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आप सभी को नव संवत्सर की मंगलकामनाएं। यह पावन अवसर हर किसी के जीवन में हर्षोल्लास लेकर आए।

6.1k views | Lormi, Mungeli | Apr 13, 2021

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#Rajasthan IFS #Transfer #राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल! 69 IFS के #ट्रांसफर, 22 को 7 महीने बाद मिली पोस्टिंग

#राजस्थानसरकार ने देर रात #वनविभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 69 #आईएफएस अफसरों के तबादले और पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं।

इनमें आरएफएस से आईएफएस बने 22 अफसर भी शामिल हैं, जिन्हें प्रमोशन के करीब सात महीने बाद पोस्टिंग दी गई है। इसके अलावा 14 आईएफएस अफसरों को अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है। वन विभाग के मुखिया अरिजीत बनर्जी का पदनाम भी बदलकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स कर दिया गया है।

अरिजीत बनर्जी का बदला पदनाम
वन विभाग के प्रमुख अरिजीत बनर्जी के पदनाम में बदलाव किया गया है। अब उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक और हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स के नाम से जाना जाएगा। देश के कई राज्यों में वन विभाग के मुखिया के पदनाम में पहले ही बदलाव किया जा चुका है।

पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव विजय एन का तबादला कर उन्हें मुख्य वन संरक्षक, स्थापना, जयपुर के पद पर लगाया गया है। वहीं शैलजा देवल को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का सचिव बनाया गया है।

अनुराग भारद्वाज को पीसीसीएफ आईटी की जिम्मेदारी
प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराग भारद्वाज को पीसीसीएफ आईटी, राजस्थान बनाया गया है। वहीं अनूप के.आर. को जोधपुर से स्थानांतरित कर मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव एवं इको-टूरिज्म, जयपुर के पद पर लगाया गया है।

तीन एपीओ आईएफएस अफसरों को भी मिली पोस्टिंग
एपीओ चल रहे तीन आईएफएस अफसरों को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। शशि शंकर को वन संरक्षक, वन्यजीव, जोधपुर, गौरव गर्ग को उप वन संरक्षक, ई-गवर्नेंस, मुख्यालय, जयपुर और अक्षय जैन को सहायक वन संरक्षक, कार्यालय उप वन संरक्षक, भरतपुर के पद पर पोस्टिंग दी गई है।

14 आईएफएस अफसरों को अतिरिक्त चार्ज
सरकार ने 14 आईएफएस अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। इनमें शिखा मेहरा को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), जयपुर के साथ एमडी, राजस्थान राज्य वन विकास निगम लिमिटेड का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।

अनुराग भारद्वाज को पीसीसीएफ आईटी के साथ अध्यक्ष, राजस्थान जैव विविधता मंडल, जयपुर और मुख्य परियोजना निदेशक (ईएपी), जयपुर का अतिरिक्त चार्ज भी सौंपा गया है।

उदय शंकर को अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन एवं प्रशिक्षण), जयपुर, राजेश कुमार गुप्ता को अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (समन्वय), जयपुर और अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, श्रम विधि, जयपुर का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।

टी. जे. कविथा को सीईओ, कैंपा, जयपुर, विजय एन. को मुख्य वन संरक्षक (समन्वय), मुख्यालय, जयपुर और हनुमान राम को अतिरिक्त परियोजना निदेशक, राजस्थान फोरेस्ट्री एंड बायोडाइवर्सिटी प्रोजेक्ट, जयपुर का अतिरिक्त चार्ज मिला है।

इसके अलावा सुनील को मुख्य वन संरक्षक, उदयपुर, डॉ. टी. मोहन राज को मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), कोटा, आशुतोष ओझा को मुख्य वन संरक्षक, आईटी एवं ई-गवर्नेंस, जयपुर और अजय चित्तौड़ा को मुख्य वन संरक्षक, जोधपुर का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।

अशोक कुमार महरिया को संयुक्त परियोजना निदेशक, आयोजना एवं कार्यान्वयन, सीआरईएसईपी, जयपुर, सुदर्शन शर्मा को वन संरक्षक, कैंपा, जयपुर और आशीष व्यास को उप वन संरक्षक, वन्यजीव, चिड़ियाघर, जयपुर का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है।

@followers #RajasthanNews  #RajasthanTransfer #transfers 
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Lormi, Mungeli | Aug 11, 2026

#चावल #घोटाले के आरोपों पर मंत्री का पलटवार, कहा- 24 घंटे में सबूत दें नहीं तो #कानूनी #कार्रवाई होगी

आम आदमी पार्टी  #AAP ने #दिल्ली की रेखा गुप्ता (Rekha Gupta)  सरकार पर 22 हजार करोड़ रुपये के कथित चावल घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने इस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj) ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि सरकारी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका पैदा हुई है। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता संजीव झा (Sanjeev Jha) और कुलदीप कुमार (Kuldeep Kumar) भी मौजूद रहे।

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने AAP के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सिरसा ने आरोपों को झूठा और भ्रामक बताते हुए कहा कि सौरभ भारद्वाज को अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोप वापस नहीं लिए गए तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सिरसा ने कहा कि सरकार की छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाए गए निराधार आरोपों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मामला अदालत तक ले जाया जाएगा। उन्होंने सौरभ भारद्वाज से अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण पेश करने की भी मांग की।

मंत्री सिरसा ने AAP नेताओं को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी नेताओं सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि दिल्ली सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपये के कथित चावल घोटाले की योजना बनाई थी, जिसे 3 वर्षों तक चलाया जाना था। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में आंकड़े भी पेश किए और पूरे मामले की जांच की मांग की।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “सौरभ भारद्वाज और संजीव झा ने आज एक बार फिर मेरे खिलाफ बेबुनियाद, झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए हैं। इससे साफ पता चलता है कि वे मुझे बदनाम करना चाहते हैं और मेरी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह ईर्ष्या से भरा अभियान चलाना उनका तरीका हो सकता है, लेकिन अब बहुत हो चुका है।”

सिरसा ने आगे कहा कि वह सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को इन आरोपों को वापस लेने के लिए 24 घंटे का समय दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर आरोप वापस नहीं लिए गए तो वह उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने और अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे। सार्वजनिक जीवन में बिना सबूत किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती और ऐसे आरोप लगाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

क्या आरोप लगाए सौरभ ने?

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का दावा है कि यह मामला गरीबों के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल के उपयोग से जुड़ा है। सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो संदेश में कहा कि दिल्ली में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसकी रकम सुनकर लोगों के होश उड़ जाएंगे। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के माध्यम से राज्य सरकारों को बेहद रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराया जाता है। यह चावल उन गरीब, प्रवासी और दिहाड़ी मजदूर परिवारों के लिए होता है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और जिन्हें सरकारी योजनाओं के तहत खाद्यान्न सहायता दी जाती है।

AAP ने मंत्री सिरसा के विभाग पर साधा निशाना

AAP नेता का आरोप है कि दिल्ली  सरकार ने इस चावल को सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के बजाय पूर्वोत्तर भारत की एक कॉर्पोरेशन को देने की योजना बनाई। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है और इसी वजह से उन्होंने इसे 22 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का नाम दिया है। भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार गरीबों के हित में राज्यों को सब्सिडी पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती है ताकि उसे राशन के रूप में पात्र लोगों में वितरित किया जा सके। उनका आरोप है कि इस उद्देश्य से मिले चावल का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किया गया।

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल को एक बाहरी एजेंसी के जरिए निजी कंपनियों तक पहुंचाकर भारी मुनाफा कमाने की योजना बनाई गई थी। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कथित तौर पर असम की एक कॉर्पोरेशन के पक्ष में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) को पत्र लिखकर हर सप्ताह 31 हजार मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी। उनके अनुसार, यह चावल गरीबों, प्रवासी मजदूरों और राशन कार्ड से वंचित जरूरतमंद लोगों के लिए सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जाता है।

AAP नेता का दावा है कि इस व्यवस्था के तहत कई सप्ताह तक चावल की आपूर्ति जारी रही, लेकिन बाद में केंद्र सरकार के सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने मामले को पकड़ लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 हजार मीट्रिक टन चावल की साप्ताहिक आपूर्ति का मूल्य करीब 143 करोड़ रुपये बैठता है और इस प्रक्रिया से हर सप्ताह लगभग 70 करोड़ रुपये का लाभ कमाया जा रहा था। भारद्वाज ने कहा कि यदि यह व्यवस्था तीन वर्षों तक चलती रहती तो कथित घोटाले का आकार 22 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सब्सिडी पर खरीदे गए चावल को दिल्ली के गरीबों में वितरित करने के बजाय हरियाणा की एक निजी कंपनी को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। AAP ने इस मामले में सीधे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह विभाग दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के पास है और विभाग की ओर से ही FCI को संबंधित पत्र भेजा गया था।

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दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का दावा है कि यह मामला गरीबों के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल के उपयोग से जुड़ा है। सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो संदेश में कहा कि दिल्ली में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसकी रकम सुनकर लोगों के होश उड़ जाएंगे। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के माध्यम से राज्य सरकारों को बेहद रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराया जाता है। यह चावल उन गरीब, प्रवासी और दिहाड़ी मजदूर परिवारों के लिए होता है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और जिन्हें सरकारी योजनाओं के तहत खाद्यान्न सहायता दी जाती है। AAP ने मंत्री सिरसा के विभाग पर साधा निशाना AAP नेता का आरोप है कि दिल्ली सरकार ने इस चावल को सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के बजाय पूर्वोत्तर भारत की एक कॉर्पोरेशन को देने की योजना बनाई। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है और इसी वजह से उन्होंने इसे 22 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का नाम दिया है। भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार गरीबों के हित में राज्यों को सब्सिडी पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती है ताकि उसे राशन के रूप में पात्र लोगों में वितरित किया जा सके। उनका आरोप है कि इस उद्देश्य से मिले चावल का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किया गया। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल को एक बाहरी एजेंसी के जरिए निजी कंपनियों तक पहुंचाकर भारी मुनाफा कमाने की योजना बनाई गई थी। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कथित तौर पर असम की एक कॉर्पोरेशन के पक्ष में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) को पत्र लिखकर हर सप्ताह 31 हजार मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी। उनके अनुसार, यह चावल गरीबों, प्रवासी मजदूरों और राशन कार्ड से वंचित जरूरतमंद लोगों के लिए सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जाता है। AAP नेता का दावा है कि इस व्यवस्था के तहत कई सप्ताह तक चावल की आपूर्ति जारी रही, लेकिन बाद में केंद्र सरकार के सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने मामले को पकड़ लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 हजार मीट्रिक टन चावल की साप्ताहिक आपूर्ति का मूल्य करीब 143 करोड़ रुपये बैठता है और इस प्रक्रिया से हर सप्ताह लगभग 70 करोड़ रुपये का लाभ कमाया जा रहा था। भारद्वाज ने कहा कि यदि यह व्यवस्था तीन वर्षों तक चलती रहती तो कथित घोटाले का आकार 22 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सब्सिडी पर खरीदे गए चावल को दिल्ली के गरीबों में वितरित करने के बजाय हरियाणा की एक निजी कंपनी को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। AAP ने इस मामले में सीधे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह विभाग दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के पास है और विभाग की ओर से ही FCI को संबंधित पत्र भेजा गया था। @followers #delhi #DelhiNews #delhinewsupdates #delhinewstv #delhinewshindi #AAPDelhi #BJPDelhi #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 10, 2026

#पुरानीदिल्ली में फिर दौड़ सकती है ट्राम! 63 साल बाद रेखा सरकार की #ऐतिहासिक पहल, #पर्यटन और #परिवहन को मिलेगी रफ्तार

Delhi Trams May Run Again In Old Delhi: 63 साल बाद एक बार फिर पुरानी दिल्ली में ट्राम दौड़ सकती है। दिल्ली की रेखा गुप्ता  सरकार पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में 63 साल बाद ट्रैकलेस ट्राम सेवा शुरू करने की योजना पर सरकार विचार कर रही है। इस बार ट्राम के लिए सड़क पर अलग से ट्रैक बिछाने के बजाय ट्रैकलेस ट्राम चलाने का प्रस्ताव है। इसके चलने से ऐतिहासिक क्षेत्रों में पर्यटन और संकरी सड़कों पर परिवहन को रफ्तार मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इस तरह की ट्राम पुरानी दिल्ली की संकरी और घुमावदार सड़कों के अनुरूप अधिक आसानी से संचालित की जा सकती है। योजना को लेकर सरकार ने विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद रूट, आकार, क्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं का प्रारूप तैयार किया जाएगा।
शुरुआती चरण में विपरीत दिशाओं में दो ट्राम चलाने का विकल्प भी देखा जा रहा है। इसकी गति अन्य सड़क वाहनों की तुलना में कम रखे जाने की संभावना है, ताकि भीड़भाड़ वाले इलाके में यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा बनी रहे।सरकार की योजना के अनुसार ट्राम का संचालन फिलहाल पुरानी दिल्ली तक सीमित रखा जाएगा। इसका अंतिम रूट अभी तय नहीं हुआ है। ट्राम में कितनी सीटें होंगी, इसका आकार कितना होगा और किन सड़कों से इसे गुजारा जाएगा, इन सभी बिंदुओं पर अध्ययन के बाद निर्णय लिया जाएगा।
6 मार्च 1908 को हुई थी दिल्ली में ट्राम सेवा की शुरुआत

दिल्ली में ट्राम सेवा की शुरुआत 6 मार्च 1908 को हुई थी। करीब 55 वर्षों तक चलने के बाद दिसंबर 1963 में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली में ट्राम को दोबारा शुरू करने की चर्चा समय-समय पर होती रही।
2014 में हुई थी दोबारा शुरुआत की कोशिश

वर्ष 2014 में तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग के कार्यकाल में इसे फिर शुरू करने का प्रमुख प्रयास किया गया था। हालांकि, उस समय योजना आगे नहीं बढ़ सकी। ट्राम के लिए अलग ट्रैक तैयार करने में सामने आई तकनीकी अड़चनें इसके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बनीं। पुरानी दिल्ली के व्यस्त और सीमित सड़क स्थान में ट्रैक बिछाने तथा उसके संचालन को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां थीं। इसी वजह से ट्राम को दोबारा शुरू करने की योजना अमल में नहीं आ सकी। अब एक बार फिर दिल्ली की नई बीजेपी सरकार ट्राम सेवा करने की ऐतिहासिक पहल की है।

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#पुरानीदिल्ली में फिर दौड़ सकती है ट्राम! 63 साल बाद रेखा सरकार की #ऐतिहासिक पहल, #पर्यटन और #परिवहन को मिलेगी रफ्तार Delhi Trams May Run Again In Old Delhi: 63 साल बाद एक बार फिर पुरानी दिल्ली में ट्राम दौड़ सकती है। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में 63 साल बाद ट्रैकलेस ट्राम सेवा शुरू करने की योजना पर सरकार विचार कर रही है। इस बार ट्राम के लिए सड़क पर अलग से ट्रैक बिछाने के बजाय ट्रैकलेस ट्राम चलाने का प्रस्ताव है। इसके चलने से ऐतिहासिक क्षेत्रों में पर्यटन और संकरी सड़कों पर परिवहन को रफ्तार मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस तरह की ट्राम पुरानी दिल्ली की संकरी और घुमावदार सड़कों के अनुरूप अधिक आसानी से संचालित की जा सकती है। योजना को लेकर सरकार ने विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद रूट, आकार, क्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं का प्रारूप तैयार किया जाएगा। शुरुआती चरण में विपरीत दिशाओं में दो ट्राम चलाने का विकल्प भी देखा जा रहा है। इसकी गति अन्य सड़क वाहनों की तुलना में कम रखे जाने की संभावना है, ताकि भीड़भाड़ वाले इलाके में यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा बनी रहे।सरकार की योजना के अनुसार ट्राम का संचालन फिलहाल पुरानी दिल्ली तक सीमित रखा जाएगा। इसका अंतिम रूट अभी तय नहीं हुआ है। ट्राम में कितनी सीटें होंगी, इसका आकार कितना होगा और किन सड़कों से इसे गुजारा जाएगा, इन सभी बिंदुओं पर अध्ययन के बाद निर्णय लिया जाएगा। 6 मार्च 1908 को हुई थी दिल्ली में ट्राम सेवा की शुरुआत दिल्ली में ट्राम सेवा की शुरुआत 6 मार्च 1908 को हुई थी। करीब 55 वर्षों तक चलने के बाद दिसंबर 1963 में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली में ट्राम को दोबारा शुरू करने की चर्चा समय-समय पर होती रही। 2014 में हुई थी दोबारा शुरुआत की कोशिश वर्ष 2014 में तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग के कार्यकाल में इसे फिर शुरू करने का प्रमुख प्रयास किया गया था। हालांकि, उस समय योजना आगे नहीं बढ़ सकी। ट्राम के लिए अलग ट्रैक तैयार करने में सामने आई तकनीकी अड़चनें इसके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बनीं। पुरानी दिल्ली के व्यस्त और सीमित सड़क स्थान में ट्रैक बिछाने तथा उसके संचालन को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां थीं। इसी वजह से ट्राम को दोबारा शुरू करने की योजना अमल में नहीं आ सकी। अब एक बार फिर दिल्ली की नई बीजेपी सरकार ट्राम सेवा करने की ऐतिहासिक पहल की है। @followers #delhi #DelhiNews #delhincr #DelhiCapitals #delhidiaries #delhimetrolife #delhimetroreels #delhinewsupdates #Delhinewstoday #delhinewshindi #metro #दिल्लीबाजार #दिल्ली #olddelhi #trom #delhitourism #vehicle #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 10, 2026

#लोकसभा में आज 4 बिल पेश होंगे: अमित शाह केरल का नाम बदलने वाला बिल पेश करेंगे; #राज्यसभा में वित्त मंत्री बैंकर्स बुक्स बिल पेश करेंगी

#ParliamentMonsoonSession  संसद के मानसून सत्र-2026 का आज 20वां दिन है। आज से संसद में चर्चा और विधेयक पारित होने की उम्मीद की जा रही है। पहले पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र हटाने को लेकर विपक्ष ने संसद नहीं चलने दिया। वहीं पिछले एक सप्ताह से राम मंदिर चढावा चोरी को लेकर विपक्ष भारी हंगामा कर रहा है। लोकसभा में आज 4 बिल पेश होंगे (Today Four bills will be introduced in Lok Sabha)। गृह मंत्री अमित शाह दो बिल पेश करेंगे। इसमें केरल का नाम बदलने वाला केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 पेश करेंगे। वहीं दूसरा नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एक्ट, 1962 संशोधन बिल है।

जबकि कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल-2026 पेश करेंगे। वहीं केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में संशोधन के लिए बिल संसद में पेश करेंगे। जबकि राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकर्स बुक्स बिल (बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026) पेश करेंगी।

लोकसभा में पेश होने वाले चार बिल के बारे में जानेंः-

केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक-2026
ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल-2026
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन बिल-2026
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) बिल- 2026

#केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026
गृह मंत्री अमित शाह केरल राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक पेश करने के लिए अनुमति मांगेंगे।

#ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश करेंगे। इसका उद्देश्य विभिन्न ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यताओं, नियुक्तियों और सेवा शर्तों में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता लाना है। इस बिल में एक ‘राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग’ (National Tribunals Commission) के गठन का भी प्रस्ताव है।

#खान एवं #खनिज #संशोधन #विधेयक, 2026
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ में संशोधन करने के लिए विधेयक पेश करेंगे।

राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संशोधन विधेयक, 2026
गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एनसीडीसी अधिनियम, 1962 में संशोधन के लिए यह विधेयक सदन के पटल पर रखेंगे।

विपक्ष की आज मीटिंग, #FCRA बिल का करेंगे विरोध

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस FCRA संशोधन बिल का विरोध करेगी। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की सोमवार को होने वाली बैठक में भी चर्चा की जाएगी। FCRA संशोधन बिल संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में लोकसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है। यह बिल विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करेगा।  सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य विदेशी चंदे के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

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#लोकसभा में आज 4 बिल पेश होंगे: अमित शाह केरल का नाम बदलने वाला बिल पेश करेंगे; #राज्यसभा में वित्त मंत्री बैंकर्स बुक्स बिल पेश करेंगी #ParliamentMonsoonSession संसद के मानसून सत्र-2026 का आज 20वां दिन है। आज से संसद में चर्चा और विधेयक पारित होने की उम्मीद की जा रही है। पहले पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र हटाने को लेकर विपक्ष ने संसद नहीं चलने दिया। वहीं पिछले एक सप्ताह से राम मंदिर चढावा चोरी को लेकर विपक्ष भारी हंगामा कर रहा है। लोकसभा में आज 4 बिल पेश होंगे (Today Four bills will be introduced in Lok Sabha)। गृह मंत्री अमित शाह दो बिल पेश करेंगे। इसमें केरल का नाम बदलने वाला केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 पेश करेंगे। वहीं दूसरा नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एक्ट, 1962 संशोधन बिल है। जबकि कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल-2026 पेश करेंगे। वहीं केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में संशोधन के लिए बिल संसद में पेश करेंगे। जबकि राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकर्स बुक्स बिल (बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026) पेश करेंगी। लोकसभा में पेश होने वाले चार बिल के बारे में जानेंः- केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक-2026 ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल-2026 खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन बिल-2026 राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) बिल- 2026 #केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 गृह मंत्री अमित शाह केरल राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक पेश करने के लिए अनुमति मांगेंगे। #ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश करेंगे। इसका उद्देश्य विभिन्न ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यताओं, नियुक्तियों और सेवा शर्तों में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता लाना है। इस बिल में एक ‘राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग’ (National Tribunals Commission) के गठन का भी प्रस्ताव है। #खान एवं #खनिज #संशोधन #विधेयक, 2026 केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ में संशोधन करने के लिए विधेयक पेश करेंगे। राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संशोधन विधेयक, 2026 गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एनसीडीसी अधिनियम, 1962 में संशोधन के लिए यह विधेयक सदन के पटल पर रखेंगे। विपक्ष की आज मीटिंग, #FCRA बिल का करेंगे विरोध वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस FCRA संशोधन बिल का विरोध करेगी। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की सोमवार को होने वाली बैठक में भी चर्चा की जाएगी। FCRA संशोधन बिल संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में लोकसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है। यह बिल विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करेगा। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य विदेशी चंदे के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। @followers #fcrabill #parliyament #kerala #keralam #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 10, 2026

#delhimetro ने रचा इतिहास: समय की पाबंदी और भरोसे के मामले में दुनिया के 3 सबसे बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ा

रिकॉर्ड बनाने के लिए मशहूर #दिल्लीमेट्रो ने अब एक और नया इतिहास रच दिया है। दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी (Punctuality) और भरोसे (Reliability) के मामले में दुनिया के 3 सबसे बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ दिया है। ट्रेनों की पंक्चुअलिटी और विश्वसनीयता के मामले में दिल्ली मेट्रो ने हांगकांग मेट्रो (Hong Kong Metro), पेरिस मेट्रो (Paris Metro) और न्यूयॉर्क सबवे (New York Subway) जैसे कुछ सबसे मशहूर मेट्रो नेटवर्क को पीछे छोड़ दिया है।

#डीएमआरसी ने आंकड़े जारी कर विस्तार से जानकारी दी है। डीएमआरसी ने कहा कि दिल्ली मेट्रो ने समयबद्धता और विश्वसनीयता के मामले में हांगकांग मेट्रो, पेरिस मेट्रो और न्यूयॉर्क सबवे जैसी विश्व की कुछ सबसे प्रतिष्ठित मेट्रो प्रणालियों को पीचे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि डीएमआरसी परिचालन प्रदर्शन को मापने के लिए अत्यंत कड़े मानदंड अपनाता है।
डीएमआरसी के प्रधान कार्यकारी निदेशक कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस अनुज दयाल ने बताया कि दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी और भरोसे में दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ दिया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने समय की पाबंदी और भरोसे के मामले में हांगकांग मेट्रो, पेरिस मेट्रो और न्यूयॉर्क सबवे जैसे कुछ सबसे मशहूर मेट्रो नेटवर्क को पीछे छोड़कर दुनिया के सबसे अच्छे शहरी रेल सिस्टम में अपनी जगह बनाई है। यह कामयाबी इसलिए खास है क्योंकि DMRC ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को मापने के लिए बहुत कड़े क्राइटेरिया फॉलो करता है। जहां कई मेट्रो सिस्टम किसी ट्रेन को तभी लेट मानते हैं जब वह कई मिनट लेट पहुंचती है, वहीं दिल्ली मेट्रो किसी ट्रेन को तब लेट मानती है जब वह अपने डेस्टिनेशन स्टेशन पर तय समय से 59 सेकंड से ज़्यादा देर से पहुंचती।

99% से अधिक पंक्चुअलिटी हासिल करने वाली दुनिया की चुनिंदा मेट्रो

अनुज दयाल ने बताया कि दिल्ली मेट्रो की ट्रेन पंक्चुअलिटी वर्ष 2003 में 98.27 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2005 में बढ़कर 99.64 प्रतिशत हो गई। इस उपलब्धि के साथ, दिल्ली मेट्रो ने अपने परिचालन की शुरुआत के महज दो वर्षों के भीतर ही 99% से अधिक पंक्चुअलिटी हासिल करने वाली दुनिया की चुनिंदा मेट्रो प्रणालियों की प्रतिष्ठित श्रेणी में स्थान बना लिया। इसके बाद से DMRC ने वर्ष दर वर्ष लगातार 99.9% ट्रेन पंक्चुअलिटी हासिल की है। वर्ष 2026 में, अपने विशाल नेटवर्क और बढ़ते बेड़े के बावजूद, दिल्ली मेट्रो ने 99.95 प्रतिशत की असाधारण पंक्चुअलिटी हासिल की है।

#नेटवर्क के व्यापक विस्तार के बावजूद विश्वसनीयता कायम

पंक्चुअलिटी और विश्वसनीयता एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं। डीएमआरसी ने 2.72 मिलियन कार-किलोमीटर का Mean Distance Between Failures (MDBF) हासिल किया है। यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानक है, जो यह दर्शाता है कि किसी सेवा-प्रभावित करने वाली खराबी के आने से पहले मेट्रो ट्रेन औसतन कितनी दूरी तय करती है।दुनिया की 45 प्रमुख मेट्रो प्रणालियों के संघ Community of Metros (COMET) द्वारा किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्किंग के तहत, दो मिनट के विलंब मानदंड के आधार पर दिल्ली मेट्रो को विश्व की शीर्ष पांच सबसे विश्वसनीय मेट्रो प्रणालियों में लगातार स्थान मिलता रहा है।

#ड्राइवरलेस मेट्रो परिचालन में भी अग्रणी

डीएमआरसी वर्तमान में भारत के सबसे बड़े ड्राइवरलेस मेट्रो नेटवर्क का भी संचालन करता है। इसके लगभग 29 प्रतिशत नेटवर्क पर Unattended Train Operation (UTO) के तहत ट्रेनें संचालित हो रही हैं। दिल्ली मेट्रो की लाइन-7, जो 71.55 किलोमीटर लंबी और 45 स्टेशनों वाली है, दुनिया की सबसे लंबी ड्राइवरलेस मेट्रो लाइन है और विश्व की सबसे लंबी सर्कुलर मेट्रो लाइनों में भी शामिल है। यह दिल्ली मेट्रो के लगभग पूरे नेटवर्क को इंटरचेंज सुविधा प्रदान करती है, केवल ग्रे लाइन के एक छोटे हिस्से को छोड़कर। दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी

8.4 से 416.5 KM तक का सफर

दिल्ली मेट्रो ने 25 दिसंबर 2002 को शाहदरा से तीस हजारी के बीच मात्र 8.4 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर और छह स्टेशनों के साथ अपनी परिचालन यात्रा शुरू की थी।आज दिल्ली मेट्रो भारत का सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क बन चुका है, जो 12 लाइनों पर 303 स्टेशनों के साथ 416.5 किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके 31 इंटरचेंज स्टेशन दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विभिन्न हिस्सों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं।यात्रियों की संख्या में भी इस दौरान अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। परिचालन के पहले वर्ष में लगभग 82,000 यात्री यात्राएं प्रतिदिन से शुरू होकर दिल्ली मेट्रो ने 8 अगस्त 2025 को एक दिन में 81 लाख से अधिक यात्री यात्राओं का रिकॉर्ड बनाया। वर्तमान में इसकी औसत दैनिक यात्री संख्या 64.06 लाख यात्री यात्राएं तक पहुंच चुकी है। 

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#delhimetro ने रचा इतिहास: समय की पाबंदी और भरोसे के मामले में दुनिया के 3 सबसे बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ा रिकॉर्ड बनाने के लिए मशहूर #दिल्लीमेट्रो ने अब एक और नया इतिहास रच दिया है। दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी (Punctuality) और भरोसे (Reliability) के मामले में दुनिया के 3 सबसे बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ दिया है। ट्रेनों की पंक्चुअलिटी और विश्वसनीयता के मामले में दिल्ली मेट्रो ने हांगकांग मेट्रो (Hong Kong Metro), पेरिस मेट्रो (Paris Metro) और न्यूयॉर्क सबवे (New York Subway) जैसे कुछ सबसे मशहूर मेट्रो नेटवर्क को पीछे छोड़ दिया है। #डीएमआरसी ने आंकड़े जारी कर विस्तार से जानकारी दी है। डीएमआरसी ने कहा कि दिल्ली मेट्रो ने समयबद्धता और विश्वसनीयता के मामले में हांगकांग मेट्रो, पेरिस मेट्रो और न्यूयॉर्क सबवे जैसी विश्व की कुछ सबसे प्रतिष्ठित मेट्रो प्रणालियों को पीचे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि डीएमआरसी परिचालन प्रदर्शन को मापने के लिए अत्यंत कड़े मानदंड अपनाता है। डीएमआरसी के प्रधान कार्यकारी निदेशक कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस अनुज दयाल ने बताया कि दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी और भरोसे में दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो सिस्टम को पीछे छोड़ दिया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने समय की पाबंदी और भरोसे के मामले में हांगकांग मेट्रो, पेरिस मेट्रो और न्यूयॉर्क सबवे जैसे कुछ सबसे मशहूर मेट्रो नेटवर्क को पीछे छोड़कर दुनिया के सबसे अच्छे शहरी रेल सिस्टम में अपनी जगह बनाई है। यह कामयाबी इसलिए खास है क्योंकि DMRC ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को मापने के लिए बहुत कड़े क्राइटेरिया फॉलो करता है। जहां कई मेट्रो सिस्टम किसी ट्रेन को तभी लेट मानते हैं जब वह कई मिनट लेट पहुंचती है, वहीं दिल्ली मेट्रो किसी ट्रेन को तब लेट मानती है जब वह अपने डेस्टिनेशन स्टेशन पर तय समय से 59 सेकंड से ज़्यादा देर से पहुंचती। 99% से अधिक पंक्चुअलिटी हासिल करने वाली दुनिया की चुनिंदा मेट्रो अनुज दयाल ने बताया कि दिल्ली मेट्रो की ट्रेन पंक्चुअलिटी वर्ष 2003 में 98.27 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2005 में बढ़कर 99.64 प्रतिशत हो गई। इस उपलब्धि के साथ, दिल्ली मेट्रो ने अपने परिचालन की शुरुआत के महज दो वर्षों के भीतर ही 99% से अधिक पंक्चुअलिटी हासिल करने वाली दुनिया की चुनिंदा मेट्रो प्रणालियों की प्रतिष्ठित श्रेणी में स्थान बना लिया। इसके बाद से DMRC ने वर्ष दर वर्ष लगातार 99.9% ट्रेन पंक्चुअलिटी हासिल की है। वर्ष 2026 में, अपने विशाल नेटवर्क और बढ़ते बेड़े के बावजूद, दिल्ली मेट्रो ने 99.95 प्रतिशत की असाधारण पंक्चुअलिटी हासिल की है। #नेटवर्क के व्यापक विस्तार के बावजूद विश्वसनीयता कायम पंक्चुअलिटी और विश्वसनीयता एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं। डीएमआरसी ने 2.72 मिलियन कार-किलोमीटर का Mean Distance Between Failures (MDBF) हासिल किया है। यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानक है, जो यह दर्शाता है कि किसी सेवा-प्रभावित करने वाली खराबी के आने से पहले मेट्रो ट्रेन औसतन कितनी दूरी तय करती है।दुनिया की 45 प्रमुख मेट्रो प्रणालियों के संघ Community of Metros (COMET) द्वारा किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्किंग के तहत, दो मिनट के विलंब मानदंड के आधार पर दिल्ली मेट्रो को विश्व की शीर्ष पांच सबसे विश्वसनीय मेट्रो प्रणालियों में लगातार स्थान मिलता रहा है। #ड्राइवरलेस मेट्रो परिचालन में भी अग्रणी डीएमआरसी वर्तमान में भारत के सबसे बड़े ड्राइवरलेस मेट्रो नेटवर्क का भी संचालन करता है। इसके लगभग 29 प्रतिशत नेटवर्क पर Unattended Train Operation (UTO) के तहत ट्रेनें संचालित हो रही हैं। दिल्ली मेट्रो की लाइन-7, जो 71.55 किलोमीटर लंबी और 45 स्टेशनों वाली है, दुनिया की सबसे लंबी ड्राइवरलेस मेट्रो लाइन है और विश्व की सबसे लंबी सर्कुलर मेट्रो लाइनों में भी शामिल है। यह दिल्ली मेट्रो के लगभग पूरे नेटवर्क को इंटरचेंज सुविधा प्रदान करती है, केवल ग्रे लाइन के एक छोटे हिस्से को छोड़कर। दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी 8.4 से 416.5 KM तक का सफर दिल्ली मेट्रो ने 25 दिसंबर 2002 को शाहदरा से तीस हजारी के बीच मात्र 8.4 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर और छह स्टेशनों के साथ अपनी परिचालन यात्रा शुरू की थी।आज दिल्ली मेट्रो भारत का सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क बन चुका है, जो 12 लाइनों पर 303 स्टेशनों के साथ 416.5 किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके 31 इंटरचेंज स्टेशन दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विभिन्न हिस्सों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं।यात्रियों की संख्या में भी इस दौरान अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। परिचालन के पहले वर्ष में लगभग 82,000 यात्री यात्राएं प्रतिदिन से शुरू होकर दिल्ली मेट्रो ने 8 अगस्त 2025 को एक दिन में 81 लाख से अधिक यात्री यात्राओं का रिकॉर्ड बनाया। वर्तमान में इसकी औसत दैनिक यात्री संख्या 64.06 लाख यात्री यात्राएं तक पहुंच चुकी है। @followers #delhi #DelhiNews #delhincr #DelhiCapitals #delhidiaries #delhimetrolife #delhimetroreels #delhinewsupdates #Delhinewstoday #delhinewshindi #metro #दिल्लीबाजार #दिल्ली #छत्तीसगढ़ #chhattisgarh #ChhattisgarhNews #लोरमी_को_सौगात #लोरमी_के_गौरव #लोरमीमुंगेलीन्यूज़ #lormimungelinews #छत्तीसगढ़_के_माटी #छत्तीसगढ़_महतारी #छत्तीसगढ़ #LocalNews #BreakingNews #BigBreakingNews #todaynews #IndiaNews #NationalNews #ViralNewsUpdate #BigBreaking #LatestUpdates #LatestNews न्यूज़ के लिए कृपया फॉलो करें धन्यवाद👇👇👇 https://www.facebook.com/LORMIMUNGELINEWS?sk=followers

Lormi, Mungeli | Aug 10, 2026