरोपों की पुष्टि और संस्तुति आवश्यक है, इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
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