भीलवाड़ा। ब्राह्मणत्व कोई जाति नहीं, बल्कि कर्तव्य और विवेक का उपनाम है, जिसकी दृष्टि आकाश जितनी व्यापक और हृदय सागर जितना उदार होता है। यह विचार पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य परंपरा के आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने व्यक्त किए। गुरुदेव दो दिवसीय ‘आरोहण नायक प्रशिक्षण शिविर’ के दूसरे सत्र में विप्र फाउंडेशन के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।