
सिरमौरी लोइया को GI टैग मिलना गिरिपार की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान : हाटी विकास मंच
शिमला : हिमाचल प्रदेश के आठ पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) पंजीकरण प्राप्त होने पर हाटी विकास मंच (पंजीकृत), हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार, हिमकोस्ट, संबंधित विभागों, शिल्पकारों तथा समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। हाटी विकास मंच ने कहा कि इन उत्पादों में सिरमौरी लोइया को GI टैग मिलना सिरमौर, विशेषकर गिरिपार क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तकला तथा स्थानीय बुनकरों की पीढ़ियों से चली आ रही उत्कृष्ट कला का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।
हाटी विकास मंच ने कहा कि सिरमौरी लोइया केवल एक पारंपरिक ऊनी वस्त्र नहीं, बल्कि सिरमौर की सांस्कृतिक पहचान, लोकजीवन, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। यह वर्षों से स्थानीय कारीगरों की मेहनत, कौशल और जीवनशैली का प्रतीक रहा है। GI टैग मिलने से इसकी मौलिकता और विशिष्ट पहचान को कानूनी संरक्षण मिलेगा, जिससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी तथा स्थानीय शिल्पकारों और बुनकरों को उनके परिश्रम का उचित मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ने से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
हाटी विकास मंच (पंजीकृत) ने कहा कि मंच ने काफी समय पहले ही सिरमौरी लोइया को GI टैग दिलाने की मांग राज्य सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाई थी। विभिन्न बैठकों, ज्ञापनों और संवाद के माध्यम से मंच ने इस पारंपरिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन तथा राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता पर लगातार बल दिया। हाटी विकास मंच का मानना था कि सिरमौरी लोइया अपनी विशिष्ट बनावट, गुणवत्ता, पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया और ऐतिहासिक महत्व के कारण GI पंजीकरण का पूर्ण अधिकार रखती है। आज इस मांग का साकार होना न केवल हाटी विकास मंच के निरंतर प्रयासों की सार्थकता को दर्शाता है, बल्कि पूरे सिरमौर और गिरिपार क्षेत्र के लिए गर्व और सम्मान का विषय भी है।
मंच ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि GI टैग प्राप्त होने के बाद अब सिरमौरी लोइया के व्यापक प्रचार-प्रसार, ब्रांडिंग, विपणन, आधुनिक पैकेजिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने, शिल्पकारों के कौशल उन्नयन, युवाओं को प्रशिक्षण तथा बुनकरों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। इससे इस पारंपरिक कला का संरक्षण होगा और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे।
हाटी विकास मंच ने यह भी मांग की कि सिरमौर और गिरिपार क्षेत्र की अन्य पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प, कृषि एवं खाद्य उत्पादों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण कर उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से GI पंजीकरण दिलाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं, ताकि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिल सके।
इस अवसर पर हाटी विकास मंच (पंजीकृत), हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष प्रदीप सिंह सिंगटा, महासचिव डॉ. अनिल भारद्वाज, कोषाध्यक्ष एडवोकेट वी. एन. भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश राणा,मुख्य सलाहकार विवेक तोमर, सह सचिव सुरेंद्र ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता बलदेव समयाल, कृष्ण जस्टा, कपिल सिंगटा,सतपाल चौहान, मोहन शर्मा, अनिकेत, मयंक कपूर, रोहन, प्रांजल शर्मा तथा अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों, शिल्पकारों और बुनकरों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक उत्पाद को मिला सम्मान नहीं है, बल्कि पूरे सिरमौर और गिरिपार की सांस्कृतिक अस्मिता, पारंपरिक ज्ञान और लोककला की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है। उन्होंने इस दिशा में कार्य करने के लिए राज्य सरकार, हिमकोस्ट तथा सभी संबंधित संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि भविष्य में भी प्रदेश की पारंपरिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए इसी प्रकार के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।