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Nushrat Bharucha के Mahakal Mandir जाने पर भड़के मौलाना‚ Hindu संतों का गुस्सा फूटा बोले....| Ujjain #NusratBharucha #M...

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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से दहला किशनपुर गांव, हत्या और आत्महत्या की आशंका,

मुरैना जिले के किशनपुर गांव में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद गांव में शोक और दहशत का माहौल है।
प्रारंभिक पुलिस जानकारी के अनुसार, बलराम सिंह कुशवाहा पर अपनी पत्नी रविता कुशवाहा तथा दोनों मासूम पुत्रों आरव (8) और देबू (5) की धारदार हथियार से हत्या करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद बलराम सिंह कुशवाहा का शव शिकारपुर रेलवे फाटक के पास मिला। प्रथम दृष्टया मामला ट्रेन के सामने आकर आत्महत्या करने का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि कुछ दिन पूर्व किशनपुर गांव में आयोजित भागवत भंडारे के दौरान हुए विवाद को घटना के संभावित कारणों में देखा जा रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस संबंध में किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, वरिष्ठ अधिकारी एवं एफएसएल टीम मौके पर पहुंच गई। मुख्यालय डीएसपी विजय भदौरिया ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है।

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है और लोग स्तब्ध हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से दहला किशनपुर गांव, हत्या और आत्महत्या की आशंका, मुरैना जिले के किशनपुर गांव में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद गांव में शोक और दहशत का माहौल है। प्रारंभिक पुलिस जानकारी के अनुसार, बलराम सिंह कुशवाहा पर अपनी पत्नी रविता कुशवाहा तथा दोनों मासूम पुत्रों आरव (8) और देबू (5) की धारदार हथियार से हत्या करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद बलराम सिंह कुशवाहा का शव शिकारपुर रेलवे फाटक के पास मिला। प्रथम दृष्टया मामला ट्रेन के सामने आकर आत्महत्या करने का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि कुछ दिन पूर्व किशनपुर गांव में आयोजित भागवत भंडारे के दौरान हुए विवाद को घटना के संभावित कारणों में देखा जा रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस संबंध में किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, वरिष्ठ अधिकारी एवं एफएसएल टीम मौके पर पहुंच गई। मुख्यालय डीएसपी विजय भदौरिया ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है और लोग स्तब्ध हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

Parliament Street, New Delhi | Jun 27, 2026

टेक्स्टबुक्स में मिली गलतियों को ठीक करने के लिए SCERT की 14 सिफारिशों को लागू किया जाएगा।

टेक्स्टबुक्स में मिली गलतियों को ठीक करने के लिए SCERT की 14 सिफारिशों को लागू किया जाएगा।

Parliament Street, New Delhi | Jun 27, 2026

Breaking News: रीछ ने महिला पर किया जानलेवा हमला | टॉडगढ़ की बड़ी खबर।।

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Parliament Street, New Delhi | Jun 27, 2026

Karbala History: वह 10 Muharram की आख़िरी शाम... | कर्बला का दर्द भरा इतिहास | Imam Hussain

"72 प्यासे और 33,000 की जालिम फ़ौज... जब कर्बला की रेत खून से लाल हो गई!" 💔😭

नाज़रीन, इंसानी इतिहास (History) में बहुत सी जंगें लड़ी गईं, लेकिन सन 61 हिजरी को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान में जो हुआ, उसकी मिसाल कयामत तक नहीं मिल सकती। 10 मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा)... वो दिन जब नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए अपना पूरा कुनबा कुर्बान कर दिया।

क्या थी कर्बला की वो दर्दनाक दास्तान? 👇

एक तरफ दमिश्क का जालिम हुक्मरान यजीद था, जिसके पास ताकत थी, लाखों की फौज थी और गुरूर था। वो चाहता था कि इमाम हुसैन उसके आगे सर झुका दें। लेकिन इमाम हुसैन (अ.स.), जो हज़रत अली के लाल और बीवी फातिमा के चैन थे, उन्होंने साफ कह दिया— "मुझ जैसा शख्स यजीद जैसे बदकिरदार की बैअत कभी नहीं कर सकता।"

7 मोहर्रम से नहर-ए-फुरात पर पहरा लगा दिया गया। तीन दिन तक इमाम का पूरा कुनबा, छोटे-छोटे बच्चे भूख और प्यास से तड़पते रहे। ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिए...

जब 6 महीने के मासूम अली असगर को पानी के बदले गले पर तीर लगा होगा, तो एक बाप के दिल पर क्या गुज़री होगी?

जब भाई अब्बास के दोनों बाजू काट दिए गए होंगे, तो हुसैन की कमर कैसे टूटी होगी?

जवान बेटे अली अकबर और भाई के लाल कासिम की लाशों को जब इमाम अकेले खैमे तक लाए होंगे, तो मंज़र क्या रहा होगा?

और फिर आया 10 मोहर्रम की असर (शाम) का वक्त... इमाम हुसैन बिल्कुल तन्हा थे, बदन पर सैकड़ों ज़ख्म थे। उन्होंने आखिरी नमाज़ के लिए सिज्दे में सर रखा... और उसी हालत में जालिम शूमर ने उनका सर तन से जुदा कर दिया।

हुसैन ने सर तो कटा दिया, लेकिन इस्लाम के परचम को कभी झुकने नहीं दिया! यजीद जंग जीतकर भी तारीख के पन्नों में हमेशा के लिए मिट गया और जलील हो गया, लेकिन इमाम हुसैन आज भी हर इंसाफ पसंद इंसान के दिल पर राज कर रहे हैं।

इसी दर्द भरे और रूह कंपा देने वाले इतिहास को हमने बेहद अदब और जज्बात के साथ इस वीडियो में समेटा है। एक बार इस इतिहास को पूरा ज़रूर सुनिए, आपकी आँखों से आँसू रुकेंगे नहीं।

#WaqiaeKarbala #ImamHussain #Muharram2026 #10Muharram #YaHussain #KarbalaHistory #IslamicHistory #Ashura

Karbala History: वह 10 Muharram की आख़िरी शाम... | कर्बला का दर्द भरा इतिहास | Imam Hussain "72 प्यासे और 33,000 की जालिम फ़ौज... जब कर्बला की रेत खून से लाल हो गई!" 💔😭 नाज़रीन, इंसानी इतिहास (History) में बहुत सी जंगें लड़ी गईं, लेकिन सन 61 हिजरी को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान में जो हुआ, उसकी मिसाल कयामत तक नहीं मिल सकती। 10 मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा)... वो दिन जब नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए अपना पूरा कुनबा कुर्बान कर दिया। क्या थी कर्बला की वो दर्दनाक दास्तान? 👇 एक तरफ दमिश्क का जालिम हुक्मरान यजीद था, जिसके पास ताकत थी, लाखों की फौज थी और गुरूर था। वो चाहता था कि इमाम हुसैन उसके आगे सर झुका दें। लेकिन इमाम हुसैन (अ.स.), जो हज़रत अली के लाल और बीवी फातिमा के चैन थे, उन्होंने साफ कह दिया— "मुझ जैसा शख्स यजीद जैसे बदकिरदार की बैअत कभी नहीं कर सकता।" 7 मोहर्रम से नहर-ए-फुरात पर पहरा लगा दिया गया। तीन दिन तक इमाम का पूरा कुनबा, छोटे-छोटे बच्चे भूख और प्यास से तड़पते रहे। ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिए... जब 6 महीने के मासूम अली असगर को पानी के बदले गले पर तीर लगा होगा, तो एक बाप के दिल पर क्या गुज़री होगी? जब भाई अब्बास के दोनों बाजू काट दिए गए होंगे, तो हुसैन की कमर कैसे टूटी होगी? जवान बेटे अली अकबर और भाई के लाल कासिम की लाशों को जब इमाम अकेले खैमे तक लाए होंगे, तो मंज़र क्या रहा होगा? और फिर आया 10 मोहर्रम की असर (शाम) का वक्त... इमाम हुसैन बिल्कुल तन्हा थे, बदन पर सैकड़ों ज़ख्म थे। उन्होंने आखिरी नमाज़ के लिए सिज्दे में सर रखा... और उसी हालत में जालिम शूमर ने उनका सर तन से जुदा कर दिया। हुसैन ने सर तो कटा दिया, लेकिन इस्लाम के परचम को कभी झुकने नहीं दिया! यजीद जंग जीतकर भी तारीख के पन्नों में हमेशा के लिए मिट गया और जलील हो गया, लेकिन इमाम हुसैन आज भी हर इंसाफ पसंद इंसान के दिल पर राज कर रहे हैं। इसी दर्द भरे और रूह कंपा देने वाले इतिहास को हमने बेहद अदब और जज्बात के साथ इस वीडियो में समेटा है। एक बार इस इतिहास को पूरा ज़रूर सुनिए, आपकी आँखों से आँसू रुकेंगे नहीं। #WaqiaeKarbala #ImamHussain #Muharram2026 #10Muharram #YaHussain #KarbalaHistory #IslamicHistory #Ashura

Parliament Street, New Delhi | Jun 26, 2026

सिरमौर: अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर जिला सिरमौर में चलाई गई एंटी-चिट्टा ड्राइव, जनता को किया जागरूक, सुनिए क्या बोली DC प्रियंका वर्मा

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Parliament Street, New Delhi | Jun 26, 2026

Nushrat Bharucha के Mahakal Mandir जाने पर भड़के मौलाना‚ Hindu संतों का गुस्सा फूटा बोले....| Ujjain #NusratBharucha #M... - Parliament Street News