
मुनिश्री ध्यान दर्पण एवं वीतराग मुनि महाराज के सान्निध्य में धर्म साधना का प्रेरणादायी संगम।
दैनिक वीरधरा राजस्थान।
शाहपुरा। जैन समाज में रविवार का दिन श्रद्धा, सेवा, साधना और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बन गया। श्रमण संघीय चतुर्थ पटधर, आचार्य सम्राट परम पूज्य गुरुदेव डॉ. शिवमुनि महाराज के आज्ञानुवर्ती, आगम ज्ञाता, ध्यान योगी वाणी भूषण पूज्य गुरुदेव विकसित मुनि महाराज के सुशिष्य पूज्य ध्यान दर्पण मुनि महाराज एवं नवकार मंत्र आराधक पूज्य वीतराग मुनि महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
यह आध्यात्मिक आयोजन समाजसेवी गजेंद्र सिंह सज्जन चंडालिया के निवास स्थान पर संपन्न हुआ, जहां धर्म, भक्ति और आत्मचिंतन का वातावरण पूरे समय बना रहा। कार्यक्रम में संतों के मंगल प्रवचनों ने उपस्थित जनसमूह को आत्मकल्याण, जीवदया और मानव सेवा के प्रति जागरूक किया।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में नवकार मंत्र आराधक पूज्य वीतराग मुनि महाराज ने भारतीय संस्कृति और जैन धर्म की मूल भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि जीवदया, करुणा और सेवा मानव जीवन के सर्वोच्च गुण हैं।
प्रवचन के दौरान नवकार मंत्र आराधक पूज्य वीतराग मुनि महाराज ने "उपवास" के वास्तविक अर्थ और उसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर जोरावर सिंह सुखलेचा, समुंदर सिंह डांगी, पदमचंद जैन, अनिल लोढ़ा, संतोष सिंह चौधरी, अशोक चौधरी, राजकुमार मेहता, राजेंद्र, नवीन चौधरी, सज्जन चंडालिया, सचिन डांगी, विनय डांगी, भंवर तातेड, विनय चौधरी पिंटू सिंघवी एवं करण जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। महिला मंडल की अध्यक्ष सुशीला मेहता एवं उनकी कार्यकारिणी की सदस्याओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यक्रम का संपूर्ण वातावरण धर्म, सेवा, भक्ति और आत्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। पूज्य संतों के मंगलमय सान्निध्य एवं प्रेरक प्रवचनों ने श्रद्धालुओं के मन में आत्मकल्याण, जीवदया और मानव सेवा के प्रति नई चेतना का संचार किया।