‘मौत के अंडरपास’ का कब निकलेगा स्थायी समाधान?
स्कूल जाते बच्चे डूबे, स्थानीय लोगों ने बचाई जान
फरीदाबाद के सागरपुर से झाझरू जाने वाला रेलवे अंडरपास बारिश होते ही रास्ता कम और ‘तालाब’ ज्यादा नजर आने लगता है। हर बरसात में अंडरपास के अंदर करीब 5 से 7 फीट तक पानी भर जाता है। इसके कारण आसपास के गांवों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने जाने वाले हजारों लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 15 दिन पहले स्कूल जा रहे कुछ बच्चे अंडरपास में भरे गहरे पानी में फंसकर डूबने लगे थे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और जैसे-तैसे उन्हें पानी से सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। गनीमत रही कि समय रहते मदद मिल गई, वरना बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
बारिश आई नहीं कि रास्ते पर लग जाता है ‘ताला’
बताया जा रहा है कि इस रेलवे अंडरपास से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन कर्मचारियों और मजदूरों की है, जो आसपास स्थित कंपनियों और फैक्ट्रियों में काम करने जाते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में अंडरपास में इतना पानी भर जाता है कि यहां से पैदल निकलना तो दूर, वाहन लेकर गुजरना भी खतरे से खाली नहीं रहता।
अधिक बारिश होने पर प्रशासन को अंडरपास पूरी तरह बंद करना पड़ता है। इसके बाद लोगों को अपने काम पर पहुंचने के लिए करीब 7 से 8 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे उनका समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं।
सवाल—हादसे के बाद जागेगा प्रशासन या पहले?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। प्रत्येक बरसात में अंडरपास पानी से लबालब हो जाता है, लेकिन जल निकासी का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। स्कूली बच्चों के साथ हुई घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से अंडरपास में प्रभावी जल निकासी व्यवस्था कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं या समय रहते इस ‘मौत के अंडरपास’ का स्थायी समाधान निकाला जाएगा?
Panipat, Panipat | Aug 5, 2026