
हिमाचल हाईकोर्ट ने बदला सरकार का फैसला, अफसर के बार-बार ट्रांसफर पर दी सख्त नसीहत
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के बार-बार होने वाले तबादलों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को सख्त नसीहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के क्लास-1 अधिकारी होने का मतलब यह नहीं है कि विभाग उसे बार-बार और बिना ठोस आधार के स्थानांतरित करता रहे। हाईकोर्ट ने सरकार से क्लास-1 अधिकारियों के लिए भी न्यूनतम कार्यकाल तय करने और तबादलों को लेकर वस्तुनिष्ठ दिशा-निर्देश बनाने को कहा है।
बबनेश चड्ढा के तबादले का मामला
यह मामला मंडी जिले के विकास खंड बालीचौकी में तैनात अधिकारी बबनेश चड्ढा से जुड़ा है। विभाग ने 1 जुलाई 2026 को उनका तबादला बालीचौकी से कर दिया था। इसके खिलाफ बबनेश चड्ढा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आया कि अधिकारी ने बालीचौकी में अभी एक वर्ष 11 महीने ही पूरे किए थे। इससे पहले भी उनकी तैनाती कम अवधि में बदली गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार वे 1 जुलाई 2020 से 16 सितंबर 2021 तक करसोग, मंडी और इसके बाद 6 सितंबर 2021 से 6 अप्रैल 2023 तक आनी, कुल्लू में तैनात रहे।
हाईकोर्ट ने ट्रांसफर ऑर्डर किया रद्द
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी को वर्तमान स्टेशन पर उचित और सम्मानजनक कार्यकाल पूरा करने का अवसर दिए बिना उसका तबादला करने का कोई तार्किक आधार होना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यवस्था के नाम पर अधिकारियों के लगातार तबादले उचित नहीं माने जा सकते।
सरकार को न्यूनतम कार्यकाल तय करने की सलाह
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि क्लास-1 अधिकारियों के लिए भी न्यूनतम कार्यकाल और तबादले से संबंधित वस्तुनिष्ठ दिशा-निर्देश तय किए जाएं।
कोर्ट के आदेश के अनुसार बबनेश चड्ढा को बालीचौकी में कम से कम ढाई से तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने दिया जाना चाहिए। इसके बाद प्रशासनिक आवश्यकता होने पर उनका तबादला किया जा सकता है। (Himachal Pradesh)
बार-बार तबादलों पर उठे सवाल
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को सरकारी अधिकारियों के बार-बार तबादलों की व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का संदेश साफ है कि प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं होना चाहिए और अधिकारियों को भी एक निश्चित अवधि तक काम करने का अवसर मिलना चाहिए।
इस फैसले से उन कर्मचारियों और अधिकारियों को भी राहत की उम्मीद जगी है, जिन्हें कम अवधि में बार-बार स्थानांतरण का सामना करना पड़ता है।
फिलहाल हाईकोर्ट का यह आदेश सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि तबादले प्रशासनिक आवश्यकता और निर्धारित नीति के अनुरूप होने चाहिए, न कि बिना उचित आधार के बार-बार।
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Kullu, Kullu | Aug 19, 2026