
अपने ही पैसे के लिए 2 साल से कर रहे थे संघर्ष, उपभोक्ता न्यायालय से मिला न्याय, डाकघर बचत खाते में 33, 799 रुपए हो गए थे कम
The silence media news
औरंगाबाद- भारतीय डाक विभाग द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न योजनाओं का उनके ही कर्मचारी पलीता लगा रहे हैं। जहां खाताधारकों के खाते में कम पैसा जमा होने की शिकायत आम हो गई है। 33 हजार 7 सौ 99 रुपये की कम इंट्री से पीड़ित जिले के हसपुरा प्रखण्ड के सूर्यदयाल राम को अपने ही पैसे वापस पाने के लिए 2 साल परेशान होना पड़ा। उपभोक्ता न्यायालय के आदेश से उनके पैसे वापस दिलाये गए।
जिले के हसपुरा प्रखण्ड के अमझर स्थित गांव निवासी सूर्यदयाल राम के खाते में हसपुरा स्थित डाकघर ने 33,799 रूपये की कम एंट्री कर दी। जब उन्होंने इस पर आपत्ति की तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग की शरण ली। दो साल के संघर्ष के बाद आखिरकार उनकी रकम वापस कर दी गई।
क्या था मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार हसपुरा प्रखण्ड के अमझर निवासी सूर्यदयाल राम का हसपुरा के डाकघर में बचत खाता संख्या एसबी- 6415884307 संचालित हो रहा था। ग्राहक के इस बचत खाते में डाकघर ने 33 हजार 7 सौ 99 रुपये की कम एंट्री कर दी थी। इसे ठीक कराने के लिए सूर्यदयाल राम ने हसपुरा डाकघर और औरंगाबाद के डाक अधीक्षक को कई बार आवेदन दिया, लेकिन कोई समाधन नहीं निकला।
तब मामले की विस्तृत जानकारी के लिए पीड़ित ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी। आरटीआई से उसे जानकारी दी गई कि डाक विभाग ने 27 सितंबर 2024 को ही वरीय अधिकारी ने उसके खाते में राशि जमा करने का आदेश जारी कर दिया था। इसके बावजूद खाते में पैसे नहीं आए।
लीगल नोटिस का भी जवाब नही मिला जवाब
आरटीआई से जानकारी मिलने के बाद जब पीड़ित ने डाकघर को लीगल नोटिस देकर जवाब मांगा। पीड़ित ने 05 अगस्त 2025 को अधिवक्ता के माध्यम लीगल नोटिस भेजा। डाकघर ने लीगल नोटिस का भी भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद परेशान होकर पीड़ित ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग की शरण ली।
उपभोक्ता अदालत ने दिलाए पैसे
न्याय नहीं मिलता देख पीड़ित सूर्यदयाल राम ने उपभोक्ता न्यायालय की शरण ली। मामले में पीड़ित ने औरंगाबाद के उपभोक्ता अदालत में वाद संख्या 45/2026 दायर कर बकाया राशि के साथ मानसिक क्षति के लिए 50 हजार के मुआवजे की भी मांग की। वाद में पीड़ित ने कहा कि खाते में राशि की कम एंट्री करना डाक विभाग की सेवा में त्रुटि है और उसे राशि वापस मिलनी चाहिए। मामले में उपभोक्ता अदालत की नोटिस के बाद
औरंगाबाद के
डाक अधीक्षक ने आयोग में दाखिल किये जवाब में कहा कि आंशिक राशि वाले खातों के लिए पहले स्पष्ट निर्देश नहीं थे। एसबी आर्डर 15/2025 के बाद 01 जुलाई 2026 को ही औरंगाबाद के प्रधान डाकघर को भुगतान का निर्देश दिया गया। निर्देश के बाद डाक विभाग ने पीड़ित ग्राहक के खाते को खाता बंद कर खाताधारक के नाम चेक संख्या 639179 जवाब के साथ संलग्न किया। मामले में डाक विभाग की ओर से पीड़ित के पक्ष में जारी चेक मिलने के बाद उपभोक्ता अदालत ने पीड़ित को चेक प्रदान कर दिया।
इस तरह से देखा जाए तो अपने ही पैसे को प्राप्त करने के लिए पीड़ित को 2 साल संघर्ष करना पड़ा आखिरकार उपभोक्ता न्यायालय से न्याय मिला।
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