
*सेमिनार के अंतिम दिन दो सत्रों में नार्थ ईस्ट की संस्कृति पर गहन चर्चा*
*जयपुर :कमलेश आमेटा 02 अक्टूबर।* पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से आरआईसी, जयपुर के सहयोग से आरआईसी में आयोजित किए गए दो दिवसीय सेमिनार के दूसरे दिन शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के डॉ. तारो सिंदिक ने ‘पूर्वाेत्तर भारत में प्रचलित लोक विश्वास- अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में’ विषय पर रोचक विवेचन में लोक विश्वास बनने के पीछे की कथाएं बताई। उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति और विकास के संबंध में अरुणाचल प्रदेश, खासकर वहां के तागिन समुदाय में प्रचलित कुरियुम-कुलू से रियुम्चिजेरिंग व रियुमसी, फिर पृथ्वी, आकाश आिद के बनने की लोक कथाएं रोचक ढंग से बताते हुए वहां की संस्कृति पर प्रकाश डाला।
इसी सत्र में त्रिपुरा के डॉ. परमीत परना पॉल ने ‘त्रिपुरा की राजशाही चित्रकला और पूर्वाेत्तर की कलात्मक विरासत’ विषय पर विशद जानकारी देते हुए बताया कि त्रिपुरा में राजवाड़ा काल में कैसे चित्रकला को प्रोत्साहन िमला, फिर उसके बाद उसका चरणबद्ध विकास कैसे हुआ। इस सत्र का संचालन दिलीप कुमार कलिता ने किया। वहीं, दूसरे और अंतिम सत्र में असम के विशेषज्ञ दिलीप कुमार कलिता ने ‘व्यंजन और खान-पान रू पूर्वाेत्तर की विशिष्ट पहचान’ विषय पर बोलते हुए पूर्वाेत्तर के खान-पान पर विस्तार से चर्चा की।
इसी सत्र में ‘पूर्वाेत्तर की गूंज मिजोरम में आस्था, लोककथाओं और सांस्कृतिक पहचान के डिजिटल भविष्य’ विषय पर मिजोरम के कला विज्ञ अलफ्रेड जोनाथन ने विभिन्न उद्धरणों के साथ विस्तार से चर्चा की। इस सत्र का संचालन डॉ तारो सिंदिक ने किया।
सेमिनार के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वेस्ट जोन कल्चरल सेंटर के पर निदेशक डॉ देवेन्द्र कुमार धोदावत ने कहा कि ऑक्टेव 2026 वाकई एक भारत श्रेष्ठ भारत का अनुपम उदाहरण है। ऐसे आयोजनों का भी प्रधानमंत्री मोदी के 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूर्ण करने में अहम योगदान रहेगा।
इससे पूर्व, सेमिनार के संयोजक डॉ संतोष कुमार (सिक्किम) ने दो दिन में हुए पांचों सत्रों का ब्योरा दिया। सेमिनार में श्रेष्ठ योगदान के लिए मंच संचालक प्रणय भारद्वाज और समन्वयक डॉ आकांक्षा जोशी को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ अश्विन दलवी ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर पवन अमरावत ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया।