पीड़ा में भी महादेव का स्मरण—आंखों में आंसू, वातावरण शिवमय
भस्म आरती के बाद सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में जो दृश्य सामने आया, उसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु को भावुक कर दिया। पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज पीड़ा में होने के बावजूद लगातार “महादेव… महादेव…” का स्मरण करते रहे। उनकी साधना और शिव के प्रति अटूट समर्पण को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए। पूरा वातावरण जैसे शिवमय हो गया था।
मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच बार-बार एक ही भाव उमड़ रहा था कि पूज्य महाराज जी की साधना में शिव तत्व की अनुभूति होती है और ऐसा लगता है जैसे भोले बाबा का विशेष आशीर्वाद उनके ऊपर बना हुआ है। शरीर पीड़ा से गुजर रहा था, लेकिन उनके मुख से महादेव का नाम रुक नहीं रहा था। उनके चेहरे पर साधना का तेज और भीतर शिव के प्रति समर्पण स्पष्ट दिखाई दे रहा था। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को भीतर तक झकझोर दिया।
कई श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। किसी ने इसे अटूट तपस्या कहा, किसी ने शिवभक्ति की पराकाष्ठा, तो किसी के लिए यह स्वयं महादेव के प्रति पूर्ण समर्पण का अद्भुत दृश्य था।