दबंगों के अत्याचार आखिर किस हद तक जाएंगे?
यह तस्वीर सिर्फ एक घायल महिला की नहीं, बल्कि उस बेबसी की तस्वीर है, जिसमें एक गरीब और कमजोर परिवार आज भी दबंगई के सामने न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
आरोप है कि सहरिया समुदाय की महिला गीता के साथ खेत में बेरहमी से मारपीट की गई और उसे घसीटकर पीटा गया। मारपीट में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजनों के अनुसार, उसका बेटा और पति उसे किसी तरह उठाकर उपचार और मदद की उम्मीद में संजय के घर लेकर पहुंचे।
महिला के शरीर पर चोटों के निशान हैं और परिवार घटना के बाद भयभीत बताया जा रहा है।
सवाल यह है कि आखिर एक गरीब आदिवासी महिला के साथ ऐसा व्यवहार करने की नौबत क्यों आई? क्या कमजोर और गरीब होना किसी के साथ हिंसा करने का अधिकार दे देता है?
प्रशासन और पुलिस से मांग है कि मामले को सामान्य विवाद मानकर औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। पीड़िता को तत्काल उचित उपचार और सुरक्षा मिले, घटना की निष्पक्ष जांच हो और जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
गरीब की खामोशी को उसकी कमजोरी मत समझिए।
हर घाव न्याय की मांग करता है।