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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बालपुर गाँव में 30 सितम्बर 1895 को जन्मे पद्मश्री मुकुटधर पाण्डेय हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कवि, निबंधकार और छायावाद के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे। महज 14 वर्ष की आयु में उनकी पहली कविता 'स्वदेश बांधव' पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसके बाद 'पूजा के फूल' सहित अनेक महत्वपूर्ण कृतियों के माध्यम से उन्होंने हिंदी कविता और गद्य को समृद्ध किया। शैलबाला, परिश्रम, हृदयदान, स्मृतिपुंज तथा मेघदूत का छत्तीसगढ़ी अनुवाद उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं। हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1976 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनकी साहित्यिक विरासत आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है। #MukutdharPandey #ChhattisgarhLiterature #PrideOfChhattisgarh #Shanivar_Sahitya

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बालपुर गाँव में 30 सितम्बर 1895 को जन्मे पद्मश्री मुकुटधर पाण्डेय हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कवि, निबंधकार और छायावाद के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे। महज 14 वर्ष की आयु में उनकी पहली कविता 'स्वदेश बांधव' पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसके बाद 'पूजा के फूल' सहित अनेक महत्वपूर्ण कृतियों के माध्यम से उन्होंने हिंदी कविता और गद्य को समृद्ध किया। शैलबाला, परिश्रम, हृदयदान, स्मृतिपुंज तथा मेघदूत का छत्तीसगढ़ी अनुवाद उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं। हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1976 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनकी साहित्यिक विरासत आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है। #MukutdharPandey #ChhattisgarhLiterature #PrideOfChhattisgarh #Shanivar_Sahitya - Bilaspur News