
रुद्रपुर में सोशल मीडिया बयानबाजी पर सरपंच अब्दुल गफ्फार खान का पलटवार, कहा—“जहर घोलने वाली भाषा से पूरे जिले का माहौल प्रभावित होगा”
रुद्रपुर। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर रुद्रपुर से जुड़े कथित विवाद और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर माहौल गर्म नजर आ रहा है। इसी बीच दरऊ के सरपंच अब्दुल गफ्फार खान ने एक बयान जारी कर मुस्लिम समाज को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज को डराने या अपमानित करने वाली भाषा लोकतांत्रिक और सामाजिक माहौल के लिए उचित नहीं है।
“मुसलमान किसी की धमकी से डरने वाला नहीं”
अब्दुल गफ्फार खान ने कहा कि सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक या भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज से संयम और शांति बनाए रखने की अपील भी की।
धार्मिक संदर्भ देते हुए सब्र की बात
अपने बयान में खान ने मुस्लिम इतिहास और धार्मिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में भी सब्र और संयम को महत्व दिया गया है। उन्होंने कुरआन की आयत “इन्नल्लाह मअस्साबिरीन” का उल्लेख करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को संयम बनाए रखना चाहिए और किसी भी विवाद का जवाब कानून के दायरे में रहकर देना चाहिए।
मौलाना के बयान पर भी उठाए सवाल
अब्दुल गफ्फार खान ने 12 रबीउल अव्वल के अवसर पर दिए गए एक मौलाना के कथित बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में पहले से यह आशंका हो कि बयान के कारण मुकदमा या गिरफ्तारी जैसी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, तो सार्वजनिक मंच से ऐसी भाषा से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जमीन हाईकोर्ट के आदेश के बाद खाली हुई है तो इसका श्रेय किसी व्यक्ति या संगठन को लेने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने रुद्रपुर की संबंधित कमेटियों और पूर्व की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल खड़े किए।
“गलतियां हुई हैं तो उनकी भी समीक्षा हो”
खान ने अपने बयान में आरोप लगाया कि जमीन और चंदे से जुड़े मामलों में समाज के ही कुछ लोगों से गलतियां हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों पर आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके तथ्य सामने आने चाहिए।
“कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है”
किसी व्यक्ति विशेष द्वारा मुस्लिम समाज पर कथित रूप से लगातार जुबानी हमले किए जाने का जिक्र करते हुए खान ने कहा कि रुद्रपुर में बड़ी मुस्लिम आबादी है और यदि किसी बयान को लेकर आपत्ति है तो लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर जवाब देने के बजाय आवश्यकता पड़ने पर कानून का सहारा लेने की बात कही।
“बयानबाजी का असर आसपास की विधानसभा सीटों पर भी पड़ेगा”
खान ने राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में की जाने वाली बयानबाजी का प्रभाव केवल रुद्रपुर तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने किच्छा, सितारगंज, खटीमा, जसपुर और काशीपुर सहित आसपास के क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में तनाव पैदा करने वाली भाषा का राजनीतिक असर व्यापक हो सकता है।
कांग्रेस नेताओं पर भी साधा निशाना
अपने बयान में अब्दुल गफ्फार खान ने कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी भी समुदाय या व्यक्ति को गाली देना उचित नहीं है।
“पहले अपने नेताओं से सवाल करें”
खान ने कांग्रेस से जुड़े मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि यदि वे किसी राजनीतिक दल के अल्पसंख्यक मोर्चे से सवाल कर रहे हैं तो उन्हें अपने नेताओं से भी सवाल करना चाहिए। उन्होंने रुद्रपुर और किच्छा में पूर्व में हुई कथित हिंसा, आगजनी और नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं को लेकर भी राजनीतिक दलों के नेताओं से जवाब मांगा जाना चाहिए।
हालांकि, इन घटनाओं और लगाए गए आरोपों के संबंध में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
“समाज के लोगों को बुरा-भला कहना आसान”
अब्दुल गफ्फार खान ने कहा कि अपने ही समाज के लोगों को सोशल मीडिया पर बुरा-भला कहना आसान है, लेकिन वास्तविक मुद्दों पर सवाल उठाना और अपने राजनीतिक नेतृत्व से जवाब मांगना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और किसी भी विवाद को कानून के दायरे में सुलझाने की अपील की।
I7 News की अपील: किसी भी समुदाय, धर्म या राजनीतिक दल को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक, भड़काऊ या असत्यापित सामग्री साझा करने से बचें। विवाद की स्थिति में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दें।