बरौंधा बस स्टैंड में पहली ही बारिश से हाहाकार, विधायक के निर्देश भी मलबे में दफन!
मझगवां - पंचायतराज के जिम्मेदारों की घोर लापरवाही और जमीनी निगरानी की कमी के कारण जनता के टैक्स के पैसे मलबे में कैसे तब्दील होते है। इसका जीवंत उदाहरण देखना है तो ग्राम पंचायत बरौंधा के बस स्टैंड में देख लीजिए, जहाँ पहली बारिश ने विकास के दावों को घुटने पर ला दिया है, जिसका अंदाजा जलभराव की इन तस्वीरो जिसमे राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को यह समझ नहीं आ रहा कि वे सड़क पर खड़े हैं या किसी तालाब में देख कर लगाया जा सकता है,बता दें कि बरोंधा ग्राम पंचायत द्वारा बस स्टैंड के मुख्य मार्ग पर लाखों रुपये की लागत से एक नाली का निर्माण शुरू कराया गया था, लेकिन निर्माण कार्य को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया,
नाली का काम अधूरा होने के कारण पानी की निकासी आगे नहीं हो पा रही है। रही-सही कसर स्थानीय स्तर पर हुए बेतरतीब अतिक्रमण ने पूरी कर दी, नाली के आसपास भारी मात्रा में मुरूम और मिट्टी डाल दिए जाने के कारण जो थोड़ा-बहुत स्ट्रक्चर बनाया गया था, वह भी अब मलबे के नीचे पूरी तरह से दब चुका है।
*चित्रकूट विधायक के निर्देश भी अधिकारियों ने किए 'ठंडे बस्ते' के हवाले*
इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के नागरिकों ने चित्रकूट विधायक की 'जन चौपाल' में आवाज उठाई थी, जनता का दर्द देखते हुए विधायक ने मौके पर ही जनपद सीईओ को निर्देश दिए थे कि तत्काल नाली को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, अधूरे निर्माण को पूरा कर पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए।
लेकिन इस बात को भी एक महीना बीत चुका है। इसके बावजूद जनपद पंचायत और स्थानीय पंचायती अमले ने धरातल पर एक इंच काम भी आगे नहीं बढ़ाया। जिम्मेदारो की इस कार्यशैली ने जनप्रतिनिधि के आदेशों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है , जिसके चलते बरोंधा बस स्टैंड में दुकानों के सामने पानी और कीचड़ बदस्तूर जमा है, सवाल अब यह है कि आखिर लाखों रुपये का यह आधा-अधूरा निर्माण किसके फायदे के लिए कराया गया था ?
जनपद के आला अधिकारी विधायक के निर्देशों पर एक महीने बाद भी हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे ?.
यदि मझगवां प्रशासन और जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस वायरल बदहाली का तुरंत संज्ञान नहीं लिया और नाली को अतिक्रमण से मुक्त कराकर साफ नहीं कराया, तो स्थानीय स्तर से आंदोलन की स्थिति निर्मित हो सकती है।