रावण दहन पर पुनर्विचार की मांग, राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ (अ) ने उठाई आवाज
राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. अनिल त्रिपाठी 'मनीष भैया' बोले—रावण दहन पर हो राष्ट्रीय स्तर पर संवाद, खजुहा की परंपरा का भी हो अध्ययन
संगठन ने कहा—भगवान श्रीराम के आदर्शों का सम्मान, उद्देश्य केवल लोकतांत्रिक विमर्श और सांस्कृतिक अध्ययन
विजयादशमी से पहले फतेहपुर में राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ (अ) द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में रावण दहन की परंपरा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की मांग उठाई गई। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. अनिल त्रिपाठी 'मनीष भैया' ने कहा कि भारत की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए रावण दहन की प्रचलित परंपरा पर गंभीर विमर्श होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों का विरोध या किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर लोकतांत्रिक संवाद स्थापित करना है।
प्रेस वार्ता में पं. अनिल त्रिपाठी ने कहा कि भारत में जहां अधिकांश स्थानों पर विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन की परंपरा प्रचलित है, वहीं देश के कुछ क्षेत्रों में रावण को विद्वान, शिवभक्त तथा विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पात्र के रूप में भी सम्मान दिया जाता है। ऐसे में इस विषय पर व्यापक सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक चर्चा की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ (अ) की प्रमुख मांग है कि रावण दहन की परंपरा पर राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्विचार किया जाए तथा सरकार, धार्मिक विद्वानों, इतिहासकारों और सामाजिक संगठनों के बीच संवाद स्थापित किया जाए। संगठन का कहना है कि यह विषय केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक अध्ययन और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
प्रेस वार्ता में फतेहपुर जनपद के खजुहा क्षेत्र का भी उल्लेख किया गया, जहां स्थानीय स्तर पर रावण पूजा से जुड़ी परंपराओं का दावा किया जाता है। संगठन ने मांग की कि खजुहा की इस परंपरा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकविश्वास से जुड़े तथ्यों का प्रमाणिक अध्ययन कराया जाए, ताकि समाज के सामने तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत की जा सके।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपेगा और आवश्यकता पड़ने पर राज्य एवं केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रावण दहन आयोजनों के संबंध में स्पष्ट नीति बनाने तथा देशभर में रावण से संबंधित मंदिरों, पूजा परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन कराया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच जाकर अपनी बात रखेगा और मतदाताओं से अपील करने पर विचार करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और उनके आदर्शों का संगठन सम्मान करता है। रावण दहन पर पुनर्विचार की मांग का अर्थ भगवान श्रीराम के प्रति असम्मान नहीं है,बल्कि विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को समझने और उन पर विमर्श करने की पहल है।
समाचार लिखे जाने तक जिला प्रशासन की ओर से संगठन की मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।भविष्य में इस विषय पर प्रशासन अथवा सरकार की ओर से कोई निर्णय या प्रतिक्रिया आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
एनडी न्यूज़ की अपील:
धार्मिक और सांस्कृतिक विषय अत्यंत संवेदनशील होते हैं।किसी भी मतभेद या वैचारिक असहमति को संविधान और कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से रखा जाना चाहिए।समाज में सौहार्द, भाईचारा और पारस्परिक सम्मान बनाए रखना सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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मुख्य संपादक/संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
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