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करनाल पहुंचे मनोहर लाल खट्टर के बड़े ऐलान ! EV पर 30% तक राहत, 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर का लक्ष्य..
#ManoharLal #Karnal #PublicGrievances #IndiaEnergy #PowerSector #ViksitBharat #EnergySecurity #BJP #HaryanaNews #khabarnamaharyana

करनाल पहुंचे मनोहर लाल खट्टर के बड़े ऐलान ! EV पर 30% तक राहत, 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर का लक्ष्य.. #ManoharLal #Karnal #PublicGrievances #IndiaEnergy #PowerSector #ViksitBharat #EnergySecurity #BJP #HaryanaNews #khabarnamaharyana

Haryana, India | Jun 27, 2026

पांगी अंधेरे में, विभाग गहरी नींद में! एक माह से बंद पड़ा साच घराट पावर हाउस, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन?

 जनजातीय क्षेत्र पांगी में बिजली व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। साच घराट पावर हाउस की एक टरबाइन फटने के बाद पिछले एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्युत विभाग आज तक इसे दुरुस्त नहीं कर पाया है। नतीजतन पूरा क्षेत्र बिजली संकट से जूझ रहा है और आम जनता अंधेरे तथा अव्यवस्था का खामियाजा भुगतने को मजबूर है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पावर हाउस के रखरखाव और मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसकी हालत इतनी बदतर क्यों है? आखिर वह पैसा कहां खर्च हो रहा है, जिसका दावा विभाग लगातार करता रहा है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि साच घराट पावर हाउस में 450-450 किलोवाट क्षमता की दो टरबाइन स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि स्थापना के बाद से शायद ही कभी दोनों टरबाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ चली हों। अधिकतर समय केवल एक मशीन के सहारे बिजली उत्पादन किया जाता रहा, जबकि दूसरी मशीन को स्टैंडबाय के नाम पर रखा गया। अब हालात ऐसे हैं कि स्टैंडबाय मशीन की स्थिति भी किसी कबाड़ से कम नहीं बताई जा रही है।

लोगों का आरोप है कि विभाग वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करता आया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय-समय पर सही रखरखाव किया गया होता तो क्या आज एक टरबाइन फटने के बाद पूरा क्षेत्र एक महीने से अधिक समय तक अंधेरे में डूबा रहता?

बताया जा रहा है कि खराब टरबाइन को यमुनानगर की एक वर्कशॉप में भेजा गया है। हैरानी की बात यह है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टरबाइन कब तक वापस आएगी और बिजली व्यवस्था कब तक सामान्य होगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पांगी जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता है। बिजली के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियां, सरकारी कार्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद विभाग की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

वहीं धनवास सोलर पावर प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में असंतोष है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पांगी के ऊर्जा ढांचे पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा?

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि साच घराट पावर हाउस में हुए नुकसान, रखरखाव पर हुए खर्च और मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पिछले वर्षों में मरम्मत के नाम पर कितना धन खर्च हुआ और उसके क्या परिणाम सामने आए।

जनता का साफ कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पावर हाउस एक टरबाइन के सहारे चलता रहा और आज एक माह से अधिक समय तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी का उदाहरण है।
#PangiPowerCrisis #SachGharatPowerHouse #ElectricityFailure #HimachalPradesh #PowerOutage #TribalAreaIssues #PublicAccountability #HydroPowerProject #InfrastructureFailure #PangiNews #HimachalNews #EnergyCrisis #GovernmentAccountability #BreakingNews #PowerSector हिम संदेश Pangi Administration CMO Himachal Sukhvinder Singh Sukhu Jagat Singh Negi Adv Surjeet Sharma Bharmouri Janak Raj Shiv Suryavanshi हिम शिखर पांगी

पांगी अंधेरे में, विभाग गहरी नींद में! एक माह से बंद पड़ा साच घराट पावर हाउस, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन? जनजातीय क्षेत्र पांगी में बिजली व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। साच घराट पावर हाउस की एक टरबाइन फटने के बाद पिछले एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्युत विभाग आज तक इसे दुरुस्त नहीं कर पाया है। नतीजतन पूरा क्षेत्र बिजली संकट से जूझ रहा है और आम जनता अंधेरे तथा अव्यवस्था का खामियाजा भुगतने को मजबूर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पावर हाउस के रखरखाव और मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उसकी हालत इतनी बदतर क्यों है? आखिर वह पैसा कहां खर्च हो रहा है, जिसका दावा विभाग लगातार करता रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि साच घराट पावर हाउस में 450-450 किलोवाट क्षमता की दो टरबाइन स्थापित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि स्थापना के बाद से शायद ही कभी दोनों टरबाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ चली हों। अधिकतर समय केवल एक मशीन के सहारे बिजली उत्पादन किया जाता रहा, जबकि दूसरी मशीन को स्टैंडबाय के नाम पर रखा गया। अब हालात ऐसे हैं कि स्टैंडबाय मशीन की स्थिति भी किसी कबाड़ से कम नहीं बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि विभाग वर्षों से मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करता आया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय-समय पर सही रखरखाव किया गया होता तो क्या आज एक टरबाइन फटने के बाद पूरा क्षेत्र एक महीने से अधिक समय तक अंधेरे में डूबा रहता? बताया जा रहा है कि खराब टरबाइन को यमुनानगर की एक वर्कशॉप में भेजा गया है। हैरानी की बात यह है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टरबाइन कब तक वापस आएगी और बिजली व्यवस्था कब तक सामान्य होगी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पांगी जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता है। बिजली के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियां, सरकारी कार्य और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद विभाग की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही। वहीं धनवास सोलर पावर प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में असंतोष है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पांगी के ऊर्जा ढांचे पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा? क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि साच घराट पावर हाउस में हुए नुकसान, रखरखाव पर हुए खर्च और मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पिछले वर्षों में मरम्मत के नाम पर कितना धन खर्च हुआ और उसके क्या परिणाम सामने आए। जनता का साफ कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पावर हाउस एक टरबाइन के सहारे चलता रहा और आज एक माह से अधिक समय तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी का उदाहरण है। #PangiPowerCrisis #SachGharatPowerHouse #ElectricityFailure #HimachalPradesh #PowerOutage #TribalAreaIssues #PublicAccountability #HydroPowerProject #InfrastructureFailure #PangiNews #HimachalNews #EnergyCrisis #GovernmentAccountability #BreakingNews #PowerSector हिम संदेश Pangi Administration CMO Himachal Sukhvinder Singh Sukhu Jagat Singh Negi Adv Surjeet Sharma Bharmouri Janak Raj Shiv Suryavanshi हिम शिखर पांगी

Saach, Chamba | Jun 11, 2026

एमपी में युवाओं के लिए बड़ा तोहफा, 50 हजार पदों पर भर्तियां मंजूर, नौकरी के नए दरवाजे

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Madhya Pradesh, India | Jun 8, 2026

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