
संगरिया में ✋ टिकटों की चौपाल: सलाम-मशवरे से लेकर हिसाब-किताब तक!
संगरिया की आवाज़।
संगरिया नगर निकाय चुनाव को लेकर आज विधायक Abhimanyu Poonia की अध्यक्षता में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की बैठक में टिकट के इच्छुक दावेदारों से सलाम-मशवरा हुआ। अब असली खेल शुरू है—किसके हाथ टिकट आएगी और कौन हाथ मलता हुआ वापस जाएगा, इसका शीशा कल तक साफ होने की उम्मीद है।
लेकिन कांग्रेस की इस टिकट चौपाल में असली दिलचस्पी टिकट से ज्यादा टिकट के बाद के रिश्तों में है।
क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि टिकट किसे मिलेगी?
सवाल यह भी है कि जिसे टिकट नहीं मिली, वह पार्टी के फैसले को मां का आशीर्वाद मानकर गले लगाएगा या फिर अगले ही दिन निर्दलीय पर्चा लेकर मैदान में दिखाई देगा?
और अगर निर्दलीय मैदान में उतरा तो पुराने बागियों से हाथ मिलेगा या नए समीकरणों की कोई ऐसी खिचड़ी पकेगी, जिसकी खुशबू चुनाव परिणाम तक आती रहेगी?
बैठक में एक उम्रदराज वरिष्ठ नेता भी अपने पुराने राजनीतिक अध्यायों की नई व्याख्या करते नजर आए। चर्चा यह रही कि परिवार के पार्षद रहते हुए जिन पर समय-समय पर गोलमाल के आरोपों की फुसफुसाहट होती रही, जिन्होंने कथित तौर पर कांग्रेस के नाम पर लिए गए फार्म हाउस के रास्ते किसी और के मार्फत पहुंचाए—वे भी आजकल अपने राजनीतिक चरित्र का प्रमाणपत्र खुद ही जारी करते दिखाई दे रहे हैं।
राजनीति भी गजब की चीज है साहब!
यहां कल तक जो हिसाब मांग रहा था, आज खुद हिसाब देने से बचता है और कल तक जिस पर सवाल उठ रहे थे, आज वही खुद को दूध का धुला हुआ साबित करने में लगा है। 😜
इसी बीच एक कार्यकर्ता ने विधायक जी सहित पार्टी के जिम्मेदार लोगों को साफ संदेश दे दिया कि कांग्रेस के टिकट पर जीतकर बाद में लालच की नजरों से इधर-उधर लाभ तलाशने वालों का हिसाब भी पार्टी को चुकता करना चाहिए।
बात कड़वी है, लेकिन चुनाव के मौसम में कड़वी बातें ही सबसे ज्यादा असर करती हैं।
उधर चार बार पार्षद रह चुके एक वृद्धोंव्य नेता के वार्ड में इस बार महिला आरक्षण आने के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर लिया है। अब सवाल यह है कि यह स्वेच्छा से लिया गया त्याग है या आरक्षण का राजनीतिक आदेश? 😜
इसका जवाब तो वही बेहतर दे सकते हैं।
फिलहाल संगरिया कांग्रेस में टिकट की दौड़ तेज है।
एक टिकट के लिए कई दावेदार,
एक वार्ड के लिए कई समीकरण,
और एक फैसले के बाद कई नए रिश्ते!
कल तक तस्वीर साफ होगी, लेकिन राजनीति में तस्वीर साफ होने के बाद भी कहानी खत्म नहीं होती।
क्योंकि असली मजा तो तब आएगा जब टिकटों की सूची जारी होगी और पता चलेगा कि कौन कांग्रेस के साथ खड़ा है, कौन निर्दलीय होकर खड़ा है और कौन किसी और के साथ खड़ा है!
संगरिया की राजनीति में अभी सलाम-मशवरा चल रहा है…
कल से शायद सलाम और सवाल—दोनों का दौर शुरू हो जाए!
Vijay Singh Beniwal ✍️
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