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रानीगंज

3-4 महीने में ही दरक गई ₹8.13 लाख की नई पीसीसी सड़क, नगर पंचायत के निर्माण कार्य पर उठे सवाल
संवदिया न्यूज (अररिया) – बिहार
रानीगंज (अररिया)। नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत नगर पंचायत रानीगंज के वार्ड संख्या-07 में लगभग ₹8,13,500 की लागत से निर्मित पीसीसी (PCC) सड़क महज़ 3 से 4 महीने के भीतर ही जगह-जगह से दरकने लगी है। सड़क पर आई लंबी दरारों और किनारों के टूटने की तस्वीरों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
मौके पर दिखाई दे रही स्थिति के अनुसार सड़क के बीच और किनारों पर स्पष्ट दरारें पड़ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ था, लेकिन पहली ही बारिश और सामान्य आवागमन के बाद इसकी सतह टूटने लगी।
शिलापट्ट के अनुसार यह योजना "नगर पंचायत रानीगंज अंतर्गत वार्ड संख्या-07 में नगर मुख्यालय मुख्य सड़क से गुड्डू यादव के घर से मायानंद यादव के घर तक PCC सड़क निर्माण कार्य" के लिए स्वीकृत की गई थी। योजना की प्राक्कलित राशि ₹8,13,500 थी। शिलापट्ट के अनुसार इसका शिलान्यास मुख्य पार्षद श्रीमती रूपा देवी द्वारा किया गया था। इस अवसर पर उप मुख्य पार्षद श्रीमती सुभद्रा देवी, वार्ड पार्षद श्री बीरेन्द्र मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अतिथि उपस्थित थे।
निर्माण गुणवत्ता पर उठ रहे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राशि से बनने वाली सड़क से वर्षों तक टिकाऊ रहने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में कुछ ही महीनों में सड़क का क्षतिग्रस्त होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो सड़क इतनी जल्दी नहीं टूटती।
कार्यपालक पदाधिकारी से लेकर निर्माण एजेंसी तक पर उठ रहे सवाल
सड़क की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी, निर्माण एजेंसी (संवेदक) तथा निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी से जुड़े संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में अब तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी अधिकारी, अभियंता या संवेदक की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा नगर पंचायत रानीगंज से मांग की है कि सड़क निर्माण की तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता, मानकों की अनदेखी या किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाए।
योजना का विवरण (शिलापट्ट के अनुसार)
योजना: नगर पंचायत रानीगंज, वार्ड संख्या-07 में नगर मुख्यालय मुख्य सड़क से गुड्डू यादव के घर से मायानंद यादव के घर तक PCC सड़क निर्माण कार्य।
प्राक्कलित राशि: ₹8,13,500
विभाग: नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार

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3-4 महीने में ही दरक गई ₹8.13 लाख की नई पीसीसी सड़क, नगर पंचायत के निर्माण कार्य पर उठे सवाल संवदिया न्यूज (अररिया) – बिहार रानीगंज (अररिया)। नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत नगर पंचायत रानीगंज के वार्ड संख्या-07 में लगभग ₹8,13,500 की लागत से निर्मित पीसीसी (PCC) सड़क महज़ 3 से 4 महीने के भीतर ही जगह-जगह से दरकने लगी है। सड़क पर आई लंबी दरारों और किनारों के टूटने की तस्वीरों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। मौके पर दिखाई दे रही स्थिति के अनुसार सड़क के बीच और किनारों पर स्पष्ट दरारें पड़ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ था, लेकिन पहली ही बारिश और सामान्य आवागमन के बाद इसकी सतह टूटने लगी। शिलापट्ट के अनुसार यह योजना "नगर पंचायत रानीगंज अंतर्गत वार्ड संख्या-07 में नगर मुख्यालय मुख्य सड़क से गुड्डू यादव के घर से मायानंद यादव के घर तक PCC सड़क निर्माण कार्य" के लिए स्वीकृत की गई थी। योजना की प्राक्कलित राशि ₹8,13,500 थी। शिलापट्ट के अनुसार इसका शिलान्यास मुख्य पार्षद श्रीमती रूपा देवी द्वारा किया गया था। इस अवसर पर उप मुख्य पार्षद श्रीमती सुभद्रा देवी, वार्ड पार्षद श्री बीरेन्द्र मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अतिथि उपस्थित थे। निर्माण गुणवत्ता पर उठ रहे गंभीर सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राशि से बनने वाली सड़क से वर्षों तक टिकाऊ रहने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में कुछ ही महीनों में सड़क का क्षतिग्रस्त होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो सड़क इतनी जल्दी नहीं टूटती। कार्यपालक पदाधिकारी से लेकर निर्माण एजेंसी तक पर उठ रहे सवाल सड़क की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी, निर्माण एजेंसी (संवेदक) तथा निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी से जुड़े संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में अब तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी अधिकारी, अभियंता या संवेदक की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। जांच और कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा नगर पंचायत रानीगंज से मांग की है कि सड़क निर्माण की तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता, मानकों की अनदेखी या किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित संवेदक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाए। योजना का विवरण (शिलापट्ट के अनुसार) योजना: नगर पंचायत रानीगंज, वार्ड संख्या-07 में नगर मुख्यालय मुख्य सड़क से गुड्डू यादव के घर से मायानंद यादव के घर तक PCC सड़क निर्माण कार्य। प्राक्कलित राशि: ₹8,13,500 विभाग: नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार #Raniganj #RaniganjNagarPanchayat #Ward07 #Araria #Bihar #BiharNews #ArariaNews #PCCRoad #RoadConstruction #RoadQuality #NagarPanchayat #UrbanDevelopment #PublicMoney #Development #Investigation #BreakingNews #LocalNews #संवदिया_न्यूज #रानीगंज #नगर_पंचायत #अररिया #बिहार #सड़क_निर्माण #पीसीसी_सड़क #गुणवत्ता #जांच_की_मांग #भ्रष्टाचार #विकास_की_पोल #Follow #Followers

Raniganj, Araria | Aug 4, 2026

सरफ़रोशी की तमन्ना लेकर फाँसी के फंदे को चूमने वाले अमर क्रांतिकारी – राम प्रसाद बिस्मिल

अगस्त वीर गाथा – 3 अगस्त

संवदिया न्यूज़ डेस्क की प्रस्तुति

अगस्त माह हमारे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीर गाथाओं का प्रतीक है।
संवदिया न्यूज़ इस पूरे माह उन महान क्रांतिकारियों और राष्ट्रनायकों की अमर गाथाएँ आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिनके त्याग, बलिदान और अदम्य साहस ने भारत की स्वतंत्रता की नींव रखी। आज की वीर गाथा के नायक हैं—अमर क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास वीर सपूतों के अदम्य साहस और बलिदान से भरा पड़ा है। इन्हीं अमर क्रांतिकारियों में एक नाम है पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, जिन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारत माता की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि महान कवि, लेखक और संगठनकर्ता भी थे। उनकी लेखनी और उनकी बंदूक—दोनों का लक्ष्य एक ही था, भारत की स्वतंत्रता।

11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में जन्मे राम प्रसाद बिस्मिल बचपन से ही तेजस्वी, स्वाभिमानी और राष्ट्रभक्त थे। आर्य समाज के विचारों और स्वामी दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। युवावस्था में उन्होंने अंग्रेज़ी शासन के अत्याचारों को देखा और यह संकल्प लिया कि वे भारत को स्वतंत्र कराकर ही दम लेंगे।

देश की आज़ादी के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने साथियों के साथ हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) को मजबूत किया। संगठन को चलाने और हथियार खरीदने के लिए धन की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से 9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन एक्शन को अंजाम दिया गया। यह घटना अंग्रेज़ी शासन की नींव हिलाने वाली साबित हुई। इस अभियान में राम प्रसाद बिस्मिल के साथ अशफाकउल्ला ख़ाँ, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह सहित कई क्रांतिकारी शामिल थे।

काकोरी कांड के बाद अंग्रेज़ सरकार ने व्यापक कार्रवाई शुरू की। अनेक क्रांतिकारी गिरफ्तार हुए और लंबा मुकदमा चला। अंततः राम प्रसाद बिस्मिल को फाँसी की सज़ा सुनाई गई। जेल में भी उनका मनोबल अडिग रहा। उन्होंने अनेक प्रेरक रचनाएँ लिखीं और अपने साथियों का उत्साह बढ़ाते रहे।

19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में राम प्रसाद बिस्मिल हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए। कहा जाता है कि अंतिम समय तक उनके मुख पर मुस्कान थी और वे भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् का उद्घोष कर रहे थे। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।

राम प्रसाद बिस्मिल का नाम "सरफ़रोशी की तमन्ना" जैसी अमर क्रांतिकारी भावना से जुड़ गया। यह पंक्ति आज भी हर भारतीय के भीतर देशभक्ति और त्याग का जज़्बा जगाती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता।

आज जब हम अगस्त वीर गाथा की इस तीसरी कड़ी में अमर क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल को स्मरण कर रहे हैं, तो आइए उनके साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन का आदर्श बनाने का संकल्प लें।

संवदिया न्यूज़ भारत माता के इस अमर सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

अमर क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को शत-शत नमन।
वंदे मातरम्। जय हिन्द।

सरफ़रोशी की तमन्ना लेकर फाँसी के फंदे को चूमने वाले अमर क्रांतिकारी – राम प्रसाद बिस्मिल

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सरफ़रोशी की तमन्ना लेकर फाँसी के फंदे को चूमने वाले अमर क्रांतिकारी – राम प्रसाद बिस्मिल अगस्त वीर गाथा – 3 अगस्त संवदिया न्यूज़ डेस्क की प्रस्तुति अगस्त माह हमारे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीर गाथाओं का प्रतीक है। संवदिया न्यूज़ इस पूरे माह उन महान क्रांतिकारियों और राष्ट्रनायकों की अमर गाथाएँ आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिनके त्याग, बलिदान और अदम्य साहस ने भारत की स्वतंत्रता की नींव रखी। आज की वीर गाथा के नायक हैं—अमर क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास वीर सपूतों के अदम्य साहस और बलिदान से भरा पड़ा है। इन्हीं अमर क्रांतिकारियों में एक नाम है पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, जिन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारत माता की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि महान कवि, लेखक और संगठनकर्ता भी थे। उनकी लेखनी और उनकी बंदूक—दोनों का लक्ष्य एक ही था, भारत की स्वतंत्रता। 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में जन्मे राम प्रसाद बिस्मिल बचपन से ही तेजस्वी, स्वाभिमानी और राष्ट्रभक्त थे। आर्य समाज के विचारों और स्वामी दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। युवावस्था में उन्होंने अंग्रेज़ी शासन के अत्याचारों को देखा और यह संकल्प लिया कि वे भारत को स्वतंत्र कराकर ही दम लेंगे। देश की आज़ादी के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने साथियों के साथ हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) को मजबूत किया। संगठन को चलाने और हथियार खरीदने के लिए धन की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से 9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन एक्शन को अंजाम दिया गया। यह घटना अंग्रेज़ी शासन की नींव हिलाने वाली साबित हुई। इस अभियान में राम प्रसाद बिस्मिल के साथ अशफाकउल्ला ख़ाँ, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह सहित कई क्रांतिकारी शामिल थे। काकोरी कांड के बाद अंग्रेज़ सरकार ने व्यापक कार्रवाई शुरू की। अनेक क्रांतिकारी गिरफ्तार हुए और लंबा मुकदमा चला। अंततः राम प्रसाद बिस्मिल को फाँसी की सज़ा सुनाई गई। जेल में भी उनका मनोबल अडिग रहा। उन्होंने अनेक प्रेरक रचनाएँ लिखीं और अपने साथियों का उत्साह बढ़ाते रहे। 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में राम प्रसाद बिस्मिल हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए। कहा जाता है कि अंतिम समय तक उनके मुख पर मुस्कान थी और वे भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् का उद्घोष कर रहे थे। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। राम प्रसाद बिस्मिल का नाम "सरफ़रोशी की तमन्ना" जैसी अमर क्रांतिकारी भावना से जुड़ गया। यह पंक्ति आज भी हर भारतीय के भीतर देशभक्ति और त्याग का जज़्बा जगाती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता। आज जब हम अगस्त वीर गाथा की इस तीसरी कड़ी में अमर क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल को स्मरण कर रहे हैं, तो आइए उनके साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन का आदर्श बनाने का संकल्प लें। संवदिया न्यूज़ भारत माता के इस अमर सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। अमर क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को शत-शत नमन। वंदे मातरम्। जय हिन्द। सरफ़रोशी की तमन्ना लेकर फाँसी के फंदे को चूमने वाले अमर क्रांतिकारी – राम प्रसाद बिस्मिल #संवदियान्यूज़ #Followers #बिहार #अररिया #रानीगंज #अगस्तवीरगाथा #रामप्रसादबिस्मिल #RamPrasadBismil #काकोरीकांड #सरफ़रोशीकीतमन्ना #भारतीयस्वतंत्रतासंग्राम #अमरक्रांतिकारी #देशभक्ति #वंदेमातरम् #जयहिंद #FreedomFighter #IndianFreedomStruggle #भारतकेवीर #भारतमाताकीजय

Raniganj, Araria | Aug 3, 2026

गया में पैसे की मांग को लेकर झारखंड के कोयला व्यापारी ने अपनाया अनोखा तरीका, एजेंट के घर के बाहर खटिया लेकर 15 दिनों से बैठे हुए हैं कहां जब तक नहीं मिलेंगे पैसे यही बैठे रहेंगे

गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र के रानीगंज गड़ेरिया गांव में करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन का विवाद अब सड़क पर आ गया है। झारखंड के चतरा निवासी कोयला कारोबारी धर्मेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना सिंह पिछले 15 दिनों से कोयला एजेंट संतोष कुमार अग्रवाल के घर के बाहर खटिया डालकर बैठे हैं। उनका दावा है कि कारोबार के दौरान उनके 4 करोड़ 61 लाख रुपये बकाया हैं और कई बार मांग के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। उनका कहना है कि जब तक पूरी राशि नहीं मिलती, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे।

धर्मेंद्र सिंह का यह भी दावा है कि दोनों पक्षों के बीच पहले लिखित समझौते हुए थे, लेकिन उसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा की मुझे जल्द पैसो की जरुरत है, हमने बैंक से पैसे लिए थे, पैसे नहीं देने  पर बैंक लगातार दबाव डाल रहा है.जबकि वें घर से फरार चल रहे है, हमसे मुलाकार भी नहीं कर रहे है. 

वहीं, संतोष कुमार अग्रवाल की पत्नी सरिता देवी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यदि किसी तरह का लेन-देन विवाद है तो उसका समाधान केवल न्यायालय और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा। उन्होंने कहा कि परिवार किसी भी तरह के दबाव में आकर कोई फैसला नहीं करेगा और पिछले 15 दिनों से घर के बाहर धरना दिए जाने से परिवार मानसिक तनाव झेल रहा है, उन्होंने कहाँ की मेरे पति बाहर गए हुए है.उन्होंने आईजी से मिलकर भी अपने बातो को रखी है. 

इधर, गया के एसएसपी सुशील कुमार ने कहा कि यदि किसी को बकाया राशि को लेकर शिकायत है तो स्थानीय थाने में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए। बिना अनुमति किसी के घर के बाहर बैठना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि एसडीपीओ को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं और प्राप्त शिकायत के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल करोड़ों रुपये के इस विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। अब सबकी नजर पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।
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गया में पैसे की मांग को लेकर झारखंड के कोयला व्यापारी ने अपनाया अनोखा तरीका, एजेंट के घर के बाहर खटिया लेकर 15 दिनों से बैठे हुए हैं कहां जब तक नहीं मिलेंगे पैसे यही बैठे रहेंगे गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र के रानीगंज गड़ेरिया गांव में करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन का विवाद अब सड़क पर आ गया है। झारखंड के चतरा निवासी कोयला कारोबारी धर्मेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना सिंह पिछले 15 दिनों से कोयला एजेंट संतोष कुमार अग्रवाल के घर के बाहर खटिया डालकर बैठे हैं। उनका दावा है कि कारोबार के दौरान उनके 4 करोड़ 61 लाख रुपये बकाया हैं और कई बार मांग के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। उनका कहना है कि जब तक पूरी राशि नहीं मिलती, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। धर्मेंद्र सिंह का यह भी दावा है कि दोनों पक्षों के बीच पहले लिखित समझौते हुए थे, लेकिन उसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा की मुझे जल्द पैसो की जरुरत है, हमने बैंक से पैसे लिए थे, पैसे नहीं देने पर बैंक लगातार दबाव डाल रहा है.जबकि वें घर से फरार चल रहे है, हमसे मुलाकार भी नहीं कर रहे है. वहीं, संतोष कुमार अग्रवाल की पत्नी सरिता देवी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यदि किसी तरह का लेन-देन विवाद है तो उसका समाधान केवल न्यायालय और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा। उन्होंने कहा कि परिवार किसी भी तरह के दबाव में आकर कोई फैसला नहीं करेगा और पिछले 15 दिनों से घर के बाहर धरना दिए जाने से परिवार मानसिक तनाव झेल रहा है, उन्होंने कहाँ की मेरे पति बाहर गए हुए है.उन्होंने आईजी से मिलकर भी अपने बातो को रखी है. इधर, गया के एसएसपी सुशील कुमार ने कहा कि यदि किसी को बकाया राशि को लेकर शिकायत है तो स्थानीय थाने में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए। बिना अनुमति किसी के घर के बाहर बैठना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि एसडीपीओ को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं और प्राप्त शिकायत के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल करोड़ों रुपये के इस विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। अब सबकी नजर पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है। #latestnewsgaya #गया #गयाजी #viralreels #viralvideoシ #bodhgayanews #bodhgayabiharsarif #imamganj #raniganjbazar #रानीगंज #CrimeNews #jharkhand #chatrajharkhand

Gaya Town CD Block, Gaya | Jun 28, 2026

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