
रीवा छात्रावास में सुविधाओं को लेकर छात्रों का अनशन जर्जर छात्रावास पर छात्रों का प्रदर्शन पानी और सुरक्षा की मांग, छात्र धरने पर रीवा छात्रावास की बदहाली पर उठे सवाल बुनियादी सुविधाओं के लिए छात्रों का आंदोलन#Rewa #RewaNews #MPNews #StudentProtest #Hostel #HostelStudents #Education #TribalHostel #BasicFacilities #WaterCrisis #StudentRights #MadhyaPradesh #HindiNews #BreakingNews #RewaUpdates #CollegeHostel #StudentsVoice #Infrastructure #ViralNews #NewsUpdate
Madhya Pradesh, India | Jul 28, 2026

पीने के लिए पानी नहीं, शौच के लिए शौचालय नहीं! उजियारपुर अंचल कार्यालय की बदहाली आई सामने, जिम्मेदार अधिकारी बेखबर। उजियारपुर, समस्तीपुर: आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए बने उजियारपुर अंचल कार्यालय की बदहाल व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। कार्यालय परिसर में आने वाले फरियादियों और कर्मचारियों को पीने के लिए स्वच्छ पेयजल तक उपलब्ध नहीं है। वहीं शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने से महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना सैकड़ों लोग विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए अंचल कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। गर्मी के मौसम में पानी की व्यवस्था नहीं होना और शौचालय का उपयोग योग्य नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अंचल कार्यालय में तत्काल स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय एवं अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो लोगों का आक्रोश बढ़ सकता है। #Ujiarpur #Samastipur #Bihar #CircleOffice #PublicProblem #GovernmentOffice #BasicFacilities #WaterCrisis #ToiletIssue #Administration #BiharNews #SamastipurNews #StreamBihar Sudarshan Kumar Surendra Pd Singh Subhansh Kumar Thakur Sudarshan Kumar Socialworkar Chandan Mishra Bjp Chandan Kumar
Ujiarpur, Samastipur | Jul 20, 2026

जनजातीय क्षेत्र भरमौर के दुर्गठी पंचायत के वार्ड नंबर-4 में सड़क सुविधा के अभाव की दर्दनाक तस्वीर। बीमार बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने पालकी का सहारा लिया और कई किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर सड़क तक पहुंचाया। यह घटना दूरदराज़ क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण की मांग की है। #ChambaTodayChannel #Chamba #Bharmour #Durgathi #TribalArea #HimachalPradesh #RoadConnectivity #Palki #GroundReport #RuralIndia #Development #Healthcare #BasicFacilities #BreakingNews #HimachalNews #ChambaNews #viralvideo
Chamba, Chamba | Jul 18, 2026

बेरी कभी थी शिक्षा का पौराणिक गढ़, आज ग्रेजुएशन के डिग्री के लिए 28 KM दूर जाना पड़ता है राहुल कुमार ईश्वरी औरंगाबाद जिला के मदनपुर प्रखंड मुख्यालय से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बेरी शिक्षा के क्षेत्र में 100 साल पुरानी विरासत रखती है। यहां 1926 में इंग्लिश प्राइमरी विद्यालय और 1939 में हाई स्कूल स्थापित किया गया था। उस समय पूरे बिहार में आठवीं का बोर्ड हुआ करता था। बेरी उस दौर में केवल मदनपुर ही नहीं, बल्कि औरंगाबाद के रफीगंज के अलावा गयाजी जिले के गुरुआ, आमस प्रखंड के छात्र-छात्राओं के लिए भी पढ़ाई का सबसे बड़ा केंद्र थी। यहां दूर-दराज से बच्चे पढ़ने आते थे और उनके लिए छात्रावास की भी व्यवस्था थी। आजादी से पूर्व स्थापित प्राइमरी स्कूल का भवन आज भी मौजूद है, जो अपग्रेड होकर अब राजकीय मध्य विद्यालय के रूप में संचालित है। जानकारी के अनुसार मिडिल स्कूल लगभग 2 एकड़ में फैला है जबकि हाई स्कूल के पास 22 एकड़ से अधिक जमीन है। लेकिन समय के साथ विकास की गाड़ी यहां धीमी पड़ गई। जिसके कारण शिक्षा के क्षेत्र में आपेक्षित विकास नहीं हो सका। छात्रावास की पुरानी बिल्डिंग कुछ साल पहले तक खंडहर में तब्दील थी। जिसे पांच से दस वर्ष पूर्व तोड़कर उसकी जगह पर मॉडल स्कूल का निर्माण किया गया। इससे शिक्षा के क्षेत्र में उम्मीद जगी थी।लेकिन उच्च शिक्षा की व्यवस्था अब भी उपलब्ध नहीं हो सकी। धार्मिक आस्था का भी है बड़ा केंद्र शिक्षा के साथ-साथ बेरी धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पंचायत में मदार नदी के तट पर स्थित भूरहा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर तक पक्की सड़क बनी हुई है। सावन के पूरे महीने यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है। मंदिर के सामने एक बहुत प्राचीन तालाब है जहां वर्षों से छठ पूजा का आयोजन होता आ रहा है। स्थानीय लोगों की इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। दूर-दराज से लोग यहां मन्नत मांगने आते हैं। लेकिन धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंदिर परिसर में बैठने, शौचालय और प्रकाश की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। यह पंचायत आज भी उपेक्षा का शिकार स्थानीय लोगों का कहना है कि 100 साल पहले ही बेरी शिक्षा का केंद्र बन चुकी थी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने इस विरासत को आगे नहीं बढ़ाया। पंचायत के अंदरूनी इलाकों में आज भी पक्की नाली, बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। बरसात में गांव की संपर्क सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं। वार्ड 14 चौधरी बिगहा में जल निकासी की समस्या आज भी बनी हुई है नाली का पानी जमा हो जाता है जिससे ग्रामीणों, पुजारियों एवं विद्यालय जाने वाले बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत के मुखिया के द्वारा नाला, नाली तथा सोख्ता का निर्माण भी कराया गया, इसके बावजूद समस्या जस की तस है। पंचायत में खेल मैदान मौजूद है, लेकिन कुछ लोग वहां खुले में शौच करते हैं। इससे खिलाड़ियों को अभ्यास करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शिक्षा और धर्म दोनों के क्षेत्र में नाम होने के बावजूद पंचायत में लाइब्रेरी और डिग्री कॉलेज जैसी सुविधाएं नहीं हैं। इस क्षेत्र के छात्रों को ग्रेजुएशन के लिए 28 किलोमीटर दूर सफर करना पड़ता है। जबकि हाई स्कूल के पास 22 एकड़ से अधिक जमीन उपलब्ध है। स्वास्थ्य की स्थिति और भी बदतर है। उपस्वास्थ्य केंद्र निजी भवन के एक कमरे में चल रहा है। इसका अपना भवन तक नहीं है।ग्रामीणों की मांग है कि बेरी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए इसे शिक्षा एवं आस्था आदर्श पंचायत के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए उपलब्ध 22 एकड़ जमीन पर डिग्री कॉलेज व्यवस्था की जाए। एक समय बेरी पूरे क्षेत्र के लिए थी प्रेरणा बेरी निवासी राजेन्द्र सिंह उर्फ विधायक जी बताते हैं: एक समय था जब बेरी पंचायत का राजकीय मध्य विद्यालय पूरे मदनपुर, गुरुआ, आमस और रफीगंज क्षेत्र में सबसे पुराना और प्रतिष्ठित स्कूल था। इसी विद्यालय से पढ़कर कोल इंडिया के सीजीएम, जिला जज, मेजर, इंजीनियर, प्रोफेसर, लेखक, शिक्षक, अधिवक्ता समेत कई लोग उच्च पदों पर पहुंचे हैं। गयाजी औरंगाबाद के बच्चे यहां हॉस्टल में रहकर पढ़ते थे। आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बेरी अपनी पहचान खो रही है। हाई स्कूल के पास 22 एकड़ जमीन है। सरकार यहां डिग्री कॉलेज के साथ-साथ उपस्वास्थ्य केंद्र का पक्का भवन निर्माण करवाए जिला मुख्यालय से दूरी: 28 किलोमीटर खास पहचान: 1926 प्राइमरी - 2 एकड़, 1939 हाई स्कूल - 22+ एकड़, छात्रावास, मदार नदी तट पर भूरहा मंदिर मुख्य मांग: डिग्री कॉलेज, उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन + अंदरूनी सड़क, नाली मुख्य समस्या: शिक्षा-स्वास्थ्य का अभाव, खेल मैदान में शौच, मंदिर परिसर में सुविधाओं का अभाव कनेक्टिविटी: मदनपुर मुख्यालय से 2 KM, सड़क मार्ग #BeriPanchayat #AurangabadBihar #Madanpur #SaveBeri #DegreeCollegeForBeri #EducationMatters #100YearsOfEducation #StudentsRights #BiharEducation #NoHealthCenter #NoLibrary #BasicFacilities #RuralDevelopment #NeglectedBeri
Aurangabad, Aurangabad | Jul 17, 2026

बेरी कभी थी शिक्षा का पौराणिक गढ़, आज ग्रेजुएशन के डिग्री के लिए 28 KM दूर जाना पड़ता है राहुल कुमार ईश्वरी औरंगाबाद जिला के मदनपुर प्रखंड मुख्यालय से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बेरी शिक्षा के क्षेत्र में 100 साल पुरानी विरासत रखती है। यहां 1926 में इंग्लिश प्राइमरी विद्यालय और 1939 में हाई स्कूल स्थापित किया गया था। उस समय पूरे बिहार में आठवीं का बोर्ड हुआ करता था। बेरी उस दौर में केवल मदनपुर ही नहीं, बल्कि औरंगाबाद के रफीगंज के अलावा गयाजी जिले के गुरुआ, आमस प्रखंड के छात्र-छात्राओं के लिए भी पढ़ाई का सबसे बड़ा केंद्र थी। यहां दूर-दराज से बच्चे पढ़ने आते थे और उनके लिए छात्रावास की भी व्यवस्था थी। आजादी से पूर्व स्थापित प्राइमरी स्कूल का भवन आज भी मौजूद है, जो अपग्रेड होकर अब राजकीय मध्य विद्यालय के रूप में संचालित है। जानकारी के अनुसार मिडिल स्कूल लगभग 2 एकड़ में फैला है जबकि हाई स्कूल के पास 22 एकड़ से अधिक जमीन है। लेकिन समय के साथ विकास की गाड़ी यहां धीमी पड़ गई। जिसके कारण शिक्षा के क्षेत्र में आपेक्षित विकास नहीं हो सका। छात्रावास की पुरानी बिल्डिंग कुछ साल पहले तक खंडहर में तब्दील थी। जिसे पांच से दस वर्ष पूर्व तोड़कर उसकी जगह पर मॉडल स्कूल का निर्माण किया गया। इससे शिक्षा के क्षेत्र में उम्मीद जगी थी।लेकिन उच्च शिक्षा की व्यवस्था अब भी उपलब्ध नहीं हो सकी। धार्मिक आस्था का भी है बड़ा केंद्र शिक्षा के साथ-साथ बेरी धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पंचायत में मदार नदी के तट पर स्थित भूरहा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर तक पक्की सड़क बनी हुई है। सावन के पूरे महीने यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है। मंदिर के सामने एक बहुत प्राचीन तालाब है जहां वर्षों से छठ पूजा का आयोजन होता आ रहा है। स्थानीय लोगों की इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। दूर-दराज से लोग यहां मन्नत मांगने आते हैं। लेकिन धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंदिर परिसर में बैठने, शौचालय और प्रकाश की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। यह पंचायत आज भी उपेक्षा का शिकार स्थानीय लोगों का कहना है कि 100 साल पहले ही बेरी शिक्षा का केंद्र बन चुकी थी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने इस विरासत को आगे नहीं बढ़ाया। पंचायत के अंदरूनी इलाकों में आज भी पक्की नाली, बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। बरसात में गांव की संपर्क सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं। वार्ड 14 चौधरी बिगहा में जल निकासी की समस्या आज भी बनी हुई है नाली का पानी जमा हो जाता है जिससे ग्रामीणों, पुजारियों एवं विद्यालय जाने वाले बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत के मुखिया के द्वारा नाला, नाली तथा सोख्ता का निर्माण भी कराया गया, इसके बावजूद समस्या जस की तस है। पंचायत में खेल मैदान मौजूद है, लेकिन कुछ लोग वहां खुले में शौच करते हैं। इससे खिलाड़ियों को अभ्यास करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शिक्षा और धर्म दोनों के क्षेत्र में नाम होने के बावजूद पंचायत में लाइब्रेरी और डिग्री कॉलेज जैसी सुविधाएं नहीं हैं। इस क्षेत्र के छात्रों को ग्रेजुएशन के लिए 28 किलोमीटर दूर सफर करना पड़ता है। जबकि हाई स्कूल के पास 22 एकड़ से अधिक जमीन उपलब्ध है। स्वास्थ्य की स्थिति और भी बदतर है। उपस्वास्थ्य केंद्र निजी भवन के एक कमरे में चल रहा है। इसका अपना भवन तक नहीं है।ग्रामीणों की मांग है कि बेरी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए इसे शिक्षा एवं आस्था आदर्श पंचायत के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए उपलब्ध 22 एकड़ जमीन पर डिग्री कॉलेज व्यवस्था की जाए। एक समय बेरी पूरे क्षेत्र के लिए थी प्रेरणा बेरी निवासी राजेन्द्र सिंह उर्फ विधायक जी बताते हैं: एक समय था जब बेरी पंचायत का राजकीय मध्य विद्यालय पूरे मदनपुर, गुरुआ, आमस और रफीगंज क्षेत्र में सबसे पुराना और प्रतिष्ठित स्कूल था। इसी विद्यालय से पढ़कर कोल इंडिया के सीजीएम, जिला जज, मेजर, इंजीनियर, प्रोफेसर, लेखक, शिक्षक, अधिवक्ता समेत कई लोग उच्च पदों पर पहुंचे हैं। गयाजी औरंगाबाद के बच्चे यहां हॉस्टल में रहकर पढ़ते थे। आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बेरी अपनी पहचान खो रही है। हाई स्कूल के पास 22 एकड़ जमीन है। सरकार यहां डिग्री कॉलेज के साथ-साथ उपस्वास्थ्य केंद्र का पक्का भवन निर्माण करवाए जिला मुख्यालय से दूरी: 28 किलोमीटर खास पहचान: 1926 प्राइमरी - 2 एकड़, 1939 हाई स्कूल - 22+ एकड़, छात्रावास, मदार नदी तट पर भूरहा मंदिर मुख्य मांग: डिग्री कॉलेज, उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन + अंदरूनी सड़क, नाली मुख्य समस्या: शिक्षा-स्वास्थ्य का अभाव, खेल मैदान में शौच, मंदिर परिसर में सुविधाओं का अभाव कनेक्टिविटी: मदनपुर मुख्यालय से 2 KM, सड़क मार्ग #BeriPanchayat #AurangabadBihar #Madanpur #SaveBeri #DegreeCollegeForBeri #EducationMatters #100YearsOfEducation #StudentsRights #BiharEducation #NoHealthCenter #NoLibrary #BasicFacilities #RuralDevelopment #NeglectedBeri
Madanpur, Aurangabad | Jul 17, 2026