
रणथम्भौर के अनसुने प्रहरी: बारिश, जंगल और बाघों के बीच 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात वनकर्मी
जब अधिकांश लोग मानसून की बारिश का आनंद लेते हैं, तब रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के वनकर्मी उसी बारिश में जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं। घने जंगल, फिसलन भरे रास्ते, उफनते नाले और लगातार वर्षा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच रणथम्भौर के दूरस्थ वन चौकियों पर तैनात वन रक्षक, वनपाल और अन्य फील्ड स्टाफ दिन-रात वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटे हुए हैं।
टाइगर रिजर्व की कई वन चौकियां जंगल के ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद वनकर्मी 24×7 निगरानी रखते हुए बाघों एवं अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर सतत नजर बनाए रखते हैं। वायरलेस संचार प्रणाली, नियमित वाहन एवं पैदल गश्त तथा आधुनिक निगरानी व्यवस्था के माध्यम से प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र की सतत मॉनिटरिंग की जाती है।
मानसून के दौरान जंगल में प्राकृतिक जल स्रोत सक्रिय होने के साथ-साथ वन्यजीवों की गतिविधियों में भी परिवर्तन आता है। ऐसे समय में फील्ड स्टाफ का दायित्व और अधिक बढ़ जाता है। वनकर्मी न केवल बाघों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा और मार्गदर्शन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बारिश के दौरान विशेष रेन गियर, वायरलेस सेट एवं आवश्यक उपकरणों के साथ वनकर्मी दिन-रात गश्त कर रहे हैं, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। जिला प्रशासन एवं पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यकतानुसार त्वरित सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण केवल आधुनिक तकनीक से ही संभव नहीं है, बल्कि इसके पीछे वनकर्मियों की निष्ठा, साहस और निरंतर समर्पण सबसे बड़ी शक्ति है। दूरस्थ वन चौकियों पर सीमित संसाधनों के बावजूद कार्यरत ये कर्मचारी वास्तव में रणथम्भौर के “अनसुने प्रहरी” हैं, जिनके अथक प्रयासों से देश के सबसे महत्वपूर्ण बाघ आवासों में से एक की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।
रणथम्भौर प्रशासन ने सभी वनकर्मियों के समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा एवं साहस की सराहना करते हुए कहा कि यही समर्पित टीम संरक्षण की सफलता की वास्तविक आधारशिला है।