पडकुला 48 लाख का मुक्तिधाम या भ्रष्टाचार का स्मारक?
पडकुला में सरकारी रिकॉर्ड में बना अंत्येष्टि स्थल, जमीन पर पहुंचने का रास्ता तक नहीं!
जनपद जालौन में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
माधौगढ़ ब्लाक की ग्राम पंचायत पडकुला (LGD Code 68941) में बनाए गए अंत्येष्टि स्थल को लेकर ग्रामीणों और मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम ने कई सवाल उठाए हैं।
मेरी पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार Antesthi Sthal Ka Nirman नाम से दर्ज इस कार्य की अनुमानित लागत ₹48 लाख दिखाई गई है। रिकॉर्ड में ₹25,66,250 व्यय भी दर्ज है।
वहीं भुगतान विवरण में अलग-अलग मदों में ठेकेदार/सप्लायर सहित अन्य भुगतान दर्ज दिखाई दे रहे हैं।
यानी सरकारी पोर्टल पर काम और भुगतान का पूरा हिसाब नजर आ रहा है, लेकिन मौके की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल—अंत्येष्टि स्थल तक रास्ता कहां है?
मौके पर पहुंची टीम के अनुसार अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता नजर नहीं आया।
बरसात के मौसम में आसपास खेतों में पानी और घास-फूस के बीच पत्रकारों की टीम को भी बेहद कठिनाई से मौके तक पहुंचना पड़ा।
टीम को तार की फेंसिंग, खेतों की मेड़ों और पानी भरे रास्तों के बीच से होकर जाना पड़ा।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो शव को इस अंत्येष्टि स्थल तक आखिर ले जाया कैसे जाएगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण आज भी मजबूरी में अपने-अपने खेतों या पुराने स्थानों पर अंतिम संस्कार करते हैं।
यदि यह स्थिति सही है तो इतनी बड़ी धनराशि खर्च करके बनाया गया अंत्येष्टि स्थल आखिर किस उपयोग के लिए है?
निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल
मौके पर निर्माण में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। करीब 40–48 लाख रुपये की लागत वाले कार्य में यदि निर्माण कुछ ही समय में खराब होने लगे तो उसकी गुणवत्ता की जांच की आवश्यकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिकॉर्ड में निर्माण कार्य Completion of work यानी पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि जमीनी स्थिति और उपयोगिता को लेकर सवाल बने हुए हैं।
भुगतान के रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल
पोर्टल के स्क्रीनशॉट में MS FOUJI CONTRACTER AND SUPPLAYER के नाम से कई भुगतान दिखाई दे रहे हैं। एक भुगतान ₹10,05,515, दूसरा ₹2,50,000, इसके अलावा ₹1,00,000, ₹4,50,000 और अन्य भुगतान भी रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं।
एक अन्य प्रविष्टि में ₹24,360 इंजीनियर के नाम से दर्ज है।
अब सवाल यह है कि कुल कितना भुगतान हुआ, किस-किस मद में हुआ, कौन-कौन से कार्य कराए गए और मौके पर वास्तव में कितना निर्माण हुआ?
इन सभी बिंदुओं की तकनीकी एवं वित्तीय जांच ही तस्वीर साफ कर सकती है।
सवाल सीधे जिम्मेदारों से
₹48 लाख की अनुमानित लागत क्यों?
अंत्येष्टि स्थल तक पक्का रास्ता क्यों नहीं?
निर्माण पूरा दिखाने के बाद भी स्थल उपयोगी क्यों नहीं?
निर्माण में दरारें क्यों आईं?
भुगतान की अलग-अलग किस्तों का पूरा विवरण क्या है?
क्या कार्य का तकनीकी सत्यापन और गुणवत्ता जांच हुई?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया?
यह खबर उपलब्ध सरकारी पोर्टल के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति पर आधारित सवालों को सामने रखती है।
भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम विभाग की जांच के बाद ही होगी।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी धन के एक-एक रुपये का हिसाब सामने लाता है या फिर फाइलों में काम पूरा लिखकर मामला बंद कर दिया जाता है।
वीडियो को अंत तक जरूर देखें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय बताएं—क्या आपके गांव में भी अंत्येष्टि स्थल बना है?
अगर बना है तो उसकी हालत कैसी है?
और आपके आसपास किसी सरकारी निर्माण में गड़बड़ी है तो हमें जानकारी दें।
₹48 लाख के अंत्येष्टि स्थल पर उठ रहे सवालों पर @जालौन_प्रशासन संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए—आखिर सरकारी धन का हिसाब कौन देगा?
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Jalaun, Jalaun | Aug 12, 2026