
नहरों में पानी, खाद और बिजली व्यवस्था को लेकर किसानों का हुंकार, विकास भवन पर किसान कल्याण एसोसिएशन का धरना-प्रदर्शन
रायबरेली ब्यूरो
किसान कल्याण एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को विकास भवन परिसर में किसानों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। धरने में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों किसान और महिलाओं ने भाग लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं तथा शीघ्र समाधान की मांग की।धरने का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालता प्रसाद शुक्ल ने किया। इस दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती माला सिंह, अजय बाजपेई, करवा शंकर तिवारी, विनय कुमार द्विवेदी, राजाराम, बद्री प्रसाद, राम प्यारे, हर्ष गुप्ता, लखनऊ सिंह, सिद्धि, बलदेव, साधना सोनी, सीमा, शिव देवी सहित सैकड़ों किसान एवं महिला कार्यकर्ता मौजूद रहे।धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जिले की अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं, जिससे धान सहित अन्य फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने सभी नहरों में तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग की। साथ ही सहकारी समितियों में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई।किसानों ने आरोप लगाया कि सलोन क्षेत्र में अवैध रूप से पशुओं का हरा चारा बेचा जा रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है। इसके अलावा पूरे जनपद में अघोषित विद्युत कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से किसान और आम जनता परेशान है। उन्होंने बिजली कटौती बंद कर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।धरने के दौरान छतोह–गांधीनगर मार्ग पर बनी गांव में निर्माणाधीन रेलवे अंडरपास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने कहा कि करीब डेढ़ वर्ष से अंडरपास का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की।इसके अलावा ग्राम सभा गोपालपुर, विकासखंड एवं तहसील सलोन में चकमार्ग संख्या 637 पर दोबारा हुए अतिक्रमण को हटाकर रास्ता खुलवाने तथा ग्राम सभा बेटा खुर्द, तहसील सदर में सुरक्षित भूमि, घूर गड्ढा और खलिहान की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग भी प्रशासन से की गई।धरना समाप्त होने के बाद किसान कल्याण एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन जनहित और किसान हित में आंदोलन को और व्यापक रूप देगा।