उफ़! ये पुराने वीडियो...
सत्ता और विपक्ष से बाहर होते ही नेताओं के पुराने वीडियो डिजिटल स्पेस से ऑटोमेटिक डिलीट हो जाने चाहिए। ढूंढने पर भी खोजे नहीं जा सकें, ऐसी कोई पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। वरना ये पुराने वीडियो बहुत परेशान करते हैं।
सत्ता का रौब अलग तरह का होता है और विपक्ष की बेतकल्लुफी भी अलग तरह की होती है। दोनों ही स्थिति में नेता लोग अपनी ठसक के हिसाब से बयान दे देते हैं। बयान रिकॉर्ड हो जाते हैं और वे वायरल तब होते हैं जब नेता नहीं चाहते कि वे वायरल हों। बड़ी अजीबो-गरीब स्थिति हो जाती है।
ये हमारे गोविंद सिंह डोटासरा जी हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सबसे ज्यादा मुखर हैं। चूंकि नीट का पेपर लीक हुआ है और उस वक्त शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन जब आप स्वयं शिक्षा मंत्री थे और रीट का पेपर लीक हुआ तब आपके तर्क अलग होते हैं।
विरोधाभास ही विरोधाभास हैं
इसलिए हम हमारे देश के आईटी पेशेवरों का आह्वान करते हैं कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें कि एक निश्चित टाइम फ्रेम में यह बयान वाले वीडियो डिजिटल स्पेस से ऑटोमेटेकली गायब हो जाएं। ताकिवक्त आने पर हमारे नेताओं को शर्मिंदा नहीं होना पड़े।
Alwar, Alwar | Jul 23, 2026