
पटवारियों की पोस्टिंग को लेकर कथित सौदेबाजी के आरोप, 60-70 हजार रुपए में पसंदीदा जगह दिलाने का दावा
29 सितंबर को जारी हुआ था छह पटवारियों के तबादले का आदेश, सूची सार्वजनिक होने से पहले स्क्रीनशॉट पहुंचने पर उठे सवाल
मंदसौर। जिले में पटवारियों के तबादले और पसंदीदा स्थान पर पोस्टिंग को लेकर कथित सौदेबाजी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा पटवारियों को 60 से 70 हजार रुपए में मनचाही जगह पर पोस्टिंग दिलाने का ऑफर दिया जा रहा है। खास बात यह है कि छह पटवारियों के तबादले से संबंधित आदेश 29 सितंबर को जारी होने के बावजूद इसकी सूची सार्वजनिक नहीं होने के बीच कुछ चुनिंदा लोगों तक आदेश के स्क्रीनशॉट पहुंचने की बात सामने आई है। इससे तबादला प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि कथित तौर पर कुछ लोग तबादला आदेश का स्क्रीनशॉट दिखाकर पटवारियों से संपर्क कर रहे हैं और पसंदीदा स्थान पर पोस्टिंग दिलाने के बदले रकम की मांग किए जाने के आरोप हैं। इस पूरी गतिविधि में राजस्व शाखा से जुड़े कुछ लोगों और पटवारियों की भूमिका होने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित आदेश कार्यालय कलेक्टर जिला मंदसौर के आदेश क्रमांक 2005/भू-सं./प्रस्था/2026 के तहत 29 सितंबर 2026 को जारी हुआ था। आदेश पर कलेक्टर दिव्यांक सिंह के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। आरोप है कि आदेश की पूरी सूची सार्वजनिक होने से पहले ही कुछ लोगों के पास इसकी जानकारी और स्क्रीनशॉट पहुंच गए।
मामला सामने आने के बाद कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने कहा कि 29 सितंबर को आदेश पर उन्होंने स्वयं हस्ताक्षर किए थे और राजस्व शाखा को सूची प्रकाशन के लिए भेजने के निर्देश भी दिए थे। उन्होंने कहा कि सूची इतने दिनों तक क्यों रोकी गई, इसकी जानकारी ली जाएगी।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि यदि तबादले के नाम पर कोई शासकीय कर्मचारी स्क्रीनशॉट दिखाकर रुपए की मांग करता है तो उसके संबंध में सबूत उपलब्ध कराए जाएं। ऐसे मामले में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तबादला आदेश जारी हो चुका था और सूची प्रकाशन के निर्देश दिए जा चुके थे, तो सूची सार्वजनिक होने में देरी क्यों हुई और आदेश के स्क्रीनशॉट चुनिंदा लोगों तक कैसे पहुंचे। प्रशासन की जांच के बाद ही कथित सिंडिकेट और लेनदेन के आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।