लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देकर वर्णिता संस्था ने राष्ट्रसेवा में योगदान को किया याद
सुमेरपुर कस्बे में 'विमर्श विविधा' कार्यक्रम के अंतर्गत 'जिनका देश ऋणी है' श्रृंखला में डॉ. भवानीदीन ने तिलक के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को स्मरण किया
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक सच्चे राष्ट्रवादी नेता एवं उग्रवादी आंदोलन के प्रणेता थे
उनका प्रसिद्ध उद्घोष "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है
तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था
उन्होंने स्वदेशी, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तथा राष्ट्रीय शिक्षा के आंदोलन को नई दिशा दी और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल की कठिन यातनाएं भी झेलीं
1 अगस्त 1920 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके विचार आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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