जिला पदाधिकारी ने तरियानी प्रखंड में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत निर्मित तालाबों का किया स्थल निरीक्षण,
जल संरक्षण संरचनाओं की उपयोगिता, गुणवत्ता एवं रखरखाव पर विशेष जोर; संबंधित पदाधिकारियों को नियमित अनुश्रवण के निर्देश,
शिवहर जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी द्वारा आज तरियानी प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत निर्मित तालाबों का स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए निर्मित इन संरचनाओं की वर्तमान स्थिति, उपयोगिता तथा कार्यों की गुणवत्ता का जायजा लेना था।उल्लेखनीय है कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत “नए जल स्रोतों का सृजन एवं अधिशेष (Surplus) नदी जल क्षेत्र से जल की कमी (Deficit) वाले क्षेत्रों में जल ले जाना” जैसे उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब एवं पोखरों का निर्माण कराया जा रहा है। तरियानी प्रखंड में ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित इन योजनाओं के तहत निजी एवं अन्य चिह्नित भूमि पर पोखर खुदाई के कार्य किए गए हैं।
निरीक्षण के क्रम में जिला पदाधिकारी द्वारा तालाबों में जल संचयन की स्थिति, तालाब की संरचना, उसके आसपास की स्थिति तथा स्थानीय स्तर पर उसकी उपयोगिता का अवलोकन किया गया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की संरचनाओं का निर्माण केवल योजना पूर्ण करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि उनसे वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल स्तर में सुधार, स्थानीय जल आवश्यकता की पूर्ति तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों की वास्तविक प्राप्ति हो।
तरियानी प्रखंड में निरीक्षण से संबंधित प्रमुख तालाब/पोखर योजनाओं में अठकोनी पंचायत अंतर्गत गरम बराही में योगेंद्र राय की जमीन में पोखर खुदाई, छतौनी पंचायत के वार्ड संख्या-05 में अरधन्ना देवी की जमीन में पोखर खुदाई तथा छतौनी वार्ड संख्या-14 में ईश्वर दयाल राय की जमीन में पोखर खुदाई कार्य शामिल हैं।
इसी प्रकार नरवारा पंचायत के वार्ड संख्या-01 में इंदु देवी/अवधेश सिंह की जमीन में पोखर खुदाई तथा नरवारा में लोकेश कुमार की जमीन में पोखर खुदाई का कार्य कराया गया है। पोजहिया पंचायत अंतर्गत ग्राम पचरा, वार्ड संख्या-11 में प्रकाश कुमार की जमीन में पोखर खुदाई भी इस योजना के अंतर्गत की गई है।
जिला पदाधिकारी ने गहण निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत निर्मित सभी जल संरचनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन एवं अनुश्रवण किया जाए। तालाबों की जलधारण क्षमता लंबे समय तक बनी रहे, इसके लिए उनके रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्मित जल संरचनाओं का वास्तविक लाभ स्थानीय नागरिकों, किसानों एवं आसपास के क्षेत्र को प्राप्त हो।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण आज की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वर्षा के जल को संरक्षित कर भू-जल को पुनर्भरण करने में छोटे-बड़े तालाबों एवं अन्य जल स्रोतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत निर्मित संरचनाओं को पूरी तरह क्रियाशील एवं उपयोगी बनाए रखना आवश्यक है।
जिला पदाधिकारी द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को योजनाओं से संबंधित अभिलेखों एवं स्थल की स्थिति में एकरूपता सुनिश्चित करने तथा जहां भी रखरखाव अथवा आवश्यक सुधार की जरूरत हो, वहां नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति आम लोगों को जागरूक करने एवं निर्मित जल संरचनाओं के संरक्षण में स्थानीय सहभागिता को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
जिला प्रशासन, शिवहर द्वारा जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले में निर्मित एवं विकसित जल संरचनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि जल संरक्षण की प्रत्येक योजना स्थायी, गुणवत्तापूर्ण और जनोपयोगी परिसंपत्ति के रूप में विकसित हो तथा जिले में जल सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक परिणाम दे।