
जब थमने लगी थीं 40 दिन के नन्हें एरिज़ की सांसें, तब NICU में हुआ यह चमत्कार!
जब एरिज़ को एनआईसीयू (NICU) लाया गया, तब वह पूरी तरह बेहोश था। सांसें रुक चुकी थीं और धड़कन घटकर सिर्फ 30 से 40 प्रति मिनट रह गई थी—यानी जीवन और मृत्यु के बिल्कुल मुहाने पर।
समय बहुत कम था। बहराइच के वरिष्ठ नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. शिशिर अग्रवाल और उनकी मेडिकल टीम ने बिना एक सेकंड गंवाए एडवांस्ड कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) शुरू किया।
करीब 30 से 40 मिनट की लगातार कोशिशों, वेंटिलेटर सपोर्ट और जीवनरक्षक दवाओं के बल पर नन्हें एरिज़ के फेफड़ों में दोबारा हरकत शुरू हुई। जांच में पता चला कि फेफड़े पूरी तरह से सिकुड़ चुके थे लेकिन डॉक्टरों की टीम ने हार नहीं मानी। हर एक घंटा, हर एक पैरामीटर और बच्चे की हर एक हल्की सी सांस पर पैनी नजर रखी गई।
और फिर हुआ एक बड़ा बदलाव!
तीसरे दिन: एरिज़ खुद से सांस लेने लगा।
चौथे दिन: उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा लिया गया।
छठे-सातवें दिन: नन्हे बच्चे ने मां का दूध पीना शुरू कर दिया।
जिस मासूम की धड़कनें बंद होने की कगार पर थीं, वह केवल 8 दिनों में पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौटा।
डिस्चार्ज के तीन दिन बाद जब बेबी एरिज़ फॉलो-अप के लिए आया, तो वह पूरी तरह स्वस्थ, नॉर्मल और अपनी मां के आंचल में सुरक्षित था।
डॉ. शिशिर अग्रवाल कहते हैं—
टीम वर्क, सही समय पर मिले इलाज और अटूट उम्मीद की जीत है—बेबी एरिज़ खान की यह कहानी!
डॉ. शिशिर अग्रवाल (नियोनेटोलॉजिस्ट)
महेश चिल्ड्रन्स पॉलिक्लिनिक एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बहराइच
DrShisher Agrawal